भारत रूस से सर्वाधिक टैंक ख़रीदकर विश्व-रिकार्ड बनाएगा

भारत की रक्षा ख़रीद परिषद ने 2 अरब डॉलर में रूस से 464 टी-90 एमएस ’तगील’ टैंक ख़रीदने के सौदे पर मोहर लगा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 15 साल में दुनिया में किसी भी देश ने टैंकों की ख़रीद का इतना बड़ा अनुबन्ध नहीं किया है, जैसा अनुबन्ध भारत रूस के साथ करने जा रहा है।
T-90MS at Russia Arms Expo-2016
टी-90 एमएस टैंक। स्रोत :RAE-2016

भारतीय समाचार पत्र टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने ख़बर दी है कि भारत के रक्षा मन्त्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता में भारत की रक्षा ख़रीद परिषद ने भारतीय सेना के हथियारों के आधुनिकीकरण की परियोजना की प्राथमिक स्तर पर पुष्टि कर दी है। इस परियोजना के अनुसार, भारतीय सेना के लिए  82 खरब दस अरब रुपए यानी 12 अरब डॉलर से अधिक धनराशि के आधुनिकतम  हथियार व अन्य उपकरण ख़रीदे जाएँगे। टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के अनुसार इन हथियारों में चौथी पीढ़ी के 83 बहुउद्देशीय हल्के लड़ाकू मार्क-1ए तेजस विमान, 464 टी-90 रूसी टैंक तथा भारतीय अग्निवर्षक रिएक्टिव तोप ’पिनाका’ की छह अतिरिक्त रेजीमेण्टें शमिल होंगी। टी-90 टैंक 2 अरब डॉलर के पड़ेंगे।

योजना यह बनाई गई है कि भारत रूस से लायसेंस लेकर भारत के रक्षा मन्त्रालय की ऑर्डीनेंस फ़ैक्ट्री में ही इन रूसी टैंकों की जुड़ाई करेगा।

रूसी पत्रिका ’एक्सपर्त वरूझेनी’ यानी ’हथियारों का निर्यात’ के प्रमुख सम्पादक अन्द्रेय फ़्रलोफ़ ने समाचार पत्र गज़्येता डॉट रू को बताया — भारत की रक्षा ख़रीद परिषद द्वारा पिछले 15 साल में दुनिया में टैंकों की ख़रीद के सबसे बड़े अनुबन्ध की पुष्टि करने से इस अनुबन्ध के सामने खड़ी अन्तिम बाधा भी दूर हो गई है।

अन्द्रेय फ़्रलोफ़ ने कहा — इस अनु्बन्ध से यह भी सिद्ध होता है कि रूस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ टैंकों का आविष्कारक, उनका सबसे बड़ा उत्पादक और उनका सबसे बड़ा सप्लायर है। बड़ी संख्या में टी-90एमएस टैंकों का उत्पादन करके रूसी कम्पनी ’उराल-वगोन-ज़वोद’ दुनिया में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर देगी। इसके साथ-साथ वह टी-90 सीरीज के दूसरे  मॉडलों  का उत्पादन भी जारी रखेगी।

अन्द्रेय फ़्रलोफ़ ने समाचार पत्र गज़्येता डॉट रू को बताया — टी-90एमएस टैंकों के लिए कुछ कल-पुर्जों का उत्पादन रूसी कम्पनी ’उराल-वगोन-ज़वोद’ के कारख़ानों में किया जाएगा और उनके कुछ हिस्सों का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा। इस तरह यह अनुबन्ध भारत और रूस दोनों ही देशों के रक्षा उद्योगों के लिए फ़ायदेमन्द होगा।

विगत मार्च में भारत में हुई रक्षा प्रदर्शनी डेफ़एक्सपो-2016 के दौरान ही रूसी कम्पनी ’उराल-वगोन-ज़वोद’  के महानिदेशक ओलेग सिएन्का ने ’गज़्येता डॉट रू’ को इण्टरव्यू देते हुए बताया था कि  ’उराल-वगोन-ज़वोद’ भारत के पास उपस्थित टी-90 और टी-72 टैंकों का आधुनिकीकरण करेगी। उन्होंने ज़ोर दिया था कि उनकी कम्पनी भारतीय बाज़ार को प्राथमिकता दे रही है क्योंकि उसे ऐसा लग रहा है कि भारत एक संभावनाशील ख़रीददार है।

रूसी कम्पनी ’उराल-वगोन-ज़वोद’ और भारत के बीच सहयोग 1978 में शुरू हुआ था, जब ’उराल-वगोन-ज़वोद’ ने भारत को टी-72 टैंकों की सप्लाई की थी। बाद में ’उराल-वगोन-ज़वोद’ के विशेषज्ञों ने भारत के अवध टैंक निर्माण कारख़ाने के पुनर्निर्माण में योग दिया था, जहाँ पर बाद में टी-72 टैंकों का उत्पादन किया जाने लगा। फिर 2001 में दो पक्षों के बीच सहयोग का नया दौर शुरू हुआ, जब भारत ने टी-90 टैंकों की ख़रीद करने के बारे में एक अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए। आजकल भारत में टी-90 भीष्म टैंकों का उत्पादन किया जाता है। यही नहीं ’उराल-वगोन-ज़वोद’ भारत को हथियारों का रख-रखाव (सर्विसिंग) करने में भी सहयोग दे रही है तथा भारत को अतिरिक्त कल-पुर्जे और इंजन भी बेच रही है। जब भारत ने ’उराल-वगोन-ज़वोद’ से टी-72 टैंकों का आधुनिकीकरण करने के बारे में पूछताछ की तो ’उराल-वगोन-ज़वोद’ ने भारत के सामने टी-72 और टी-90एस टैंकों में सुधार करने से जुड़े कई तरह के प्रस्ताव रखे।   

