वाइब्रेण्ट गुजरात आर्थिक सम्मेलन में रूसी कम्पनियों की सक्रिय हिस्सेदारी

गाँधीनगर में वाइब्रेण्ट गुजरात आर्थिक सम्मेलन शुरू हो गया। इस सम्मेलन में एक बड़ा रूसी प्रतिनिधिमण्डल भाग ले रहा है।
Modi and Rogozin
’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में रूस के उपप्रधानमन्त्री दिमित्री रगोज़िन और भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की मुलाक़ात भी हुई। स्रोत :oborona.gov.ru

रूस के उपप्रधानमन्त्री दिमित्री रगोज़िन के नेतृत्व में रूस का एक बड़ा प्रतिनिधिमण्डल भारत के गुजरात राज्य के गाँधीनगर शहर में सोमवार को शुरू हुए ’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में भाग ले रहा है। 

सोमवार की शाम को इस सम्मेलन की शुरूआत प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने बड़े समारोही वातावरण में की, लेकिन उससे पहले ही सोमवार सुबह से इस अवसर पर आयोजित व्यापार और उद्योग मेला काम करने लगा था। इस सम्मेलन में ’व्यापारी से व्यापारी मिले कम्पनी से कम्पनी’ विषय  पर प्रारूप बी 2बी के अन्तर्गत10 जनवरी को दैशिक संगोष्ठियाँ शुरू होंगी, जो 12 जनवरी तक चलेंगी। 

इस सम्मेलन का पहला दिन रूसी-भारतीय सहयोग की दृष्टि से काफ़ी महत्वपूर्ण रहा। उस दिन रूस के उपप्रधानमन्त्री दिमित्री रगोज़िन और भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की मुलाक़ात हुई। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले किसी भी प्रतिनिधिमण्डल के नेता से नरेन्द्र मोदी की यह पहली मुलाक़ात थी। दो नेताओं की यह मुलाक़ात आधे घण्टे तक चली।  दिमित्री रगोज़िन ने भारत के प्रधानमन्त्री को दिखाया कि कैसे ’सुरक्षित शहर’ कार्यक्रम के अन्तर्गत शहर के पूरे कम्प्यूटर तन्त्र के हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर  ढाँचे  को सुरक्षित रखने के लिए रूस में क्या व्यवस्था अपनाई जाती है। 

बाद में रूसी पत्रकारों से बात करते हुए दिमित्री रगोज़िन ने बताया कि शहर के कम्प्यूटरीकरण को सुरक्षित रखने की यह रूसी व्यवस्था न केवल गुजरात के लिए बल्कि तमाम भारत के लिए उपयोगी हो सकती है और मोदी सरकार की ’स्मार्ट सिटी’ परियोजना में इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। 

उन्होंने कहा — किसी भी शहर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ संचालित करने के लिए और विभिन्न कैमरों व सम्वेदकों (सेंसरों) से मिलने वाली जानकारी को एक ही प्रणाली में जोड़कर उसे उल्था करके उसके परिणाम निकालने और शहर की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार सभी संस्थाओं को उन परिणामों के आधार पर उचित सिफ़ारिशें देने में हमारी यह रूसी व्यवस्था बड़ी कामयाब रही है। 

उन्होंने कहा —  किसी भी शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए यह ज़रूरी है कि सबसे पहले उसे ’सुरक्षित शहर’ बनाया जाए यानी शहर में उपलब्ध सभी जनसुविधा व्यवस्थाएँ उचित ढंग से काम कर रही हों। शहर की बिजली व ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था, जल आपूर्ति व्यवस्था व अन्य नागरिक सुविधा व्यवस्थाएँ लगातार सक्रिय रहें। आज हमने प्रधानमन्त्री मोदी को इस सिलसिले में रूस में इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली से परिचित कराया।

प्रदेशों के बीच भी सहयोग 

’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में रूस की 10 से ज़्यादा कम्पनियाँ भाग ले रही हैं, जिनमें रोसएटम, रोसकोसमोस,विर्ताल्योति रस्सी, सिबूर और श्वाबे जैसी विश्वप्रसिद्ध कम्पनियाँ भी शामिल हैं। भारत में रूसी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के प्रमुख यरास्लाफ़ तरस्यूक ने समाचार समिति रिया नोवस्ती को बताया — इन कम्पनियों के अलावा इस सम्मेलन में रूस के ततारस्तान और अस्त्राख़न प्रदेश की कम्पनियाँ भी बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी कर रही हैं। ख़ासकर अस्त्राख़न प्रदेश भारतीय कम्पनियों को अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र ’लोटस’ की ओर आकर्षित करना चाहता है। 

