2017 में भारतीय पर्यटकों के लिए रूस के 5 सुरम्य स्थान

22 जनवरी 2017 अजय कमलाकरन
2017 में रूस की यात्रा का कार्यक्रम बनाना आपके लिए एक उचित विकल्प हो सकता है। रूस के सुदूर पूर्वी अंचल, साइबेरिया, दक्षिण या पश्चिमोत्तर रूस की यात्रा पर आएँ और ऐतिहासिक इमारतों, निर्जन प्राकृतिक दृश्यों और आधुनिक शहरों की अपूर्व छटा का अद्भुत आनन्द उठाएँ।

2016 में जितने भारतीय पर्यटक रूस घूमने आए हैं, इससे पहले किसी एक साल में उनकी संख्या इतनी कभी नहीं रही। यही नहीं, रूस आने वाले विदेशी पर्यटकों की दृष्टि से भारत का नाम इस वर्ष सबसे ऊपर के दस देशों की सूची में भी शामिल रहा। हालाँकि भारत से आने वाले अधिकांश पर्यटक सिर्फ़ मस्क्वा और साँक्त पितेरबुर्ग (यानी मास्को और सेण्ट पीटर्सबर्ग) की ही यात्रा पर गए। विश्व का सबसे बड़ा देश होने और खूब विविधताओं से भरा होने के कारण रूस में भारतीय पर्यटकों के देखने के लिए बहुत कुछ उपलब्ध है। हम यहाँ पर रूस के पाँच पर्यटक स्थलों की सूची दे रहे हैं, जो भारतीय पर्यटकों को सबसे अधिक पसन्द आएँगे।

ख़बारव्सक

ख़बारव्स्क मस्क्वा से 8 हज़ार 3 सौ 25 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित है। यह शहर ’एशिया का सबसे अधिक यूरोपीय शहर’ कहलाता है।  अमूर नदी के किनारे बसे इस शहर की स्थापना 1858 में की गई थी। ख़बारव्स्क में 19वीं सदी की वास्तुकला, मनोहर संग्रहालयों और नदी के किनारे-किनारे बने सुन्दर चक्रमण पथ को बड़े मनोहारी ढंग से फिर से बनाया गया है।

रात के समय ख़बारव्सक नगर का एक दृश्य। स्रोत: Lori/Legion-Mediaरात के समय ख़बारव्सक नगर का एक दृश्य। स्रोत: Lori/Legion-Media

ख़बारव्स्क में रात्रिकालीन आनन्द-उल्लासपूर्ण गतिविधियों में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। यही नहीं, ख़बारव्स्क के नज़दीक स्थित घने जंगलों में अमूर बाघ और अमूर हिम तेन्दुए भी पाए जाते हैं।

हवाई जहाज़ द्वारा मस्क्वा से ख़बारव्स्क जाने में नौ घण्टे लगते हैं। ट्राँस साइबेरियाई रेलवे की ट्रेन से ख़बारव्स्क पहुँचने में हालाँकि सात दिन लग जाते हैं, लेकिन इस तरह से आपको रूस के विस्तृत भूभाग को देखने का अवसर भी तो मिल जाता है।

ख़बारव्स्क की यात्रा करते समय दो-चार दिन के लिए व्लदीवस्तोक शहर में भी रुक जाना बेहतर रहेगा। इस ऐतिहासिक बन्दरगाह शहर को पूर्वी एशिया की तरफ़ से रूस का प्रवेश-द्वारा माना जाने लगा है।

यरास्लाव्ल

रूस की यात्रा का भरपूर मज़ा लेने के लिए यह ज़रूरी है कि आप वोल्गा नदी और मध्य रूस के ‘सुनहरी अँगूठी’ के नाम से प्रसिद्ध शहरों में से कम से कम किसी एक शहर को देखें। यरास्लाव्ल शहर सुनहरी अँगूठी की राजधानी कहलाता है। इस शहर को एक जीवन्त सँग्रहालय मानना चाहिए क्योंकि यहाँ के गिरजों में अनेक सदियों के दौरान रूस की वास्तुकला शैलियों में आए बदलावों को देखा जा सकता है।

