अमरीकी प्रतिबन्धों का रूसी-भारतीय सैन्य-सहयोग पर असर नहीं होगा

एक वरिष्ठ रूसी विशेषज्ञ का कहना है कि भारत इन प्रतिबन्धों से बचने का रास्ता निकाल सकता है।
Indra
रूस और भारत के बीच सहयोग आत्मनिर्भर ढंग से सभी दिशाओं में होता रहेगा। स्रोत :mil.ru

रूसी हथियार उत्पादकों के ख़िलाफ़ अमरीका द्वारा घोषित किए गए प्रतिबन्ध रूस और भारत के बीच हुए शस्त्र-अनुबन्धों को प्रभावित नहीं करेंगे। रूस के रणनीतिक तक्नोलौजी विश्लेषण केन्द्र के निदेशक रूस्लान पूख़फ़ ने तास समाचार समिति से बात करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में आख़िरी फ़ैसला भारत के सर्वोच्च नेताओं को करना है।  

विगत 2 मार्च को भारतीय समाचार पत्र इकोनोमिक टाइम्स ने यह ख़बर दी थी कि 11356 सीरीज के युद्धपोत ख़रीदने और वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-400 ख़रीदने के लिए भारत ने रूस से जो अनुबन्ध किए हैं, वे अमरीकी प्रतिबन्धों का शिकार हो सकते हैं। इकोनोमिक टाइम्स ने लिखा था कि भारत को सैन्य सप्लाई करने वाली विदेशी कम्पनियों को हथियारों की सप्लाई करने के लिए किसी भारतीय बैंक की गारण्टी भी देनी पड़ती है। 

लेकिन अमरीका ने रूस के एकजुट जलपोत निर्माण निगम और उसकी सहायक कम्पनियों तथा अलमाज़ अन्तेय कम्पनी पर प्रतिबन्ध लगा रखे हैं, इसलिए भारतीय बैंक इन कम्पनियों को अपनी गारण्टी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं करा पाएँगे। 

पूख़फ़ ने कहा — भारत को डर है कि अमरीका उन भारतीय बैंकों पर भी प्रतिबन्ध लगा देगा, जो रूसी शस्त्र उत्पादक कम्पनियों के साथ काम करेंगे। लेकिन यदि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति मज़बूत होगी तो भारत सरकार इन अनुबन्धों को पूरा करने के लिए कोई दूसरी प्रक्रिया भी अपना सकती है। 

रूस में भारत के राजदूत पंकज सरन ने विगत 7 मार्च को समाचार समिति रिया नोवस्ती से बात करते हुए कहा था कि भारत रूस के साथ किए गए अनुबन्धों पर काम आगे जारी रखेगा और इन अनुबन्धों की पूर्ति के काम में अमरीकी प्रतिबन्धों की वजह से कोई बाधा नहीं पड़ेगी। 

पंकज सरन ने कहा — भारत एकतरफ़ा प्रतिबन्धों को नहीं मानता है। रूस और भारत के बीच सहयोग आत्मनिर्भर ढंग से सभी दिशाओं में होता रहेगा। 

रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन और भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के बीच अक्तूबर - 2016 में हुई 17 वीं शिखर मुलाक़ात के दौरान दो देशों ने एस-400 वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली की ख़रीद-फ़रोख्त के बारे में एक अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए थे।

गोआ में हुई इस शिखर मुलाक़ात में रूस भारत को 11356 सीरीज के चार युद्धपोत भी बेचने पर सहमत हो गया था, जिनमें से दो युद्धपोतों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

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