इसके अलावा रूस के विभिन्न मन्त्रालयों के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधिमण्डल भी ’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इनमें रूस के आर्थिक विकास मन्त्रालय के एशिया, अफ़्रीका व लातिनी अमरीका विभाग के निदेशक येव्गेनी पपोफ़, रूस के उद्योग व व्यापार उपमन्त्री अलिक्सान्दर पतापफ़ तथा रूसी आपदा राहत मन्त्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जो भारतीय अधिकारियों को ’सुरक्षित शहर’ परियोजना के अन्तर्गत कम्प्यूटरीकरण की पूरी प्रणाली की जानकारी देंगे। 

भारत में रूसी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के प्रमुख यरास्लाफ़ तरस्यूक ने बताया — ’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में रूस और भारत के बीच कम से कम तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। लेकिन उन्होंने इन तीनों समझौतों का विवरण बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा  — ’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में रूस  इसलिए गहरी दिलचस्पी ले रहा है क्योंकि वह रूस और भारत के विभिन्न प्रदेशों के बीच भी आपसी सहयोग का व्यापक रूप से विकास करना चाहता है। 

यरास्लाफ़ तरस्यूक ने कहा — अब हम प्रदेशों के बीच सहयोग का विकास करना चाहते हैं। कहना चाहिए कि हमने शुरूआत औद्योगिक रूप से विकसित प्रदेश की है। रूस के व्यापार और उद्योग मन्त्री दिनीस मन्तूरफ़ की विगत अक्तूबर में सम्पन्न भारत-यात्रा से जो शुरूआत हुई थी, हम उसी शुरूआत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। दिनीस मन्तूरफ़ ने तब महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली का दौरा किया था। रूसी व्यवसायी, ख़ासकर रूस के विभिन्न प्रदेशों के व्यवसायी भारतीय प्रदेशों की विभिन्न कम्पनियों के साथ कम करने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 

यरास्लाफ़ तरस्यूक ने बताया कि इसीलिए भारत के इस क्षेत्रीय आर्थिक सम्मेलन में रूसी कम्पनियों की सहभागिता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

भारत में रूसी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के प्रमुख यरास्लाफ़ तरस्यूक ने कहा — जब रूसी कम्पनियाँ भारत के किसी क्षेत्रीय आर्थिक सम्मेलन में भाग लेती हैं, तो उनमें बड़ी दिलचस्पी दिखाई जाती है। दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले सम्मेलनों में ऐसा नहीं होता। हमारी रूसी कम्पनियों के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए ’वाइब्रेण्ट गुजरात’ आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने वाली 420 से ज़्यादा भारतीय कम्पनियों ने अनुरोध किया है, जबकि इस मुलाक़ात के लिए हमें जो हाल उपलब्ध कराया गया है, वहाँ सिर्फ़ सौ सीटों का ही इन्तज़ाम है। जब तक मुलाक़ात होगी, तब तक रूस में दिलचस्पी लेने वाली भारतीय कम्पनियों की संख्या 500 से ज़्यादा हो जाने का अनुमान है। 

उन्होंने कहा — ये भारतीय कम्पनियाँ भी कोई छोटी-मोटी कम्पनियाँ नहीं है। ये मध्यस्थता करने वाली कम्पनियाँ भी नहीं हैं, बल्कि ऑयल इण्डिया, रिलायन्स इण्डस्ट्रीज और अडानी ग्रुप जैसी बड़ी-बड़ी कम्पनियों के प्रतिनिधि रूसी कम्पनियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलने को इच्छुक हैं। 

यरास्लाफ़ तरस्यूक ने कहा — इन कम्पनियों के बीच बहुत-सी कम्पनियाँ विभिन्न रसायनिक मालों का उत्पादन करती हैं। इनमें दवाइयाँ बनाने वाली कम्पनियाँ हैं, उर्वरक और खादें बनाने वाली कम्पनियाँ हैं और कृषि मालों का उत्पादन करने वाली कम्पनियाँ भी शामिल हैं। भारतीय कम्पनियाँ सचमुच रूसी कम्पनियों के साथ काम करने की इच्छुक हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हालाँकि भारत के किसी क्षेत्रीय आर्थिक सम्मेलन में रूसी कम्पनियाँ कोई पहली बार हिस्सा नहीं ले रही हैं, लेकिन फिर भी ऐसा बहुत कम होता है, जब रूसी कम्पनियाँ क्षेत्रीय आर्थिक सम्मेलनों में सक्रियतापूर्वक भाग लें।

 

+
फ़ेसबुक पर पसंद करें