कोलकाता के पुस्तक मेले में रूसी पुस्तकें भी

​25 जनवरी को कोलकाता में 41 वाँ अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेला शुरू हो गया। इस वर्ष रूस को इस पुस्तक मेले में अतिथि देश के रूप में आमन्त्रित किया गया है। रूस के कई प्रमुख प्रकाशक 12 दिन तक चलने वाले इस पुस्तक मेले में भाग ले रहे हैं।
Kolkata book fair 2016
25 जनवरी को कोलकाता में 41 वाँ अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेला आरम्भ हो गया। स्रोत :Biswarup Ganguly/wikipedia

रूस और भारत के बीच राजनयिक रिश्तों की 70 वीं जयन्ती के अवसर पर भारत के सबसे पुराने और प्रसिद्ध पुस्तक मेले में रूसी किताबों का व्यापक रूप से प्रदर्शन किया गया है।

आज यानी 25 जनवरी को कोलकाता में 41 वाँ अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेला आरम्भ हो गया। यह मेला पूर्वी कोलकाता के ‘मिलन मेला’ प्रदर्शनी केन्द्र में लगा हुआ है।

रूस के कई प्रमुख प्रकाशक भी कोलकाता पुस्तक मेले में अपनी किताबें लेकर आए हुए हैं, जिनमें ‘आस्त’ ‘एक्समो’ और ‘मलदाया ग्वार्दिया’ जैसे प्रसिद्ध रूसी प्रकाशन भी शामिल हैं। रूसी किताबें ‘रूस की पुस्तकें’ नामक मण्डप में देखी जा सकती हैं।

आधुनिक रूसी साहित्यकार मक्सीम अमेलिन भी इस मेले में भाग ले रहे हैं। मेले में उनके साथ कुछ संगोष्ठियों और मुलाकातों का आयोजन किया गया है।

कोलकाता स्थित रूस के वाणिज्य दूतावास तथा ‘गोर्की सदन’ (रूसी सांस्कृतिक केन्द्र) के सहयोग से ये रूसी प्रकाशक अन्तरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में भाग ले रहे हैं।

रूसी किताबों की यादें

पिछली सदी के आठवें और नौवें दशक में रूसी साहित्य के स्टॉल कोलकाता पुस्तक मेले में बहुत लोकप्रिय होते थे। उस समय ‘प्रगति’ प्रकाशन और ‘रादुगा’ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जाने वाली किताबों की भारत में बड़ी माँग थी।

कोलकाता पुस्तक मेले में  नियमित रूप से आने वाले एक दर्शक काजल चटर्जी ने रूस-भारत संवाद से कहा — मुझे वह समय याद है जब मैं अर्कादी गैदार का उपन्यास ‘जब मैं छोटा बच्चा था’ ख़रीद रहा था। तब वस्तोक नामक स्टॉल के सामने ख़रीदारों की बड़ी कतार लगी हुई थी, उस स्टॉल पर बांग्ला भाषा में अनूदित रूसी साहित्य बिक रहा था। मैंने सिर्फ़ 15 रुपए में लेफ़ तलस्तोय की कई किताबें ख़रीदी थी। वे किताबें मेरे लिए असली खज़ाना हैं।

आठवें दशक में कोलकाता पुस्तक मेले में रूसी वैज्ञानिक किताबें भी बिकती थी।

बड़ी अन्तरराष्ट्रीय उपस्थिती

इस वर्ष कोलकाता के अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में 29 देशों से 80 से ज़्यादा प्रकाशक भाग ले रहे हैं। यह मेला 5 फ़रवरी तक चलेगा और इसमें 600 से अधिक स्टॉल बने हुए हैं। पुस्तक मेले के दौरान ‘पार्क सर्कस’ से ‘मिलन मेला’ तक निःशुल्क बस सेवा भी काम करेगी।

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