भारत के लिए केए-226 हैलिकॉप्टर उलान-उदे में बनाए जाएँगे

भारत ने रूस को केए-226 टी हैलिकॉप्टरों का एक बड़ा आर्डर दिया है। भारत के इस आर्डर की बदौलत रूस को अब दो कारख़ानों में इस तरह के हैलिकॉप्टर बनाने होंगे।
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केए-226 हैलिकॉप्टर। स्रोत :Marina Lystseva / TASS

रूसी कम्पनी ’विर्ताल्योति रस्सी’ ने भारत से केए-226 हैलिकॉप्टरों का एक बड़ा आर्डर मिलने के बाद यह तय किया है कि वह इस बहुउद्देशीय हैलिकॉप्टर की जुड़ाई करने के लिए अपने एक और कारख़ाने का इस्तेमाल करेगी। अभी तक बश्कीरिया प्रदेश के कुमेरताऊ विमानन कारख़ाने में ही इस तरह के हैलिकॉप्टरों का उत्पादन किया जाता था, लेकिन भारत से मिले विशाल आर्डर को जल्दी से जल्दी पूरा करने के लिए अब उलान-उदे में भी केए-226 हैलिकॉप्टरों का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। अभी दो साल पहले तक कुमेरताऊ विमानन कारख़ाना घाटे में चल रहा था। आर्डर कम थे और उत्पादन बहुत सीमित मात्रा में होता था। लेकिन 2017 में हैलिकॉप्टरों की सप्लाई करने के इतने ज़्यादा निर्यात-आर्डर मिले हैं कि अब इस कारख़ाने में उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ जाएगा।

सरकारी कम्पनी ’रोसतेख़’ की सहयोगी कम्पनी ’विर्ताल्योति रस्सी’ अब उलान-उदे विमानन कारख़ाने में भी नए हलके हैलिकॉप्टर केए-226 टी का उत्पादन शुरू कर देगी। ’कमेरसान्त’ समाचारपत्र को जानकारी देते हुए कम्पनी के एक अधिकारी ने बताया कि इसके साथ-साथ कुमेरताऊ विमानन कारख़ाने में भी केए-226 हैलिकॉप्टरों को उत्पादन जारी रखा जाएगा। लेकिन इस कारख़ाने में उत्पादित हैलिकॉप्टरों की सप्लाई रूसी सुरक्षा संगठनों, रूसी नागरिक संस्थाओं और अन्य विदेशी आयातकों को की जाएगी।

यह फ़ैसला इसलिए किया गया है ताकि विगत अक्तूबर में भारत की सरकारी कम्पनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ रूस ने जिस अन्तरसरकारी अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए हैं, उस अनुबन्ध को जल्दी से जल्दी पूरा किया जा सके। दोनों पक्षों ने यह भी तय किया है कि भारत के बंगेलुरु शहर में भी केए-226टी हैलिकॉप्टरों का उत्पादन शुरू करने के लिए वहाँ एक सँयुक्त कम्पनी की स्थापना की जाएगी। लेकिन शुरू में 60 हैलिकॉप्टरों का उत्पादन रूस में ही किया जाएगा। बाक़ी 140 हैलिकॉप्टर रूस से लायसेंस लेकर भारत में बनाए जाएँगे। रूसी कम्पनी ’विर्ताल्योति रस्सी’ के अधिकारियों ने रूसी समाचारपत्र कमेरसान्त को बताया — रूसी और भारतीय कम्पनियों के बीच अधिकारों और ज़िम्मेदारियों का बँटवारा कर लिया जाएगा ताकि हैलिकॉप्टरों की क्वालिटी को सुरक्षित रखते हुए इस प्राथमिक परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके।  

