पूतिन को ’माचो’ की मरदानी छवि से लगाव क्यों है?

10 फ़रवरी 2017 अलेग येगोरफ़
वोद्का क्या है? पूतिन ही..... क्यों हैं? इण्टरनेट के सर्च इंजनों पर रूस को लेकर जो सवाल अक्सर पूछे जाते हैं, उनमें से कुछ सवालों के जवाब इन दिनों हम आपको दे रहे हैं। आइए, आज राष्ट्रपति पूतिन और उनकी सार्वजनिक छवि की चर्चा करते हैं।
Why Russian president uses macho public image
रूस के राष्ट्रपति के उनके कार्यकाल में सारी दुनिया ने पूतिन को कई तरह की निठुर छवियों में भी देखा है। कभी वे जूडो कुश्ती लड़ते दिखाई देते हैं, तो कभी कोई लड़ाकू विमान उड़ाते हुए। स्रोत :Varvara Grankova

व्लदीमिर पूतिन तब तक रूस के राष्ट्रपति नहीं बने थे। लेकिन तभी उन्होंने एक वाक्य ऐसा कहा था, जो आज भी बार-बार याद किया जाता है। 1999 में पूतिन तब रूस के प्रधानमन्त्री थे, तभी उन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के बारे में एक बड़ी सख़्त बात कही थी। उन्होंने जनता से वायदा किया था कि यदि ज़रूरत पड़ी तो रूस के कमाण्डो ’आतंकवादियों को टॉयलेट में बहा देंगे।’ उन्होंने पहली बार इतने कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया था। लेकिन उसके बाद अक्सर वे इस तरह की कठोर बातें कहते रहे हैं।

कड़ियल नेता 

पूतिन बहुत-सी समस्याओं के बारे में बड़ी दृढ़ता से अपनी बात कहते हैं। अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर भी वे ऐसा ही करते हैं। 2015 में सँयुक्त राष्ट्र की महासभा में पश्चिमी नेताओं को सम्बोधित करते हुए पश्चिमी एशिया के ’लोकतान्त्रिकरण’ की उनकी नीति पर दृढ़तापूर्वक अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा था — क्या आप अब यह समझ पा रहे हैं कि आपने कैसा विनाश किया है। पूतिन का मतलब यह था कि उनकी नीतियों की वजह से ही ’आईएस’ सामने आया। और 17 जनवरी 2017 को ऐसी अफ़वाहों पर टिप्पणी करते हुए, कि रूस के पास एक ऐसा गुप्त विडियो है, जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प मास्को की वेश्याओं के साथ ऐश कर रहे हैं, रूस के राष्ट्रपति ने कहा था कि इस तरह की अफ़वाहें उड़ाने वाले लोग ’ख़ुद किसी वेश्या से कम नहीं है’।

पूतिन सिर्फ़ निर्मम बातें ही नहीं कहते। रूस के राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री और फिर से राष्ट्रपति के उनके कार्यकाल में सारी दुनिया ने पूतिन को कई तरह की निठुर छवियों में भी देखा है। कभी वे जूडो कुश्ती लड़ते दिखाई देते हैं, तो कभी कोई लड़ाकू विमान उड़ाते हुए। कभी वे बन्दूक और पिस्तौलों से निशाना साधते दिखाई देते हैं, तो कभी मोटरसाइकिल दौड़ाते और कार रेस में कार भगाते नज़र आते हैं।  

इसके अलावा पूतिन बेहोशी का इंजेक्शन लगने के बाद बेहोश होते बाघ के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और कमर तक नंगे होकर घोड़ा दौड़ाते नज़र आते हैं। कभी पूतिन ग्लाइडर में बैठकर कुरजाँ सारसों को रास्ता दिखाते हैं तो कभी काले सागर की तली में उतर जाते हैं और वहाँ उन्हें दो प्राचीन विशाल गुलदस्ते मिल जाते हैं। (बाद में राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पिस्कोफ़ ने यह स्वीकार किया था कि पूतिन के समुद्र की तली में उतरने से पहले वे गुलदस्ते विशेष रूप से समुद्र में उतारे गए थे)। किसी भी दूसरे देश का कोई नेता शायद ही इस तरह का कठोर और निष्ठुर जीवन जीता होगा।

