केवल रूस में ही पाए जाने वाले 7 जीव-जन्तु

रूस के स्थानीय जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों का परिचय पाने के लिए आपको रूस के दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ेगा। लेकिन रूस के सुदूर दुर्गम इलाकों की सैर करने के बाद आप न सिर्फ़ रूस की वन-सम्पदा और झीलों के सौन्दर्य का रसास्वादन कर सकेंगे, बल्कि रूसी जीव-जन्तुओं के बारे में भी जान सकेंगे और उनकी मुलायम रेशमी खालों और फ़र का परिचय भी पा सकेंगे।

रूसी छछून्दर

 / East News / East Newsलाखों-करोड़ों साल पहले जब पृथ्वी पर मैमथ भी नहीं थे तो छछून्दर पैदा हो चुके थे। इसलिए यह याद रखिए कि जब आप छछून्दर को देखते हैं, तो लाखों-करोड़ों साल पहले पैदा होने वाले किसी जीव को देख रहे हैं। छछून्दर की नज़र बहुत कमज़ोर होती है। उसकी पूँछ और उसका रहन-सहन आस्ट्रेलियाई बत्तख-छछून्दर से मिलता जुलता है। आस्ट्रेलियाई छछून्दर को बत्तख-छछून्दर इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसका मुँह बत्तख की चोंच की तरह होता है। 

पानी में तैरने वाला यह मनोरंजक जीव रूस में दोन, वोल्गा और उराल नदी-घाटियों के इलाकों में पाया जाता है। पानी में भी छछून्दर के बाल गीले नहीं होते हैं क्योंकि छछून्दर के शरीर से निकलने वाली चिकनी कस्तूरी उन बालों को चिकना बना देती है। रूसी छछून्दर की कस्तूरी को इकट्ठा करने के लिए कई सदियों तक उसका भारी शिकार किया गया, जिससे रूसी छछून्दर के लुप्त होने का ख़तरा पैदा हो गया। आज छछून्दर एक संरक्षित जीव है और उसके शिकार पर रोक लगी हुई है।

बैकाल और लादगा झीलों में रहने वाली सील मछली

 / Shutterstock/Legion-Media / Shutterstock/Legion-Mediaमीठे पानी की बैकाल और लादगा झीलों में पाई जाने वाली सील मछली एकमात्र स्तनपाई जीव है। यह सील मछली बेहद ख़ूबसूरत होती है और उसे इन झीलों की पहचान माना जाता है। बैकाल की सील मछली और लादगा की चक्राकार सील मछली इतनी सुन्दर होती हैं कि पर्यटक उन पर मोहित हो जाता है। इन दोनों मछलियों की झील-सी गहरी आँखों में पर्यटक डूब-डूब जाते हैं। इनकी मार्मिक दृष्टि आपको बाँध लेती है। यह नज़र जैसे आपकी आत्मा में कहीं गहरे उतर जाती है। उनका जिज्ञासु स्वभाव आश्चर्यचकित करता है। बैकाल नदी के पास सील मछली के लिए विशेष एक्वारियम बने हुए हैं, जिनमें आप जल में उसके करतब देख सकते हैं।

पुतरान का बर्फ़ीला भेड़ा

 / Alamy/Legion-Media / Alamy/Legion-Mediaरूस के क्रस्नायार्स्क प्रदेश में पुतरान पठार को बेहद दुर्गम जंगली इलाका माना जाता है। इस इलाके में सिर्फ़ हवाई जहाज़ या हैलिकॉप्टर से अथवा नाव से ही पहुँचा जा सकता है। इसी इलाके में यह बर्फ़ीला भेड़ा पाया जाता है, जिसे पुतरान का बर्फ़ीला भेड़ा कहा जाता है। पुतरान पठार पर पहुँचकर भी यदि यह पहाड़ी भेड़ा आपको दिख जाए तो इसका मतलब यह है कि आपका भाग्य अच्छा था। 1700 मीटर ऊँची खड़ी चट्टानों के दुर्गम इलाके में रहने वाले इस भेड़िए के सींग भारी और चक्राकार होते हैं।

