क्या रूस तुर्की को एस-400 हवाई मिसाइल सुरक्षा प्रणाली दे पाएगा?

रूसी हवाई सुरक्षा मिसाइल प्रणाली तुर्की की नज़र में खुब गई है और वह उसपर निगाहें गड़ाए हुए है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि दो देशों के बीच यह सबसे बड़ा सैन्य अनुबन्ध होगा।
 S-400 air defense missile system
हवाई सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-400। स्रोत :AP

विगत 10 मार्च को रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रजेप एरदोगान के बीच क्रेमलिन में हुई मुलाक़ात में इस सवाल पर भी चर्चा की गई कि तुर्की रूस से हवाई प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-400 ख़रीदना चाहता है। मीडिया को इसकी ख़बर एक हफ़्ते बाद लगी। लेकिन रूस के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पिस्कोफ़ ने मीडिया से बात करते हुए इस बात की पुष्टि कर दी कि तुर्की ने सचमुच रूस से एस-400 ख़रीदने की इच्छा व्यक्त की है। रूस के रक्षामन्त्री सिर्गेय शायगू ने भी बताया कि दोनों पक्षों के बीच इस सवाल पर चर्चा हुई थी।

रूसी मीडिया में इस तरह की सूचनाएँ देखने को मिल रही हैं कि तुर्की जल्दी से जल्दी एस-400 पाना चाहता है और वह रूस पर एस-400 की सप्लाई करने के लिए ज़ोर दे रहा है।

तुर्की अब यह जानकारी माँग रहा है कि एस-400 प्रणाली में कौन-कौन से उपकरण शामिल हैं, तुर्की के लिए उसकी क़ीमत क्या होगी तथा रूस कब तक तुर्की को एस-400 की सप्लाई कर सकता है। अगर दोनों देशों के बीच तुर्की को एस-400 की सप्लाई करने के सवाल पर सहमति हो जाती है, तो सम्बन्धित विभाग इस बारे में अनुबन्ध करने और आर्डर लेने का काम शुरू कर देंगे।

क्या नाटो इस सप्लाई में बाधक होगा

’जन्मभूमि के शस्त्रागार’ नामक रूसी पत्रिका के प्रमुख सम्पादक और पूर्व कर्नल वीक्तर मुरख़ोवस्की का मानना है — तुर्की नाटो सन्धि संगठन का सदस्य है, इसलिए यूरोप और अमरीका यह कोशिश करेंगे कि रूस और तुर्की के बीच यह सौदा न हो पाए।

उन्होंने कहा — अब सभी देश अपने-अपनी-अपनी बात कहेंगे। कहा जाएगा कि एस-400 नाटो के सुरक्षा मानकों के अनुकूल नहीं है। उसे नाटो की हवाई सुरक्षा व्यवस्था में शामिल नहीं किया जा सकता है। जब यूनान को एस-300 हवाई प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली की सप्लाई करने का सवाल उठा था, तब भी इसी तरह की बातें सुनने को मिली थीं। यूनान भी नाटो का सदस्य है। लेकिन तब यूरोपीय देश यूनान को बहका नहीं पाए थे और यूनान ने 12 एस-300 प्रणालियाँ रूस से ख़रीद ली थीं।

वीक्तर मुरख़ोव्स्की ने कहा — अमरीका इस बात पर ज़ोर देगा कि तुर्की को एस-400 की जगह अमरीकी हवाई सुरक्षा प्रणाली पैट्रियट ख़रीद लेनी चाहिए, जो लगभग रूसी प्रणाली की तरह ही है।

— लेकिन पैट्रियट प्रणाली एस-400 से बहुत ज़्यादा महंगी है और उतनी अच्छी भी नहीं है। — वीक्तर मुरख़ोव्स्की ने कहा — पैट्रियट में कई कमियाँ हैं। उसे प्रहार के लिए तैयार करने में ज़्यादा समय लगता है। हमलावर बैलिस्टिक मिसाइलों को वह रास्ते में सुनिश्चित रूप से नहीं पकड़ पाती है। लेकिन चूँकि तुर्की और अमरीका दोनों ही नाटो के सदस्य हैं, इसलिए तुर्की पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाए जाएँगे तथा अमरीकी संसद उसे आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने की धमकियाँ देगी।

वीक्तर मुरख़ोव्स्की ने आगे कहा — आम तौर पर एस-400 की एक डिवीजन में आठ मिसाइल प्रक्षेपण लांचर तथा एक राडार होता है। अतिरिक्त मिसाइल के साथ एक एस-400 प्रणाली की क़ीमत क़रीब 50 करोड़ डॉलर होती है। सवाल यही है कि रूस एस-400 की कितनी डिवीजनें ख़रीदना चाहेगा। चूँकि आजकल रूसी रक्षा उद्योग का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, इसलिए यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा और अनुबन्ध हो गया तो रूस सिर्फ़ तीन साल बाद ही एस-400 की सप्लाई शुरू कर सकेगा।

तुर्की की सौदेबाज़ी

तास समाचार समिति के सैन्य विश्लेषक वीक्तर लितोफ़किन ने कहा — लेकिन सभी सैन्य-विश्लेषकों को यह उम्मीद नहीं है कि तुर्की रूस से एस-400 प्रणाली ख़रीद ही लेगा। एस-400 पर तुर्की की नज़र गड़ने और तुर्की द्वारा उसमें दिलचस्पी दिखाने का मतलब यह नहीं है कि तुर्की रूस से उसकी सप्लाई करने का अनुबन्ध भी कर लेगा।

उन्होंने कहा — तुर्की की यह बातचीत हवा में घोड़े दौड़ाने की तरह है। कभी तुर्की ने हमसे एस-300 ख़रीदने के लिए भी बातचीत की थी। लेकिन बाद में पता लगा कि हमसे सौदेबाज़ी करके तुर्की दरअसल चीन से उसकी हवाई मिसाइल सुरक्षा प्रणाली एसक्यू-9 की क़ीमत कम कराना चाहता था।

उन्होंने बताया कि इसी तरह से तुर्की ने अपनी वायुसेना के लिए रूसी केए-52 हैलिकॉप्टर की ख़रीद की बात भी चलाई थी। रूस ने तुर्की की ज़रूरतों के हिसाब से अपने हैलिकॉप्टर में सभी आवश्यक बदलाव भी कर लिए थे, लेकिन बाद में तुर्की ने अमरीकी ’बैल’ हैलिकॉप्टर ख़रीद लिए। वीक्तर लितोफ़किन ने कहा —  परन्तु अगर तुर्की हमसे एस-400 ख़रीदने का अनुबन्ध कर लेता है, तो दो देशों के बीच यह सबसे बड़ा सैन्य अनुबन्ध होगा।

एस-400 आधुनिकतम रूसी हवाई प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल शत्रु के लड़ाकू विमानों के साथ-साथ, शत्रु के बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। यह प्रणाली 30 किलोमीटर की ऊँचाई तक और 250 किलोमीटर दूर तक हमलावर मिसाइलों और विमानों को नष्ट करने में सक्षम है।

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