रूस के साथ नौसैनिक सैन्याभ्यास करके हमारी मैत्री मज़बूत होगी : भारत

14 दिसंबर 2016 रिया नोवोस्ती
भारत और रूस की नौसेनाएँ आज से सँयुक्त सैन्याभ्यास कर रही हैं। भारत का कहना है कि इस अभ्यास से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग के एक नए युग का सूत्रपात होगा।
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2015 will certainly be busier than 2014 in India-Russia relations. Source: Shutterstock स्रोत : Shutterstock

भारत के रक्षा मन्त्रालय ने ऐलान किया है कि रूस और भारत के सँयुक्त नौसैनिक सैन्याभ्यास ’इन्द्र नेवी - 2016’ से दो देशों के बीच आपसी दोस्ती और ज़्यादा मज़बूत होगी। दो देशों के बीच सहयोग से समुद्री सुरक्षा के विकास में भी योग मिलेगा।

भारत के रक्षा मन्त्रालय द्वारा जारी किए गए प्रेस वक्तव्य में कहा गया है — सँयुक्त नौसैनिक सैन्याभ्यास ’इन्द्र नेवी - 2016’ से हमारे बीच आपसी विश्वास और आपसी सहयोग बढ़ेगा। यह सैन्याभ्यास हमारे दो देशों की नौसेनाओं को अपने-अपने अनुभव का पारस्परिक रूप से आदान-प्रदान करने की सम्भावना देगा। इसके अलावा इस अभ्यास से दो देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग के एक नए युग की शुरूआत होगी। इससे समय की कसौटी पर खरी उतरी हमारी दोस्ती और गहरी होगी।

भारत के रक्षा मन्त्रालय ने बताया है कि इस सैन्याभ्यास में भारत की तरफ़ से मिसाइल युद्धपोत रणवीर, युद्धपोत सतपुड़ा, छोटा पोतनाशक युद्धपोत कमोरता, एक पनडुब्बी, गश्ती पोतनाशक विमान पी-81, डोर्नियर विमान, लड़ाकू विमान हॉक और हैलिकॉप्टर भाग ले रहे हैं। रूस की तरफ़ से इस सैन्याभ्यास में विशाल पोतनाशक युद्धपोत ’एडमिरल त्रिबूत्स’ और बड़ा समुद्री टैंकर ’बरीस बूतोमा’ भाग ले रहे हैं।

सँयुक्त नौसैनिक सैन्याभ्यास ’इन्द्र नेवी - 2016’ 14 से 21 दिसम्बर तक चलेगा। यह सैन्याभ्यास दो दौरों में सम्पन्न होगा। पहला तटवर्ती दौर 14 से 18 दिसम्बर को विशाखापत्तनम में होगा, जिसके दौरान आपसी सहयोग से जुड़ी बैठकें करने, सामरिक त्वरित बैठकें करने, आधिकारिक मुलाक़ातें करने से जुड़े अभ्यास किए जाएँगे और सँयुक्त खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद 19 से 21 दिसम्बर तक बंगाल की खाड़ी में सक्रिय रूप से नौसैनिक अभ्यास किया जाएगा, जिसमें हवाई हमला होने की स्थिति में एक-दूसरे की मदद करने, रात में युद्धपोतों द्वारा पैंतरे बदलने, तोपख़ाने द्वारा समुद्री और हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने तथा युद्ध के दौरान रसद पहुँचाने का अभ्यास किया जाएगा। इसके अलावा युद्धपोतों पर तैनात हैलिकॉप्टर भी कुछ कामों का अभ्यास करेंगे।

इन नौसैनिक अभ्यासों का संचालन भारतीय नौसेना के अधिकारी करेंगे।

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