केए-226टी — ’कमोफ़’ कम्पनी द्वारा डिजाइन किया हुआ और बनाया हुआ एक बहुउद्देशीय हलका हैलिकॉप्टर है। इस हैलिकॉप्टर में सात सवारियाँ बैठ सकती हैं। इसी तरह के मालवाहक हैलिकॉप्टर में एक टन सामान ढोया जा सकता है। इस हैलिकॉप्टर में फ़्राँसीसी कम्पनी सफ़्रान हैलिकॉप्टर्स इंजिन्स द्वारा बनाए जाने वाले ’एर्रियस’ क़िस्म के दो इंजन लगे हुए हैं। यह हैलिकॉप्टर किसी भी मौसम में रात-दिन उड़ान भर सकता है। रूस में अभी तक ऐसे 70 हैलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें से अधिकतर हैलिकॉप्टरों का इस्तेमाल रूस की सरकारी संस्थाएँ और संगठन ही कर रहे हैं।

रूसी कम्पनी ’विर्ताल्योति रस्सी’ के अधिकारियों ने समाचारपत्र ’कमेरसान्त’ को बताया कि नए आर्डर मिलने के बाद कुमेरताऊ विमानन कारख़ाने में काम का बोझ बहुत बढ़ गया है। हैलिकॉप्टरों की सप्लाई और देख-रेख करने के नए अनुबन्धों की बदौलत कारख़ाने में काम 40 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गया है और इस कारख़ाने में बनाए जाने वाले हैलिकॉप्टरों की संख्या बढ़कर अब पहले के मुक़ाबले चार गुनी हो जाएगी। सन् 2017 में कुमेरताऊ विमानन कारख़ाने में  चीन को निर्यात करने के लिए भी छह केए-32 हैलिकॉप्टरों का उत्पादन किया जाएगा। समुद्री विमानन के लिए केए-27 और केए-31 हैलिकॉप्टरों की माँग कुछ देशों में भी बढ़ती जा रही है। इसके अलावा कुमेरताऊ विमानन कारख़ाने में भारत के लिए केए-28 हैलिकॉप्टरों का उत्पादन भी किया जा रहा है। सन् 2017 के लिए कुमेरताऊ विमानन कारख़ाने को साढ़े दस अरब डॉलर के अनुबन्ध मिल चुके हैं। उलान-उदे विमान निर्माण कारख़ाना सोवियत सत्ता काल में भारत के साथ सहयोग कर चुका है। तब इस कारख़ाने ने इर्कूत्स्क विमानन कारख़ाने के साथ मिलकर भारत को मिग-27 विमानों का निर्माण करने का अधिकार दिया था और भारत में मिग-27 का उत्पादन शुरू करने में सहायता की थी। उलान-उदे विमानन कारख़ाने के पास ऐसे इंजीनियरों और कारीगरों की कमी नहीं है, जो डिजिटल तकनीक के उस्ताद हैं और भारत के लिए कुशलतापूर्वक हैलिकॉप्टरों का निर्माण कर सकेंगे।  

’आवियापोर्त’ नामक एवियेशन कम्पनी के कार्यकारी निदेशक अलेग पन्तिलिएफ़ का मानना है कि केए-226टी नाम हैलिकॉप्टरों का उत्पादन करने की रूसी -भारतीय परियोजना ’विर्ताल्योति रस्सी’ कम्पनी के लिए बड़ा महत्व रखती है। उन्होंने कहा — इस परियोजना पर सफलतापूर्वक अमल करके ’विर्ताल्योति रस्सी’ कम्पनी दूसरे देशों के विमानन बाज़ार में भी सफलतापूर्वक प्रवेश कर सकेगी और हलके हैलिकॉप्टरों के खुले बाज़ार में घुस सकेगी, जो अभी तक खाली पड़ा है।  अलेग पन्तिलिएफ़ ने कहा — अभी तक  ’विर्ताल्योति रस्सी’ कम्पनी अपने विमानन कारख़ानों में बड़े स्तर पर छँटनी करना चाहती थी, लेकिन वह डर रही थी कि स्थानीय प्रशासन उसके इस फ़ैसले का विरोध करेगा और इलाके में सामाजिक तनाव भी फैल सकता है।

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