जैसाकि रूसी कम्पनी ’उराल-वगोन-ज़वोद’  के महानिदेशक अलेग सिएन्का ने बताया — भारत टी-72 टैंकों का इस्तेमाल सिर्फ़ 2025-2030 तक ही करना चाहता है और बाद में इनकी जगह वह नई क़िस्म के युद्धक टैंकों को सेना में शामिल करना चाहता है। भारत में इस परियोजना को एफ़आरसीवी (फ़्यूचर रैडी कॉम्बेट व्हीकल) परियोजना नाम दिया गया है। रूसी टी-90 एमएस टैंक (जो टी-90एस टैंकों का ही आधुनिकीकृत रूप हैं) भारत की सेना में नए युद्धक टैंकों को शामिल करने की इस परियोजना पर खरे उतरते हैं।

अलेग सिएन्का ने कहा — अगर भारत हमसे यह कहेगा कि ’उराल-वगोन-ज़वोद’  आधुनिकीकृत टी-90एस टैंकों का परीक्षण करके दिखाए तो हम परीक्षण करने के लिए इस टैंक को भारत भेजने के लिए तैयार हैं।

रूसी पत्रिका ’अर्सिनाल अतेचिस्त्वा’ यानी ’जन्मभूमि का शस्त्रागार’ के सम्पादक वीक्तर मुरख़ोवस्की ने कहा — नीझ्नी तगील में सम्पन्न हुई रशियन आर्म एक्सपो प्रदर्शनी में मैंने अपनी आँखों से यह देखा था कि उच्चपदस्थ भारतीय सैन्य अधिकारी टी-90एमएस टैंक में कितनी गहरी दिलचस्पी दिखा रहे थे।

वीक्तर मुरख़ोवस्की ने कहा — भारतीय अधिकारी भी यह देखकर चकित थे कि भारतीय सेना के पास उपस्थित टी-90एस टैंक के मुक़ाबले टी-90एमएस टैंक कितना ज़्यादा कारगर और श्रेष्ठ है। यह निश्चय ही एक नई क़िस्म का, एक नए ढंग का, नई ख़ासियतों वाला एकदम नया टैंक है। यह टैंक नई तरह के हथियारों से लैस है इसलिए इसे एकदम नई क़िस्म का हथियार माना जा सकता है।

वीक्तर मुरख़ोवस्की ने बताया कि पाकिस्तान जल्दी ही चीन से नई क़िस्म के वीटी-5 टैंक ख़रीदने जा रहा है। चीन ने अपने इन नए टैंकों को एयरशो-2016 में पेश किया था।

वीक्तर मुरख़ोवस्की ने कहा — भारत चाहता है कि बख़्तरबन्द तकनीक के क्षेत्र में भारतीय सेना पाकिस्तान से श्रेष्ठ हो। लेकिन फिर भी यह सोचना कि यह अनुबन्ध कल ही हो जाएगा, हमारी नादानी होगी क्योंकि भारत में भी अधिकारी फूँक-फूँक के क़दम रखते हैं और सारे काम धीरे-धीरे और बहुत सावधानी के साथ करते हैं।

2016 के वसन्त काल में रूस ने सीरिया में टी-90 टैंकों का इस्तेमाल किया और सीरियाई युद्ध में यह टैंक बेहद सफल रहे।

1980-90 में बनाए गए टी-72बी टैंक के आधार पर निर्मित टी-90 टैंक को उसके प्रमुख डिजाइनर व्लदीमिर पोतकिन के नाम पर ’व्लदीमिर’ कहकर पुकारा जाता है। जबकि इसके सुधरे हुए रूप को यानी निर्यात करने के लिए बनाए गए टी-90एमएस टैंक को ’तगील’ के नाम से पुकारा जाता है। इस टैंक में 2ए46एम-5  नम्बर की 125 मिलीमीटर की चिकनीनाल लगी हुई है तथा यह टैंक तापीय दूरबीन के साथ लेजर चालित निर्देशित मिसाइलों से लैस है। इस तोप के कवचभेदी और संचयी गोले 4000 मीटर की दूरी तक मार कर सकते हैं। इस टैंक से छोड़े जाने वाले किरच भरे विस्फोटक गोले 9 हज़ार 600 मीटर तक मार करते हैं। अगर इस टैंक से सीधी दिशा में कोई गोला छोड़ा जाए तो वह दो मीटर की ऊँचाई पर 2 हज़ार 120 मीटर दूर जाकर गिरेगा।

ख़रीददार के अनुरोध पर टी-90एमएस तोप में टैंकरोधी संचालित मिसाइलों को रोकने के लिए ’अरेना-ए-’ नामक सक्रिय सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात की जा सकती है।

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