रक्षा खर्च की दृष्टि से रूस को पीछे छोड़ भारत दुनिया के 5 प्रमुख देशों में शामिल

पिछले 30 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब रूस दुनिया के उन पाँच देशों की सूची से बाहर आ गया है, जो देश की सुरक्षा पर सबसे ज़्यादा खर्च करते हैं। लेकिन अगर देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में रक्षा खर्चों का प्रतिशत देखा जाए तो इस दृष्टि से रूस आज भी अमरीका, चीन और यूरोप से आगे है।
Russian army
स्रोत :Evgeny Biyatov/RIA Novosti

ब्रिटिश विश्लेषक कम्पनी जेन्स डिफ़ेन्स बजट ने हाल ही में सन् 2016 की जो रिपोर्ट जारी की है, उसके अनुसार रूस दुनिया के उन पाँच देशों की सूची से बाहर आ गया है, जो हथियारों की ख़रीद और देश की सुरक्षा पर सर्वाधिक खर्च करते हैं। इस सूची में क्रमशः अमरीका, चीन और ब्रिटेन का नाम सबसे ऊपर है। सूची में चौथे नम्बर पर भारत को रखा गया है, जिसने सऊदी अरब और रूस को पीछे छोड़ दिया है। समाचारपत्र ’फ़ाइनेंशियल टाइम्स’ ने लिखा है कि इस तरह रूस 1990 के बाद से पहली बार पाँचवें स्थान से भी नीचे खिसक गया है।

रूस पर पश्चिमी देशों के द्वारा लगाए गए प्रतिबन्धों के लागू होने के बाद और दुनिया में तेल की क़ीमतें बुरी तरह से नीचे गिरने के बाद रूस ने  अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बजट में तय अनुदान घटाने शुरू कर दिए। मस्क्वा स्थित विश्व अर्थव्यवस्था और अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध संस्थान के अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा केन्द्र के निदेशक अलिक्सेय अरबातफ़ ने बताया कि 2016 में रूस ने रक्षा-खर्चों के लिए बजट में कुल 32 खरब रुपए यानी 52 अरब डॉलर की राशि तय की थी और 2017 के लिए रूस के बजट में रक्षा-अनुदान कुल 28 खरब रुपए यानी 46 अरब डॉलर के बराबर सुनिश्चित किए गए हैं। अलिक्सेय अरबातफ़ का कहना है कि रक्षा अनुदानों को कम करने का कारण सिर्फ़ यही है कि रूस का बजट घाटे का बजट है और रूस में आजकल आर्थिक मन्दी का दौर चल रहा है। इसके अलावा रक्षा अनुदान घटाने का और कोई कारण नहीं है।

विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, रूस में रक्षा अनुदान कुल सकल घरेलू उत्पाद की सिर्फ़ 5 प्रतिशत राशि के बराबर होते हैं। इस दृष्टि से देखें तो रूस अमरीका, चीन और ज़्यादातर यूरोपीय देशों से आगे है क्योंकि अमरीका रक्षा पर अपने बजट की सिर्फ़ 3.1 प्रतिशत राशि खर्च करता है और चीन तथा अधिकांश यूरोपीय देश कुल बजट की 2 प्रतिशत से ज़्यादा धनराशि राष्ट्रीय सुरक्षा पर खर्च नहीं करते। हर देश के निजी बजट के आधार पर अगर देखा जाए तो राष्ट्रीय सुरक्षा पर रूस से ज़्यादा खर्च सिर्फ़ सऊदी अरब और इज़रायल करते हैं। सऊदी अरब अपने बजट का 13 प्रतिशत हिस्सा और इज़रायल क़रीब साढ़े 5 प्रतिशत हिस्सा रक्षा खर्चों के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

मस्क्वा स्थित विश्व अर्थव्यवस्था और अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध संस्थान के अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा केन्द्र के निदेशक अलिक्सेय अरबातफ़ ने बताया कि रूस ने अपने रक्षा खर्चों में दूसरी मदों के अलावा सबसे कम कटौती की है। रूसी अर्थव्यवस्था में सामाजिक मदों पर होने वाले खर्चों को बहुत ज़्यादा घटा दिया गया है। इससे पता लगता है कि रूस के नेता रूस की सुरक्षा को कितना ज़्यादा महत्व देते हैं। समाचारपत्र ’नोवया गज़्येता’ ने अक्तूबर-2016 में जानकारी दी थी कि रूस के बजट में से रूस की सरकार ने ’अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण और अभिनव विकास’ पर होने वाले खर्चों में ढाई खरब रुपए की कटौती की है। रूस के ’नागरिकों का जीवन स्तर ऊपर उठाने’ के लिए तय धनराशि में भी 90 अरब 90 करोड़ रुपए की कमी कर दी गई है। देश की ’परिवहन व्यवस्था के विकास’ की मद में तय रक़म में साढ़े 83 अरब रुपए कम कर दिए गए हैं। 

अलिक्सेय अरबातफ़ ने कहा — रूस अपनी रक्षा परियोजनाओं पर अमल की अवधि को बदलकर अपने सैन्य-खर्चों में कुछ कटौती कर सकता है, लेकिन वह अपनी रक्षा परियोजनाओं को पूरी तरह से स्थगित नहीं करेगा। सन् 2025 तक रूसी सेना को हथियारबन्द करने का जो नया कार्यक्रम बनाया गया है, वह इसी तरह के सन् 2020 तक के कार्यक्रम से कुछ अलग है। इस तरह रूस ने अपने अनेक सुरक्षा खर्चों को भी कुछ समय के लिए टाल दिया है। इसके अलावा रूस ने ऐसे बड़े सैन्याभ्यासों के कार्यक्रमों  में भी कुछ बदलाव किए हैं, जिनमें डेढ़ लाख तक सैनिक भाग लेते हैं और ये बदलाव करके कुछ आर्थिक बचत की है।

2016 में सर्वाधिक रक्षा-खर्च करने वाले दस देश

अमरीका — 6 खरब 22 अरब डॉलर

चीन — 1 खरब 92 अरब डॉलर 

ब्रिटेन — 54 अरब डॉलर

भारत — 51 अरब डॉलर

सऊदी अरब — 49 अरब डॉलर

रूस — 48 अरब डॉलर

फ़्राँस — 44 अरब डॉलर

जापान — 42 अरब डॉलर

जर्मनी — 36 अरब डॉलर

दक्षिणी कोरिया — 33 अरब डॉलर

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