पैगम्बर इल्या का गिरजाघर यरास्लाव्ल का सबसे मशहूर गिरजाघर है, जिसका निर्माण सन् 1640 में किया गया था। स्रोत : Ajay Kamalakaranपैगम्बर इल्या का गिरजाघर यरास्लाव्ल का सबसे मशहूर गिरजाघर है, जिसका निर्माण सन् 1640 में किया गया था। स्रोत : Ajay Kamalakaran

1006 में स्थापित यरास्लाव्ल का केन्द्र सँयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को की विश्व विरासत स्मारकों की सूची में शामिल है। इस शहर में उत्तम वास्तुकला के एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट नमूने मौजूद हैं। गर्मी के मौसम में आप विशाल वोल्गा नदी में क्रूज की सवारी का आनन्द उठा सकते हैं, जिसके दौरान आपको रूस के ग्रामीण क्षेत्र को भी देखने का अवसर मिलेगा।

रेलगाड़ी द्वारा मस्क्वा से यरास्लाव्ल पहुँचने में सिर्फ तीन घण्टे लगते हैं। वैसे यरास्लाव्ल की सुन्दरता का भरपूर आनन्द लेने के लिए आपको यहाँ पर एक दिन से अधिक समय तक रुकना चाहिए। 

करेलिया

यदि आप भारत के शहरी जीवन की दौड़-भाग से कुछ समय के लिए सचमुच मुक्ति पाना चाहते हैं, तो फ़िनलैण्ड और रूस की सीमा पर स्थित इस अनूठे निर्जन स्थान पर घूमने के लिए आइए।  करेलिया घने जंगलों, हज़ारों झीलों, मनोहर द्वीपों और बहुत कम आबादी वाला एक अत्यधिक निर्जन प्रदेश है, जहाँ पर पहुँचने के बाद आधुनिक जीवन शैली से थके-हारे मन को अद्भुत प्राकृतिक शान्ति मिलती है।

शरद के दिनों में करेलिया प्रदेश। स्रोत : Ivan Dementievskiyशरद के दिनों में करेलिया प्रदेश। स्रोत : Ivan Dementievskiy

करेलिया रूस का एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ किझ़ी पगोस्त जैसे कुछ अद्भुत ऐतिहासिक स्थल भी हैं। किझ़ी द्वीप पर 17वीं सदी के दौरान किझ़ी पगोस्त का निर्माण किया गया था। किझ़ी द्वीप अनेगा झील में स्थित है।

किझ़ी पगोस्त। स्रोत : Shutterstock/Legion Mediaकिझ़ी पगोस्त। स्रोत : Shutterstock/Legion Media

किझ़ी पगोस्त के भीतर लकड़ी के बने दो गिरजे और 18वीं सदी में बना एक अष्टकोणीय घण्टाघर स्थित है। 1714 में बनाया गया 22 गुम्बदों वाला कायान्तरण गिरजा रूस के स्थापत्य आश्चर्यों में से एक है। कायान्तरण गिरजा 37 मीटर ऊँचा है। यही नहीं, विश्व में लकड़ी की बनी सबसे ऊँची इमारतों में भी यह शामिल है। इस गिरजे के निर्माण में कीलों का उपयोग नहीं किया गया है।

आस्त्राख़न

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जिन दिनों गुजरात के मुख्यमन्त्री थे, उसी समय उन्होंने आस्त्राख़न की यात्रा की थी। उल्लेखनीय है कि आज से अनेक सदी पहले आस्त्राख़न शहर में ही रूस की पहला भारतीय बस्ती आबाद थी। 

रूस, पश्चिमी एशिया और मध्य एशिया के बीच में स्थित आस्त्राख़न नगर पर विभिन्न देशों का प्रभाव पड़ा है। आस्त्राख़न रूस के सबसे गरम स्थानों में से एक है। यहाँ पर आप वोल्गा नदी या कैस्पियन सागर में क्रूज की सवारी का आनन्द उठा सकते हैं।

