रूसी सेना को पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान 2018 के बाद मिलेंगे

रूस का रक्षा मन्त्रालय पाँचवी पीढ़ी के महंगे टी-50 लड़ाकू विमान ख़रीदने में कोई जल्दबाज़ी नहीं करेगा। जब तक रूसी वायुसेना के पास इसी क़िस्म के दूसरे विमान हैं और वे रूसी वायुसेना की ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं, नए विमानों को ख़रीदने की कोई हड़बड़ी नहीं है।
PAK FA
रूस के पाँचवी पीढ़ी का टी-50 लड़ाकू विमान। स्रोत :Vitaly Kuzmin (CC BY-SA)

रूस के रक्षा उपमन्त्री यूरी बरीसफ़ ने कहा है कि रूसी सेना को पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान वर्ष 2018 के बाद मिलने शुरू हो जाएँगे।

उन्होंने कहा — सम्भावना यह है कि 2018 से 2025 तक के लिए बनाई गई हथियारों की आपूर्ति की अगली परियोजना में रूसी सेना को ये विमान मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि इस विमान में अभी कुछ और सुधार करने की ज़रूरत है और सेना इन महंगे विमानों को ख़रीदने की हड़बड़ी नहीं करेगी। फ़िलहाल चार प्लस प्लस पीढ़ी के एसयू-35एस विमान पाँचवी पीढ़ी के विमानों की जगह काम करेंगे।

यूरी बरीसफ़ ने बताया — आजकल हम उन टी-50 विमानों को परीक्षण के तौर पर उड़ा रहे हैं, जो हमने सीमित संख्या में ख़रीद रखे हैं। इन विमानों को उड़ाकर वायुसेना के पायलट इन विमानों की कमियाँ निकाल रहे हैं ताकि जब वायुसेना के लिए विमान ख़रीदे जाएँ तो उनमें इन कमियों को भी दुरुस्त करा लिया जाए।

टी-50 विमान के डिजाइनर भी उसमें सुधार कर रहे हैं

रूस-भारत संवाद से बात करते हुए ’सूचना तकनीक विश्वविद्यालय’ की ’यान्त्रिक और ऊर्जा प्रणाली अन्तरराष्ट्रीय प्रयोगशाला’ के प्रमुख पाविल बुलात ने कहा — इस नवीनतम रूसी विमान में अभी भी कुछ कमियाँ रह गई हैं। रूसी सेना में इस विमान को शामिल करने के बाद भी टी-50 में आगे सुधार जारी रखे जाएँगे ताकि उसे वास्तव में पूरी तरह से पाँचवी पीढ़ी का विमान बनाया जा सके।

 / Vitaly Kuzmin (CC BY-SA) / Vitaly Kuzmin (CC BY-SA)

उन्होंने कहा — पाँचवी पीढ़ी के विमान के लिए ’टाइप-30’ इंजन भी अभी तक नहीं बना है, इसलिए टी-50 विमान में फ़िलहाल एसयू-27 और एसयू-30 में लगने वाला इंजन ही लगाया जा रहा है।  

’टाइप-30’ नामक जो इंजन विशेष रूप से टी-50 विमान के लिए बनाया जा रहा है वह काफ़ी ताक़तवर होगा और विमान को आवाज़ की गति से भी तेज़ गति से उड़ने की संभावना देगा। विमान इतनी तेज़ गति से अपनी पूरी उड़ान भर सकेगा।

पाविल बुलात ने कहा — मेरा ख़याल है कि नया इंजन लगने के बाद विमान आवाज़ की गति से 60 प्रतिशत ज़्यादा गति से उड़ान भर सकेगा। अपने उड़न-क्षेत्र के आधार पर वह क़रीब 2000 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ़्तार से उड़ान भरेगा। इस विमान का निर्माण करते हुए मिश्रित सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए वह आलोपन तकनीक से भी लैस होगा और राडारों की सहायता से भी उसे ढूँढ़ना बहुत मुश्किल होगा।

हमारा ख़याल है कि एक-डेढ़ साल बाद नया विमान विशेष ’टाइप-30’ इंजन के साथ उड़ान भरने लगेगा। सन् 2020 तक यह नया इंजन बनकर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।  

तकनीक विश्लेषक पाविल बुलात ने कहा — इंजन के अलावा पाँचवी पीढ़ी के इस विमान की दो अन्य चीज़ों की तरफ़ भी ध्यान देना ज़रूरी है। एक है — विमान में लगी राडार प्रणाली और दूसरी — इस विमान की एयरफ़्रेम अवधारणा, जो आज दुनिया में उड़ने वाले सभी तरह के विमानों में आधुनिकतम है। 

+
फ़ेसबुक पर पसंद करें