2017 में रूसी सेना के सामने कौन-कौन सी चुनौतियाँ होंगी?

सीरिया के विघटन को रोककर रूसी सेना ने यह दिखा दिया कि वह कितनी ताक़तवर और लड़ाकू है। रूसी सेना के सामने आज जो चुनौतियाँ खड़ी हुई हैं उनमें सबसे पहली चुनौती तो नाटो के भीतर रूस के प्रति बढ़ती जा रही शत्रुता और विरोध की भावना है और दूसरी चुनौती है कि उसे ख़ुद अपना आगे आधुनिकीकरण करना है।
Russian Minister of Defence Sergei Shoigu
रूस के रक्षा मन्त्री सिर्गेय शायगू। स्रोत :Aleksey Nikolskyi/RIA Novosti

बीते गुरुवार को यानी 22 दिसम्बर को रूस के रक्षा मन्त्रालय के उच्चाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें 2016 के इस बीत रहे साल में किए गए कामों की समीक्षा की गई। बैठक में बोलते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने सीरिया में रूसी सेना की सफलताओं का ज़िक्र किया और बताया कि रूसी सेना आज चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने उन नई चुनौतियों का भी ज़िक्र किया, जो आज रूसी सेना के सामने मुँह उठाए खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि रूसी सेना और नौसेना को आधुनिकतम हथियारों से लैस करने का काम आगे भी जारी रखा जाएगा। हम रूस की सीमाओं पर और सारी दुनिया में सैन्य-राजनीतिक परिस्थिति में होने वाले बदलावों और शक्ति-सन्तुलन में होने वाले छोटे-से छोटे बदलावों पर पूरी-पूरी नज़र रखेंगे। 

सीरिया

बैठक में बोलते हुए रूस के रक्षा मन्त्री सिर्गेय शायगू ने कहा — रूसी वायुसेना ने अपने सामने रखे गए उद्देश्यों को बड़ी कुशलता से पूरा किया और सीरिया के विघटन को रोक दिया। सीरिया को छोटे-छोटे देशों में नहीं बिखरने दिया।

उन्होंने कहा — पश्चिमी एशिया के अरब देशों  और अफ़्रीकी देशों में रंगीन क्रान्तियों की जो बाढ़ आ गई थी, उस बाढ़ को रोक दिया गया है। समस्याओं के राजनीतिक समाधान और पारस्परिक रूप से एक-दूसरे के शत्रु बने हुए विभिन्न पक्षों के बीच आपसी समझौते की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब इस इलाके की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ह्मेयमिम वायुसैनिक अड्डे पर स्थाई रूप से रूस की वायुसेना का एक दस्ता तैनात कर दिया गया है। तारतुस में युद्धपोतों का तकनीकी रख-रखाव करने वाला केन्द्र भी पहले की तरह काम करता रहेगा और रूसी नौसेना के युद्धपोतों की तकनीकी देखभाल में सहायता देता रहेगा।

रूस के रक्षा मन्त्री ने बताया कि सीरिया के हमा और होम्स नगरों को आतंकवादी गिरोहों के कब्ज़े से पूरी तरह मुक्त करा लिया गया है। लताकिया, दमिश्क और हैलाब (अलेप्पो) प्रदेशों में भी आतंकवादियों का सफ़ाया कर दिया गया है। 

नाटो से रिश्ते

बैठक में बोलते हुए रूस के रक्षा मन्त्री सिर्गेय शायगू ने कहा — रूसी सेना की बहुत सी कार्रवाइयों पर नाटो सन्धि संगठन ने शत्रुतापूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

उन्होंने कहा — पूरी दुनिया के सामने खड़ी बुराई  — आतंकवाद  — के ख़िलाफ़ एकजुट होने की जगह नाटो ने रूस को ही दुनिया के लिए प्रमुख खतरा घोषित कर दिया और नाटो आज रूस की सीमाओं के पास अपनी ताक़त लगातार बढ़ाता जा रहा है।

उन्होंने बताया — नाटो के सैन्य बजट में 26 अरब डॉलर की वृद्धि कर दी गई है और वह बढ़कर 918 अरब डालर तक पहुँच गया है, जबकि रूस का रक्षा बजट घटा दिया गया है और वह 52 अरब डॉलर की जगह अब सिर्फ़ 48 अरब डॉलर रह गया है। अगले साल रूस के पड़ोसी बाल्टिक देशों में और पोलैण्ड में नाटो अपनी सेना की चार नई बटालियनें तैनात करने की योजना बना रहा है।

पोलैण्ड और रुमानिया के इलाकों में नाटो ने सभी तरह के मिसाइल छोड़ने वाली एमके-41 नामक प्रक्षेपण तोपें तैनात कर दी हैं। यूरोप में बनाई जा रही मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत इन प्रक्षेपण तोपों की तैनाती को लेकर रूसी सेना के भीतर चिन्ता पैदा हो गई है।

