Magic Moscow Deers In the winter, you can take a ride in an old-fashioned Russian carriage. People are usually afraid of the Russian winter. It is believed that temperatures are so low that you have to warm yourself with vodka and bearskins. Russian season Monasteries Altai petroglyphs The Bureya Dam is the largest in Russia’s Far East and one of the 10 most powerful dams in all of Russia. The Bureya Dam is owned by RusHydro. Snow buries Nilmoguba’s wooden houses in the winter, and sedge and tall weeds grow in the summer.
दस तस्वीरें, जो आपको मस्क्वा की यात्रा करने के लिए उकसाएँगी प्राचीन रूस की आत्मा को महसूस करने के लिए सूज़दल जाएँ

रूसी बारहसिंगा पालकों का जीवन

यमाल के बारहमासी अन्तहीन जाड़े में बारहसिंगा पालक कैसे अपने बारहसिंगों को लेकर एक चरागाह से दूसरे चरागाह में घूमते रहते हैं।
  क्सेनिया इसाइवा, रूस-भारत संवाद
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Kirill Yutnov

फोटोग्राफर किरील उयूतनफ़ का जन्म मस्कवा (मास्को) में हुआ था और मस्क्वा में ही वे पले-बढ़े। किन्तु उन्होंने जल्दी ही यह महसूस किया कि महानगर की ज़िन्दगी उनके लिए नहीं है।
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किरील उयूतनफ़ ने 11 साल की उम्र में ही जीवाश्म-विज्ञान की पढ़ाई शुरू कर दी थी। बस, तभी से वे रूस के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की जानेवाली खोजयात्राओं में भी जाने लगे। अपनी इन खोजयात्राओं के दौरान ही उनका झुकाव फ़ोटोग्राफ़ी की ओर हुआ और वे अपनी यात्राओं की फ़ोटो-रपटें बनाने लगे।
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यमाल प्रायद्वीप मस्कवा शहर से 3 हजार 6 सौ किलोमीटर दूर स्थित है। यमाल-निनेत्स प्रदेश रूस के उन गिने-चुने इलाकों में से एक है, जहाँ से उत्‍तरध्रुवीय रेखा गुज़रती है।
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यमाल-निनेत्स प्रदेश में सलेख़ार्द, नोवि उरिनगोय, नदीम और नयाबर्स्क जैसे बड़े-बड़े शहर स्थित हैं।
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यमाल प्रायद्वीप में स्थित यमाल-निनेत्स्की प्रदेश रूस के सबसे बड़े नृजातीय पर्यटन स्थलों में से एक है। यमाल-निनेत्स्की प्रदेश के दक्षिण में स्थित हान्ति-मन्सीस्क जिला (जिसे युगरा भी कहा जाता है) ही ऐसा अकेला अंचल है, जो इस मामले में उसका मुक़ाबला कर सकता है। पिछली सदी के नौवें दशक के मध्य में रूस में सबसे पहले जो नृजातीय संरक्षित क्षेत्र बनाए गए थे, यहाँ पर स्थित तोरुम मा नृजातीय संरक्षित क्षेत्र भी उन्हीं में से एक है।
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आजकल यहाँ पर बारहसिंगों के दो प्रकार के बाड़े दिखाई देते हैं। पहली श्रेणी में तथाकथित पारिवारिक बाड़े आते हैं, जिन्हें संचालित करने वाले लोग अनेक पीढ़ियों से बारहसिंगा पालन के काम में लगे हुए हैं। उनके बाड़े में पलने वाले बारहसिंगे उनकी निजी सम्पत्ति होते हैं, मतलब बारहसिंगा पालन ही उनकी जीविका का एकमात्र स्रोत है।
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दूसरी श्रेणी के बारहसिंगा बाड़ों में नौकरी पर रखे गए वेतनभोगी कामगार ही सारा कामकाज देखते हैं। वे चरागाह की रखवाली करते हैं, बारहसिंगों पर नजर रखते हैं और बीमार बारहसिंगों का उपचार व देखभाल करते हैं। हालाँकि पहली श्रेणी के बाड़ों में चरवाहों और बारहसिंगों के बीच जैसा आत्मीय सम्बन्ध होता है, इन बाड़ों पर काम करने वाले कामगारों और बारहसिंगों के बीच वह बात देखने को नहीं मिलती।
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बारहसिंगों को चराना ही यहाँ के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है। बारहसिंगा के चमड़े का उपयोग तम्बू बनाने और कपड़े सिलने के लिए किया जाता है। बारहसिंगों के गोश्त को ये लोग या तो ख़ुद खाते हैं या बाज़ार में बेच देते हैं।
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बारहसिंगों को पालने में काफ़ी ख़र्च होता है। हर महीने जई, सब्ज़ियों और पुआल समेत बारहसिंगों के चारे पर ही कम से कम 54 हजार रुपए (लगभग आठ सौ अमरीकी डालर) का खर्च आता है; बिजली-पानी जैसी सुविधाओं पर साढ़े 21 हजार रुपये (सढ़े तीन सौ अमरीकी डालर) से लेकर साढ़े 32 हजार रुपये (पाँच सौ अमरीकी डालर) तक का खर्च आता है और 1 लाख 8 हजार रुपये की रकम बाड़े पर काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में चली जाती है।
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यमाल में 41 हजार मूल निवासी या आदिवासी रहते हैं, जिनमें से 15 हजार घुमन्तू हैं। ये लोग अपनी लगभग पूरी ज़िन्दगी बारहसिंगों को एक से दूसरे चरागाह तक चराते हुए ही बिता देते हैं। ये जहाँ कहीं भी जाते हैं, वहाँ अपने तम्बुओं तथा अन्य सामानों को भी स्लेज गाड़ियों पर लादकर ले जाते हैं।
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बारहसिंगे जिधर जाते हैं, उनके चरवाहे भी उनके पीछे पीछे जाते हैं और बारहसिंगे वहीं जाते हैं, जहाँ उनका मुख्य भोजन लाइकेन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।
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रूसी सांख्यिकी एजेन्सी के अनुसार रूस में 48 आदिवासी जनजातियों के लोग रहते हैं। ये लोग ज़्यादातर सुदूर उत्तर, साइबेरिया, सुदूर पूर्व और कोहकाफ क्षेत्र में रहते हैं। रूस में सभी आदिवासियों की कुल आबादी 5 लाख यानी रूस की पूरी आबादी के 0.3 प्रतिशत से भी कम है।

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