जल्दी ही भारत सरकार नए एटमी बिजलीघर के लिए जगह तय कर लेगी

रूसी कम्पनी ’रोसएटम’ भारत में एक और परमाणु बिजलीघर बनाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है।
Kudankulam
कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में अभी तक बनाए गए रिएक्टर भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम को सौंप दिए गए हैं और अब यह निगम ही उन्हें संचालित कर रहा है। स्रोत :wikipedia.org

‘रोसएटम ओवरसीज’ नामक रूसी कम्पनी के निदेशक येव्गेनी पकिरमानफ़ ने ’रूस-भारत संवाद’ को बताया कि जल्दी ही भारत सरकार रूसी इंजीनियरों के सहयोग से एक और नए परमाणु बिजलीघर का निर्माण करने के लिए जगह तय कर लेगी। इसके बाद रूस और भारत नया बिजलीघर बनाने के सिलसिले में एक अनुबन्ध पर हस्ताक्षर करेंगे।

पिछले हफ़्ते ही भारत के परमाणु ऊर्जा राज्यमन्त्री जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी है कि भारत सरकार रूस की सहायता से नया परमाणु बिजलीघर बनाने के लिए आन्ध्र-प्रदेश में किसी अनुकूल तटवर्ती इलाके की तलाश कर रही है। 

आन्ध्र प्रदेश की सरकार ने भी एटमी बिजलीघर बनाने की अनुमति दे दी है। इस के लिए इंजीनियरों द्वारा ज़रूरी जाँच-पड़ताल शुरू कर दी गई है। 

उन्होंने कहा कि कावली नगर के आसपास के इलाके में एटमी बिजलीघर बनाने के बारे में जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग बिजलीघर की ज़रूरत और महत्व को समझ सकें। सार्वजनिक सभाएँ करके आम लोगों के मन में उठने वाले सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं।

येव्गेनी पकिरमानफ़ ने कहा कि कुडनकुलम बिजलीघर के निर्माण में आपसी सहयोग के सफल अनुभव के बाद अब भारत किसी नई जगह पर 6 यूनिटों वाला एक और एटमी बिजलीघर बनाना चाहता है। यह नया बिजलीघर बनाने के लिए रूस भारत को तकनीकी सहायता और विशेष सुविधाजनक शर्तों पर ऋण देने को तैयार है।

येव्गेनी पकिरमानफ़ ने बताया कि इस नई परियोजना में ‘रोसएटम’ कम्पनी कई तरह से भाग ले सकती है। हमारे दो देशों के बीच हुए एक अनुबन्ध के अनुसार, रूस के सहयोग से भारत में बनाए जा रहे एटमी बिजलीघरों में लगाए जाने वाले  कुछ एटमी ईंधन उपकरणों का उत्पादन भी भारत में ही किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में अभी तक बनाए गए रिएक्टर भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम को सौंप दिए गए हैं और अब यह निगम ही उन्हें संचालित कर रहा है।

कुडनकुलम बिजलीघर का दूसरा यूनिट भी पूरी क्षमता से काम करने लगा है और 1000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि दिसम्बर 2014 में रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन और भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने दो देशों के बीच एक सामरिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके अनुसार रूस भारत में कम से कम 12 एटमी बिजलीघरों का निर्माण करेगा।

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