भारत खुद अपने टी-90 टैंको के लिए गोलों का उत्पादन करेगा

रूस ने टी-90 टैंकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ’मैंगो’ गोलों का उत्पादन करने के लिए भारत को मशीनों की सप्लाई की।
Mango shells
स्रोत :Ruslan Shamukov/TASS

गोला-बारूद का उत्पादन करने वाली रूस की सबसे बड़ी कम्पनी ’तेख़माश’ के महानिदेशक सिर्गेय रुसाकोफ़ ने रूसी समाचार समिति तास को बताया कि ’तेख़माश’ ने भारत को उसके टी-90 टैंको के लिए रूस से मिले लायसेन्स के आधार पर ’मैंगो’ नामक गोलों का उत्पादन करने के लिए ज़रूरी मशीनों और यन्त्र-उपकरणों की सप्लाई कर दी है।

उन्होंने बताया कि ’तेख़माश’ ने भारतीय इंजीनियरों को भारत में ही ’मैंगो’ गोलों का उत्पादन करने के लिए प्रशिक्षित किया है।

’मैंगो’ गोले — 125 मिलीमीटर तोपों में इस्तेमाल किए जाने वाले कवचभेदी पंखदार गोले हैं। इन गोलों का उत्पादन सोवियत संघ में सन् 1983 में शुरू किया गया था। 

भारत और रूस के बीच इन ’मैंगो’ गोलों के उत्पादन का अनुबन्ध 2014 में हुआ था। अनुबन्ध के अनुसार भारत अपने यहाँ एक निश्चित संख्या में इन गोलों का उत्पादन कर सकेगा। 

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