रूस के रक्षा मन्त्री सिर्गेय शायगू ने कहा — ये अमरीकी मिसाइल प्रक्षेपण तोपें इस तरह की हैं कि इनमें छोटे-मोटे कुछ बदलाव करके इनसे 2400 किलोमीटर दूर तक मार करने वाले टोमाहॉक क्रूज मिसाइल भी छोड़े जा सकते हैं। इन तोपों से छोड़े जाने वाले मिसाइल दस मिनट से भी कम समय में रूसी इलाकों पर हमले कर सकेंगे।

इस सिलसिले में रूस के रक्षा मन्त्रालय ने यह फ़ैसला किया है कि वह पश्चिमी दिशा में अपनी थल सेना की तीन अतिरिक्त डिवीजनें तैनात करेगा। शान्तिकाल में इन सैनिकों की संख्या 13 हज़ार तक होगी।
रूस-भारत संवाद से बात करते हुए ’तास’ समाचार समिति के सैन्य-समीक्षक वीक्तर लितोफ़किन ने बताया — टैंक डिवीजनों में टी-72बी-3 और टी-90 क़िस्म के  एकदम आधुनिकतम नए टैंक शामिल होंगे। रूसी सेना के बख़्तरबन्द सैन्य दस्ते बीएमपी-3, बीएमपी-4 और स्वचालित मशीनगनें ’कोअलित्सिया’ से लैस होंगे। रूसी सेना के पास उपस्थित पुराने टैंकों की जगह अब उसे नए ’अरामाता’ टैंकों से लैस किया जा रहा है। पश्चिमी दिशा में रूस द्वारा तैनात की जाने वाली चार नई डिवीजनों को आग बरसाने वाले हैलिकॉप्टरों से भी लैस किया जाएगा। 

अगले साल के लिए योजनाएँ

रूस के रक्षा मन्त्री ने जानकारी दी है कि सन् 2017 में रूस के पश्चिमी और दक्षिणी-पश्चिमी हिस्सों में तैनात सैन्य-दस्तों को तथा रूस के उत्तर-ध्रुवीय इलाकों में तैनात रूसी सैन्य-दस्तों को और ज़्यादा मज़बूत बनाया जाएगा।

सिर्गेय शायगू ने यह आदेश दिया है कि अगले साल रूसी सेना को पाँच नए सामरिक बमवर्षक विमान भी दिए जाएँगे, जिनमें एक टीयू-160 विमान होगा और चार टीयू-95 एमएस विमान होंगे। इसके अलावा रूसी सेना को 900 से ज़्यादा टैंक और विभिन्न क़िस्मों की बख्तरबन्द गाड़ियाँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी। रूस के रक्षा मन्त्री के अनुसार, अगले साल रूस के चार मिसाइल और वायु सुरक्षा दस्तों को हवाई सुरक्षा से जुड़ी नई व्यवस्थाएँ और आधुनिकतम एस-400 ’त्रिऊम्फ़’ हवाई रक्षा व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। 

रूस के रक्षा मन्त्रालय की कमान को यह उम्मीद भी है कि अगले साल रूसी थलसेना को ’इस्कान्दर-एम’ नामक दो सामरिक-रणनीतिक व्यवस्थाएँ मिल जाएँगी। इसके अलावा तीन डिवीजनों को हवाई सुरक्षा मिसाइल व्यवस्थाओं ’टॉप-एम2’ से लैस कर दिया जाएगा।

सेना के आधुनिकीकरण में दिक़्क़तें

सन् 2016 में रूसी सेना के क़रीब 60 प्रतिशत हथियार और तकनीक नवीनतम और आधुनिकतम तकनीक से बदली जा चुकी है, लेकिन आगे सेना के आधुनिकीकरण के इस काम में दिक़्क़तें दिखाई दे रही हैं।

रूस-भारत संवाद से बातचीत करते हुए रूसी सामरिक मिसाइल सेना मुख्यालय के पूर्व प्रमुख, पूर्व कर्नल-जनरल वीक्तर येसिन ने कहा — रूसी सेना के आधुनिकीकरण के काम पर सन् 2022 तक कुल 220 खरब रूबल यानी साढ़े 36 खरब डॉलर खर्च किए जाएँगे। इसके बाद रूसी सेना पूरी तरह से नई हो जाएगी और रूस की भली-भाँति सुरक्षा करने में सक्षम हो जाएगी। लेकिन कुछ ऐसी समस्याएँ सामने आ रही हैं, जिन्हें हल किया जाना ज़रूरी है। 

उन्होंने बताया — इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि रूस कुछ प्रमुख कल-पुर्जों और इंजनों का इतनी जल्दी ख़ुद निर्माण नहीं कर पाएगा। अभी तक ये कल-पुर्जे और उपकरण रूस विदेशों से ख़रीदता था, लेकिन अब जब रूस पर प्रतिबन्ध लगा दिए गए हैं, इन उपकरणों का रूस को ख़ुद निर्माण और उत्पादन करना होगा और इस काम में कुछ समय लगेगा।


 

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