रूसी कम्पनी ’गाज़प्रोम’ भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को पक्का करेगी

रूसी गैस कम्पनी ’गाज़प्रोम’ 2018 से हर साल भारत को 25 लाख मीट्रिक टन तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करेगी। यह गैस सखालिन या यमाल प्रायद्वीप के गैस भण्डारों से भारत भेजी जाएगी।
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2009 और 2016 के बीच गाज़प्रोम ने भारत को कुल 26 खेपों में 17 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की है। स्रोत :Reuters

विगत 12 अप्रैल को रूस के ऊर्जा उपमन्त्री यूरी सिन्त्यूरिन ने समाचार समिति रिया नोवस्ती को बताया कि रूसी गैस कम्पनी गाज़प्रोम 2018 से हर साल भारत को 25 लाख मीट्रिक टन तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति किया करेगी।

गाज़प्रोम की सहायक कम्पनी ’गाज़प्रोम मार्केटिंग एण्ड ट्रेडिंग सिंगापुर’ भारत को गैस सप्लाई करने वाली प्रमुख कम्पनी होगी, जो भारतीय संगठन गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (गेल) को गैस की आपूर्ति किया करेगी। दोनों कम्पनियों ने 2012 में 20 साल के लिए एक आपूर्ति अनुबन्ध किया था।

यूरी सिन्त्यूरिन ने बताया कि भारत को तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की आपूर्ति सख़ालिन गैस भण्डार और यमाल गैस भण्डार से की जाएगी। यमाल गैस भण्डार में गैस की निकासी का पहला दौर 2017 में शुरू हो जाएगा। यमाल गैस भण्डार से निकलने वाली गैस भारत के अलावा जापान और चीन को भी सप्लाई की जाएगी।

2009 और 2016 के बीच गाज़प्रोम ने भारत को कुल 26 खेपों में 17 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की है।

अक्टूबर 2016 में गोवा में हुए रूस-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान गाज़प्रोम के प्रमुख अलिक्सेय मिल्लर और भारत की सरकारी कम्पनी इंजीनियर्स इण्डिया लिमिटेड के प्रतिनिधि संजय गुप्ता ने एक सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके अनुसार दोनों कम्पनियाँ मिलकर इस बात का अध्ययन करेंगी कि रूस से भारत को एलएनजी की आपूर्ति करने के लिए सबसे सुगम मार्ग कौन से हैं।

भारत में गैस की बढ़ती हुई माँग

भारत तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का चौथा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। अलिक्सेय मिल्लर ने बताया कि भारत में गैस की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। 2020 तक, भारत में गैस का उपयोग बढ़कर तीन गुना हो जाएगा और 2030 तक उसमें छह गुना वृद्धि होने की उम्मीद है।

भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत में गैस का घरेलू उत्पादन 2018-19 तक बढ़कर 1 करोड़ 46 लाख 87 हज़ार मीट्रिक घन मीटर प्रतिदिन हो जाएगा। लेकिन इससे भारत की मात्र 30 प्रतिशत मांग ही पूरी होगी।

रूस के ऊर्जा मन्त्री अलिक्सान्दर नोवक ने भी भारत की बढ़ती हुई गैस की माँग की ओर ध्यान दिया। उन्होंने मार्च 2017 में ह्यूस्टन में ’सेरावीक 2017’ नामक तेल और गैस सम्मेलन के दौरान भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मन्त्री धर्मेन्द्र प्रधान से इस बारे में बातचीत की।

नोवक ने कहा कि रूस और भारत के बीच प्राकृतिक तरल गैस का व्यापार अब रणनीतिक सहयोग में बदल गया है। अब इस सहयोग से हमारे दोनों देशों के हितों की पूर्ति होती है।

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