आस्त्राख़न नगर के केन्द्र में एक ख़ूबसूरत झील स्थित है। स्रोत : Lori/Legion-Mediaआस्त्राख़न नगर के केन्द्र में एक ख़ूबसूरत झील स्थित है। स्रोत : Lori/Legion-Media

आस्त्राख़न में स्थापत्य कला की विभिन्न शैलियों का रोचक संगम देखने को मिलता है। जहाँ एक ओर 16वीं सदी के अन्त में निर्मित यहाँ का एक किला प्राचीन रूसी शैली में बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर यहाँ की अनेक इमारतों पर मध्य एशियाई स्थापत्य कला का प्रभाव दिखाई देता है।

हवाई जहाज़ से मस्क्वा से आस्त्राख़न जाने में ढाई घण्टे लगते हैं। यदि आपको रेलगाड़ी से जाना हो, तो रात की गाड़ी पकड़ें। रात वाली गाड़ी सुबह के समय वोल्गा डेल्टा से दक्षिण की ओर बढ़ती है, जिससे आपको दोनों ओर रूस के सुरम्य दृश्यों को देखने का मौक़ा मिल जाता है। 

उलान-उदे

उलान-उदे रूस के बुर्यातिया प्रदेश की राजधानी है। यदि आप बिल्कुल अलग, अनजाने और अनूठे दृश्य देखना चाहते हैं, तो इस मामले में रूस का शायद ही कोई दूसरा पर्यटक स्थल उलान-उदे के आगे टिक पाएगा। मंगोलिया के नज़दीक स्थित यह शहर अपने इवलगिन्स्की दत्सान बौद्ध मठ के लिए प्रसिद्ध है।

 इवलगिन्स्की बौद्ध मठ। स्रोत : Lori/Legion-Media इवलगिन्स्की बौद्ध मठ। स्रोत : Lori/Legion-Media

1945 में निर्मित इवलगिन्स्की बौद्ध मठ में अनेक बौद्ध मन्दिर, एक पुस्तकालय, एक विद्यालय और ध्यान करने के लिए एक हॉल मौजूद हैं। इवलगिन्स्की बौद्ध मठ की स्थापत्य कला में रूसी, मंगोलियाई, तिब्बती और चीनी स्थापत्य शैलियों का दुर्लभ मेल दिखाई देता है। इवलगिन्स्की बौद्ध मठ को देखने के बाद आप साइबेरिया के विशाल निर्जन भूभाग के सम्बन्ध में भी बहुत-कुछ अनुमान लगा सकते हैं।

उलान-उदे के ऐतिहासिक केन्द्र में 19वीं सदी की लकड़ी और पत्थर की बनीं दुकानें और बाज़ार बड़ा अनूठा है। इस ऐतिहासिक केन्द्र को संरक्षित किया गया है। उलान-उदे नगर बैकाल क्षेत्र की विभिन्न आदिवासी जनजातियों की संस्कृतियों का  प्रतिनिधित्व भी करता है। यहाँ पर 10 से अधिक ऐसे संग्रहालय बने हुए हैं, जो विभिन्न नृजातीय समूहों को समर्पित हैं। इस सूची में बैकाल-पार क्षेत्र का नृजातीय संग्रहालय भी शामिल है, जो 37-हेक्टेयर के इलाके में फैला हुआ है।

उलान-उदे मस्क्वा से 5 हजार 6 सौ 70 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। मस्क्वा से उलान-उदे तक जाने के लिए यदि आप ट्रांस साइबेरियन रेलवे की ट्रेन पकड़ते हैं, तो आपको रास्ते में चार दिन लगेंगे। यदि आप हवाई जहाज़ से वहाँ जाते हैं, तो मस्क्वा से उलान-उदे तक जाने में साढ़े छह घण्टे का समय लगता है। पर्यटकों के लिए उलान उदे की यात्रा के साथ-साथ उसके पास स्थित बैकाल झील की सैर का कार्यक्रम बना लेना भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

2017 में रूस के इन कम विख्यात पर्यटक स्थलों को आपका इन्तज़ार रहेगा!

 

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