क्या रूस के पास अमरीका से भी बड़ा बम है?

अमरीका ने पहली बार अपने सबसे शक्तिशाली ग़ैरपरमाणु बम का इस्तेमाल अफ़ग़ानिस्तान में किया। इस बम को अमरीकी लोग 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स’ यानी ’सब बमों की माँ’ कहकर पुकारते हैं। लेकिन रूस के पास ऐसा बम है, जिसे सब ’बमों का बाप’ यानी ’फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जा सकता है।
Mother of All Bombs
जीबीयू-43 बम। स्रोत :ZUMA Press/Global Look Press

13 अप्रैल को रूस में प्रतिबन्धित आतंकवादी गिरोह ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के अफ़ग़ानिस्तान में बने एक अड्डे पर अमरीका ने अपना महाकाय जीबीयू-43 बम गिराया। 11 टन टीएनटी की विनाशकारी ताक़त रखने वाले इस भयानक बम को अमरीका में 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स’ यानी ’सब बमों की माँ’ कहकर पुकारा जाता है। 2003 में बनाए गए इस बम का इस्तेमाल अमरीका ने पहली बार अफ़ग़ानिस्तान में ही किया है।

रूस में इससे भी ज़्यादा भयानक बम इसके 4 साल बाद सामने आया था। रूसी बम अमरीकी बम से 4 गुना ज़्यादा भयानक और विनाशकारी है। उसी साल 11 सितम्बर को अमरीका पर आतंकवादी हमले की छठी वरसी पर इस नए बम का परीक्षण करके देखा गया था। रूसी सैन्य-अधिकारियों का कहना था कि रूस ने यह नया बम आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए बनाया है। 

इन महाबमों के फ़ायदे क्या हैं 

आतंकवादी गिरोह ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के अफ़ग़ानिस्तान में बने एक अड्डे पर अमरीका द्वारा गिराए गए इस महाबम के कारण कम से कम 36 आतंकवादी हलाक हुए। इसके अलावा उनके हथियारों के भण्डार, सैन्य तकनीक और ऐसी कई भूमिगत सुरंगें भी नष्ट कर दी गईं, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी अमरीकी सैनिकों से बचकर अपने आवागमन के लिए करते थे। डोनाल्ड ट्रम्प ने अमरीकी सेना की इस कार्रवाई को बेहद सफल बताया है।

जीबीयू-43 नामक इस अमरीकी बम की तरह के ही रूसी बम का नाम है — ’ओडीएबी’ यानी विशालकाय विस्फोटक विमानन बम। यह बम इतना भयानक है कि गैर परमाणु बम होते हुए भी इसकी विनाश की ताक़त एटम बम के बराबर ही है। बस, यह बम एटम बम की तरह रेडियमधर्मी बादल नहीं उड़ाता, लेकिन इसका धमाका बड़ा भयानक होता है। 

सैन्य विज्ञान अकादमी के प्रोफ़ेसर वदीम कज़्यूलिन ने रूस-भारत संवाद को बताया — पिछले 50 सालों में विभिन्न लड़ाइयों में रूसी ’ओडीएबी’ की तरह के कई छोटे बमों का इस्तेमाल किया जा चुका है। जैसे अमरीकी सेना ने वियतनाम में जंगलों को साफ़ करने के लिए इसी तरह के बमों का इस्तेमाल किया था। जंगलों को जलाने के बाद अमरीकी सेना वहाँ अपने हैलिकॉप्टर उतारा करती थी। और हमने अफ़ग़ानिस्तान के तोरा-बोरा के इलाके में उन गुफ़ाओं को नष्ट करने के लिए इस तरह के बमों का इस्तेमाल किया था, जहाँ छिपकर हमारे दुश्मन हम पर हमले किया करते थे। 

उन्होंने  बताया — सोवियत संघ और रूस के पास भयानक महाकाय बमों में ओडीएबी-1500 और महाविस्फोटक एफ़एबी-9000 नामक विमान से गिराए जा सकने वाले बम ही सबसे भयानक माने जाते हैं। 

रूसी बमों के डिजाइन की ख़ासियतें

’बमों के बाप’ नामक रूसी बम में उसके ऊपरी हिस्से में ऐसा उपकरण लगा हुआ है, जो बम के धमाके के वक़्त बम में भरे विस्फोटक-पदार्थों को खील-खील कर बिखरा देता है। विस्फोटकों को ’खील-खील’ करने की यह प्रक्रिया बम में लगी ’टाइम मशीन’ में तय समय के अनुसार होती है। 

’इज़्वेस्तिया’ समाचारपत्र के सैन्य-विश्लेषक अलिक्सेय राम्म ने रूस-भारत संवाद से बात करते हुए बताया — बम में भरा विस्फोटक मिश्रण पहले गैस के रूप में बदल जाता है और उसके बाद उसमें धमाका होता है। इस धमाके से विस्फोटस्थल पर वातावरण में एक वायुहीन निर्वात (वैक्यूम) पैदा होता है। इस निर्वात की वजह से ही दबाव बनता है और उस दबाव के क्षेत्र में आने वाली सभी चीज़ें भीतर से फट जाती हैं — चाहे वे मानव-शरीर हों, तकनीक हो या दुश्मन के कैसे भी सुरक्षा उपकरण हों।

अमरीकी पत्रिका ’नेशनल इन्टेरेस्ट’ के अनुसार, रूसी बम अमरीकी बम से आकार में छोटा है, लेकिन वह अमरीकी ’बमों की माँ’ से चार गुना ज़्यादा विनाशकारी है। रूसी ’बमों का बाप’ 40 टन टीएनटी के बराबर विस्फोटक है, जबकि अमरीकी ’बमों की माँ’ सिर्फ़ 10 टन टीएनटी के बराबर ही भयानक है। लेकिन रूसी बम की ख़ासियत यह भी है कि वह अमरीकी जीबीयू-43 के मुक़ाबले 20 गुना ज़्यादा बड़े इलाके को अपनी चपेट में लेता है। लेकिन सवाल तो यह है कि रूसी ’बमों के बाप’ का कभी इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं क्योंकि 2007 में किए गए उसके परीक्षण के बाद उसके इस्तेमाल या नए परीक्षणों के बारे में कभी कोई जानकारी नहीं मिली है। 

अलिक्सेय राम्म ने बताया कि सँयुक्त राष्ट्र ने इस विशालकाय विस्फोटक विमानन बम को अमानवीय बम बताया है, जो लोगों को भारी पीड़ा, कष्ट और तकलीफ़ें देता है।

उन्होंने कहा — लेकिन इसके बावजूद इस बम के इस्तेमाल पर सँयुक्त राष्ट्र ने कोई रोक नहीं लगाई है और हथियारों की कटौती की किसी भी सन्धि में इसका कोई ज़िक्र नहीं आया है। रूस का मानना है कि रूसी सेना के पास उपस्थित कई तरह के सामरिक एटम बम इस बम की जगह ले सकते हैं। अमरीका भी अपने छोटे एटम बमों के बारे में यही समझता है।

अलिक्सेय राम्म ने कहा — इसी वजह से अमरीकी संसद ने यह फ़ैसला किया है कि इस तरह के बमों का तेज़ी से निर्माण किया जाए। अमरीकी सैन्य अधिकारी इस बात से भी इनकार नहीं करते हैं कि वे इन बमों का इस्तेमाल ईरान और उत्तरी कोरिया के परमाणु ठिकानों पर हमले करने के लिए करना चाहते हैं। 

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