अलीबाबा ग्रुप रूसी ’स्बेरबांक’ के साथ सँयुक्त कम्पनी बनाने को उत्सुक

24 जनवरी 2017 कीरा कलीनिना
रूसी मीडिया ने सूचना दी है कि जल्दी ही रूस में एक ऐसी सँयुक्त कम्पनी बनने जा रही है, जिसमें चीन की महाकम्पनी अलीबाबा के साथ-साथ रूस का ’स्बेरबांक’ नामक महाबैंक भी शामिल होगा। यह नई कम्पनी रूस, सोवियत संघ से अलग हुए देशों, तुर्की तथा पूर्वी यूरोप के देशों में व्यवसाय करेगी।
Alibaba Group
अगर सँयुक्त कम्पनी बनाने का यह अनुभव सफल रहा तो चीनी पक्ष के हित तो अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुए हैं। स्रोत :Reuters

18 जनवरी को रूसी व्यावसायिक समाचारपत्र ’कमेरसान्त’ ने रूस सरकार में अपने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि चीन का अलीबाबा ग्रुप रूस के ’स्बेरबांक’ के साथ इलैट्रोनिक व्यापार करने के लिए सँयुक्त कम्पनी बनाने के सवाल पर बातचीत कर रहा है।

बड़ी-बड़ी योजनाएँ

सरकार के क़रीबी सूत्रों ने ’कमेरसान्त’ को बताया कि रूस की सरकार और रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारी रूस के केन्द्रीय बैंक के सहयोग से रूसी स्बेरबांक और अलीबाबा ग्रुप की एक सँयुक्त कम्पनी का निर्माण करने के सवाल पर बातचीत कर रहे हैं। इस कम्पनी में स्बेरबांक कम से कम 50 प्रतिशत का हिस्सेदार होगा। 

अलीबाबा ग्रुप रूस और सोवियत संघ से अलग हुए देशों में तथा तुर्की और पूर्वी यूरोप के कुछ देशों में सीमा पार से चल रहा अपना व्यवसाय नई कम्पनी को सौंप सकता है, जबकि स्बेरबांक इस कम्पनी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेने के लिए तैयार है। इसके साथ-साथ वह कम्पनी के लिए मार्केटिंग करने और मालों का परिवहन करने की ज़िम्मेदारी भी ले सकता है। इस तरह अनेक अरब डॉलर का निवेश करके अन्तरराष्ट्रीय नेटवर्क वाली एक कम्पनी स्थापित करने की योजना है। लेकिन यह सँयुक्त कम्पनी वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराने का काम नहीं कर सकेगी क्योंकि यह काम ख़ुद स्बेरबांक करेगा।

नवम्बर - 2016 में स्बेरबांक ने यह प्रस्ताव रखा था कि वह गूगल, अमाज़ोन, फ़ेसबुक, टेनसेण्ट और अलीबाबा की तरह की बड़ी अमरीकी और चीनी कम्पनियों की तरह इण्टरनेट व्यापार करने वाली राष्ट्रीय स्तर की एक रूसी कम्पनी बनाना चाहता है। स्बेरबांक का कहना था कि इस कम्पनी का कुल वार्षिक व्यापार दस खरब डॉलर से भी ज़्यादा होगा। 

रूसी महत्वाकांक्षाएँ

निश्चय ही यह सँयुक्त कम्पनी बनाकर स्बेरबांक न केवल उसमें लाभकारी निवेश करने की सम्भावनाएँ देख रहा है, बल्कि वह डिजिटल तक्नोलौजी और इलैक्ट्रोनिक भुगतान के क्षेत्र में अलीबाबा ग्रुप को हुए अनुभव का लाभ भी उठाना चाहता है। परामर्श एजेन्सी जोस्देव्रीज की परामर्शदाता इरीना बोल्तवा ने रूस-भारत संवाद से इस सिलसिले में चर्चा करते हुए कहा — रूस की दिलचस्पी ऑनलाइन रिटेल बिजनेस में है, जो दुनिया में दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है, लेकिन रूस में जो अभी ठीक से विकसित नहीं हो पाया है।  

मस्क्वा (मास्को) के स्कोलकवा प्रबन्धन संस्थान के चीन विभाग के प्रमुख अलेग रमीगा ने इरीना बोल्तवा की बात का समर्थन करते हुए कहा — स्बेरबांक ख़ुद को एक सर्वाधिक अभिनव और नवीन बैंक मानता है। अगर उसकी पहुँच अलीबाबा ग्रुप की नई वित्तीय और बैंक तक्नोलौजियों तक हो जाएगी तो इससे स्बेरबांक की प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी।

चीन के साथ सयुँक्त कम्पनी क्यों?

अगर सँयुक्त कम्पनी बनाने का यह अनुभव सफल रहा तो चीनी पक्ष के हित तो अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुए हैं, लेकिन रूस एक साथ कई उद्देश्य प्राप्त कर लेगा, जिनमें सबसे सहज उद्देश्य यह है कि स्बेरबांक की यूरेशियाई आर्थिक संगठन तक सीधी पहुँच आसान हो जाएगी और ब्यूरोक्रेटिक बाधाओं को पार करके प्रतिद्वन्द्वियों से आगे निकलने की सम्भावना बन जाएगी।

मस्क्वा स्थित कर्नेगी केन्द्र के विशेषज्ञ अलिक्सान्दर गबूएफ़ ने कहा — चीन इसलिए यह सँयुक्त कम्पनी बनाने में दिलचस्पी ले रहा है चूँकि तब उसे  स्बेरबांक के रूप में एक बड़े रूसी सरकारी संगठन का सहयोग मिलने लगेगा और इस संगठन के प्रमुख तक उसकी सीधी पहुँच हो जाएगी। स्थानीय प्रतियोगियों से बचने और स्थानीय बाधाओं को दूर करने के लिए इससे अच्छी सुरक्षा तकनीक और भला क्या होगी। 

यही नहीं, चीन को रूस में एक ऐसा मज़बूत रूसी सहयोगी भी चाहिए जो स्थानीय कानूनों, वित्तीय सवालों और टैक्स सम्बन्धी सवालों को सुलझा सके और उनकी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले सके।

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