गुलाबी गंगाचिल्ली

 / Alamy/Legion-Media / Alamy/Legion-Mediaशायद आपको हमारी बात पर विश्वास नहीं हो, लेकिन यह नाज़ुक पक्षी पूर्वी साइबेरिया के और उत्तरी ध्रुव के इलाकों में ही पाया जाता है, जहाँ जलवायु बेहद कठोर होती है। यह पक्षी इन्दिगीरका, कलीमा, अनादीर जैसी बेहद ठण्डी स्थानीय नदियों के इलाके में रहता है। कभी स्थानीय एस्कीमोज जनजाति के लोग गुलाबी गंगाचिल्ली का शिकार करके खाया करते थे क्योंकि उसका गोश्त बड़ा स्वादिष्ट माना जाता है। लेकिन अब लुप्त होती जा रही इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों के शिकार पर प्रतिबन्ध लगा हुआ है। इस पक्षी के कोमल गुलाबी पंखों का रंग किनारों पर बर्फ़ की तरह एकदम सफ़ेद होता है, जैसे यह उत्तरी ध्रुव की सफ़ेदी और ध्रुवीय ज्योति की छटा में डूबा हुआ हो। सर्दियाँ बिताने के लिए गुलाबी गंगाचिल्ली दक्षिण के देशों की तरफ़ नहीं उड़ जाती बल्कि उत्तरी हिम महासागर के इलाके में चली जाती है।

अमूरी मूषक

 / Lori/Legion-Media / Lori/Legion-Mediaसमुद्री गिनीपिग या हैम्सटर की तरह के मूषक जाति के इस जानवर को अँग्रेज़ी में लेम्मिंग कहा जाता है। इसके शरीर पर रंग-बिरंगे बाल होते हैं। यह अमूरी मूषक पूर्वी साइबेरिया और कमचात्का के ताइगा में रहता है। अमूरी मूषक को देखने के लिए ताइगा की दलदली भूमि में घण्टों भटकना पड़ेगा। ताइगा में पैदा होने वाली नर्म काई में बने इनके बिल किसी भूलभुलैया की तरह होते हैं। लेम्मिंग या अमूरी मूषक एक दिन में अपने वज़न से भी ज़्यादा भोजन करते हैं, लेकिन इतना सक्रिय जीवन जीते हैं कि सारा खाना पचाकर भी ये मोटे नहीं होते।

साइबेरियाई क्रौंच या सारस 

/ Alamy/Legion-Media/ Alamy/Legion-Mediaसफ़ेद पंखों वाले और लम्बी लाल चोंच वाले सारस पक्षियों को साइबेरियाई क्रौंच कहा जाता है। इन दुर्लभ पक्षियों को यकूतिया और पश्चिमी साइबेरिया के यमाला के इलाके में देखा जा सकता है। पश्चिमी साइबेरिया के मूल निवासी और जनजातियों के बीच साइबेरियाई सारस को पवित्र माना जाता है। 

यह पक्षी बहुत सतर्क होता है और मनुष्य से दूरी बनाकर रखता है। जैसे ही कोई मनुष्य साइबेरियाई सारस के पास पहुँचना चाहता है तो वह लम्बी क्रैं-क्रैं की आवाज़ निकालता है और इस तरह दूसरे सारसों को सावधान कर देता है। इसलिए साइबेरियाई क्रौंच या सारस के अनूठे नृत्य को दूर से ही देखा जा सकता है।

साइबेरियाई क्रौंच को भी लुप्त होने वाले दुर्लभ पक्षियों की सूची में शामिल किया गया है। वर्ष 2012 में क्रौंच की सुरक्षा के लिए रूस में चलाए गए एक अभियान में व्लदीमिर पूतिन ने भी हिस्सेदारी की थी। तब रूस के राष्ट्रपति ने एक डेल्टाप्लेन में सवार होकर साइबेरियाई सारसों के एक ऐसे झुण्ड का नेतृत्व किया था, जो सर्दियाँ बिताने के लिए साइबेरिया से गर्म स्थानों की तरफ़ उड़ रहे थे।

बरगूज़िनी चितराला

 /  Lori/Legion-Media / Lori/Legion-Mediaबैकाल झील के पूर्वी तटवर्ती इलाके में फैले ताइगा के घने जंगलों में आपको कहवे के रंग का नेवला प्रजाति का एक जानवर दिखाई देगा, जिसे हिन्दी में चितराला और अँग्रेज़ी में सेबल कहा जाता है। रूसी लोग इसे बरगूज़िनी कहते हैं। बरगूज़िनी उस इलाके में बहने वाली एक नदी का नाम है, जहाँ कहवे के रंग का यह चितराला पाया जाता है। इसके अलावा बैकाल झील के इलाके में बहने वाली हवा को भी बरगूज़िनी कहा जाता है।

यह सेबल या चितराला नेवला बहुत साहसी होता है और मनुष्य से बिल्कुल नहीं डरता। पर्यटक उसे देखकर उसकी गर्दन को सहला सकते हैं और उसकी हल्की कूँ-कूँ की आवाज़ सुन सकते हैं। इसका फर बेहद ख़ूबसूरत और बहुत महंगा होता है। इसीलिए रुपहले बरगूज़िनी चितराला को जंगली फ़र का राजा या नर्म सोने का मालिक कहा जाता है।

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