इसकी जड़े बचपन में हैं 

लेनिनग्राद में पूतिन का बचपन बीता था। उनके पड़ोसी रहे सिर्गेय बग्दानफ़ ने ’मस्कोवस्की कमसमोलित्स’ अख़बार को पूतिन के बचपन की याद करते हुए बताया था — अपने बचपन में भी पूतिन काफ़ी चंचल और शैतान थे। वे बेहद नटखट और हुड़दंगी थे। पूतिन भी इस बात को मानते हैं कि उनके बचपन के दिनों का उनके व्यक्तित्व पर काफ़ी असर पड़ा है, जब बार-बार लड़ना-भिड़ना पड़ता था और निर्ममता दिखानी पड़ती थी। 2015 में पूतिन ने बताया था — 50 साल पहले लेनिनग्राद की गलियों में ही मैंने यह सीखा था कि अगर लड़ना ही ज़रूरी है तो पहला वार ख़ुद करना चाहिए। 

मास्को के अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध संस्थान के प्रोफ़ेसर और राजनीतिक विश्लेषक वलेरी सलावेय का मानना है कि उन्हें ’माचो’ की मरदानी छवि से लगाव है। रूस-भारत संवाद से बात करते हुए उन्होंने कहा — लेनिनग्राद की गलियों में मवालियों के बीच ही लड़ते-भिड़ते वो बड़े हुए हैं। मवालियों में ’मर्दानगी’ दिखाने की ज़िद होती है। साहस के साथ, जाँबाज़ी के साथ काम करने वाले को ही मवालियों में बहादुर माना जाता है। 

सलावेय याद दिलाते हैं कि इसके बाद 16 साल तक (1975-1991) पूतिन ने केजीबी की नौकरी की। ख़ुफ़िया संगठनों में भी, सेना की तरह ही मर्दानगी का और मर्दानगी दिखाने का ऊँचा मूल्यांकन किया जाता है। पूतिन पर इसका भी बड़ा असर पड़ा है।

माचो (जाँबाज़) को सब पसन्द करते हैं

पूतिन रूस में बेहद लोकप्रिय हैं, इसमें सन्देह की कोई गुंजाइश नहीं है। रूसी जन-सर्वेक्षण केन्द्र के अनुसार दिसम्बर 2016 में रूस की 86 प्रतिशत जनता ने उनके कामों से अपनी सहमति व्यक्त की थी। वलेरी सलावेय को विश्वास है कि राष्ट्रपति की कड़ियल छवि भी जनता के बीच उनकी सफलता का एक कारण है और पूतिन इस बात को ख़ूब अच्छी तरह से समझते हैं। 
’पूतिन ने एक ताक़तवर नेता के रूप में दिखाई देते हैं — सलावेय ने कहा — और मौक़ा मिलने पर वे अपनी कार्रवाइयों और गतिविधियों से अपनी शारीरिक ताक़त और अपनी साहसिक छवि का प्रदर्शन करने से भी नहीं चूकते।  

सलावेय का मानना है कि न सिर्फ़ रूस की जनता यह चाहती है कि देश में ताक़तवर और कड़ियल नेता शासन करे, बल्कि किसी भी बड़े से बड़े लोकतन्त्र और सुरुचि सम्पन्न देश की जनता ऐसा ही चाहती है। उदाहरण के लिए, अमरीका में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत से भी यही सिद्ध होता है। रूस-भारत संवाद से बात करते हुए सलावेय ने कहा — देखा जाए तो ट्रम्प भी पूतिन की तरह ही व्यवहार कर रहे हैं। बस, उन्होंने अभी तक अपनी कमीज़ नहीं उतारी है।

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