उन्नत तक्नोलौजी देकर रूस भारत में एटम उद्योग का विकास करेगा

12 अगस्त 2016 रिया नोवोस्ती
कुडनकुलम बिजलीघर में रूस के सहयोग से बनाई गई पहली इकाई भारत को सौंप दी गई। इस तरह भारत द्वारा रूस को एटमी बिजलीघर बनाने की जो ज़िम्मेदारी दी गई थी, वह ज़िम्मेदारी पूरी हो गई और औपचारिक रूप से पहली परियोजना पूरी कर ली गई। अब रूसी तक्नोलौजी के आधार पर भारत में परमाणु ऊर्जा सम्बन्धी नई परियोजनाओं से जुड़े काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
Putin_Kudankulam
रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन। स्रोत :kremlin.ru

कुडनकुलम में पहला यूनिट भारत को सौंपे जाने के समारोह के अवसर पर आयोजित विडियो कांफ़्रेंस में बोलते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने कहा — परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सँयुक्त परियोजनाएँ रूस-भारत रणनीतिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रूस के परमाणु विशेषज्ञ भारत के एटमी क्षेत्र के विकास में सहायता करने के लिए तैयार हैं। इस विडियो कांफ़्रेंस में भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, तमिलनाडु की मुख्यमन्त्री जयललिता, कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में पहले यूनिट का निर्माण करने वाली ठेकेदार रूसी कम्पनी ’रोसएटम’ के प्रबन्धमण्डल के अध्यक्ष वलेरी लिमरेन्का और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम के निदेशक सतीश कुमार शर्मा ने भी भाग लिया।

रूस 1988 में हस्ताक्षरित अन्तरसरकारी समझौते और फिर 1998 में हस्ताक्षरित पूरक समझौते के आधार पर तमिलनाडु में कुडनकुलम एटमी बिजलीघर का निर्माण कर रहा है। भारत की तरफ़ से कुडनकुलम एटमी बिजलीघर को बनाने की ज़िम्मेदारी भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम ने रूसी कम्पनी ’रोसएटम’ को सौंपी है।

कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में लगाया गया 1 हज़ार मेगावाट क्षमता का  रिएक्टर आज भारत में काम कर रहे सभी परमाणु रिएक्टरों में सबसे ज़्यादा शक्तिशाली और सबसे ज़्यादा सुरक्षित रिएक्टर है क्योंकि इसमें अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। यह रिएक्टर न सिर्फ़ भारत का सबसे सुरक्षित रिएक्टर है, बल्कि सारी दुनिया का सबसे सुरक्षित रिएक्टर है। इस यूनिट को वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रिड यानी भारत की राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति वितरण व्यवस्था से जोड़ा गया था।  वर्ष 2014 के अन्त में यह रिएक्टर गारण्टी युक्त विद्युत उत्पादन के काल में भारत को सौंप दिया गया। इस बीच रिएक्टर के सभी उपकरणों ने एकदम ठीक तरह से काम किया। भारत को यह पहला यूनिट पूरी तरह से सौंपे जाने से पहले यह देखना ज़रूरी था कि यह रिएक्टर उचित ढंग से काम कर रहा है।

रणनीतिक सहयोग

रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने कहा — परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सँयुक्त परियोजनाएँ रूस-भारत रणनीतिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा — इस क्षेत्र में आर्थिक सहयोग हमारे दो देशों के विकास के लिए बड़ा महत्व रखता है।

रूस के राष्ट्रपति ने आगे कहा — मैं यह कहना चाहता हूँ कि हमने सिर्फ़ एक एटमी बिजलीघर का निर्माण ही नहीं किया है ताकि उससे बिजली बनाई जा सके, बल्कि हमने भारत के परमाणु उद्योग के लिए नवीनतम हाई टैक्नोलौजी को विशाल स्तर पर उपलब्ध कराया है।

व्लदीमिर पूतिन ने कहा कि रूस के परमाणु विशेषज्ञ इस काम को पूरा करके भारत के परमाणु विशेषज्ञों के साथ अपने अनुभव और अपनी उपलब्धियों को बाँट रहे हैं और उन्हें वे नई जानकारियाँ और वह ज्ञान दे रहे हैं, जो ख़ुद उनके पास है। रूसी परमाणु वैज्ञानिक भारत में काम करने के लिए सक्षम भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों को तैयार कर रहे हैं।

रूस के राष्ट्रपति ने कहा — अपने भारतीय सहयोगियों के साथ अपने अनुभव को बाँटकर हम बेहद ख़ुश हैं। प्राथमिक महत्व के इस हाई टैनोलॉजिक उद्योग में अपनी उपलब्धियों को भारत को सौंप कर निश्चय ही हमें बहुत अच्छा लग रहा है।

सबसे उन्नत तक्नोलौजी

 / Press photo / Press photo

रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने कहा कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में रूस की अत्याधुनिक परमाणु तक्नोलौजियों का इस्तेमाल किया गया है। ये तक्नोलौजियाँ न सिर्फ़ रूस की नवीनतम तक्नोलौजियाँ हैं, बल्कि ये सारी दुनिया की आधुनिकतम तक्नोलौजियाँ मानी जाती हैं।

व्लदीमिर पूतिन ने कहा — भारत की राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति वितरण व्यवस्था में कुडनकुलम बिजलीघर के पहले यूनिट के जुड़ने और जल्दी ही दूसरे यूनिट के भी उसमें शामिल हो जाने से भारत की ऊर्जा-आपूर्ति बहुत बढ़ जाएगी और भारत की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत हो जाएगी।

विडियो कांफ़्रेंस में बोलते हुए नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एटमी बिजलीघर भारत की अर्थव्यवस्था के भारी विकास के लिए तो कारगर होंगे ही, वे भारत में पर्यावरण प्रदषण को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाएँगे। कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में पहले यूनिट का निर्माण करने वाली ठेकेदार रूसी कम्पनी ’रोसएटम’ के प्रबन्धमण्डल के अध्यक्ष वलेरी लिमरेन्का ने ज़ोर दिया कि कुडनकुलम में बनाए गए पहले यूनिट से जो उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं, वे उम्मीदों से कहीं ज़्यादा रहीं।

नए रिएक्टर लगाने की योजना

अब शान्तिपूर्ण परमाणु क्षेत्र में आपसी सहयोग का विकास करते हुए रूस और भारत कुडनकुलम में जल्दी ही दूसरे यूनिट को शुरू करने जा रहे हैं। उसके बाद तीसरे और चौथे यूनिटों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा और पाँचवे और छठे यूनिट का निर्माण करने के बारे में दो देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएँगे।

कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर के दूसरे यूनिट को भी जल्दी ही भारत की राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति वितरण व्यवस्था से जोड़ दिया जाएगा।

विडियो कांफ़्रेंस में बोलते हुए तमिलनाडु की मुख्यमन्त्री जयललिता ने कहा — मेरा अनुरोध है कि बिजलीघर की दूसरी इकाई को भी भारत की राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति वितरण व्यवस्था से जल्दी से जल्दी जोड़ा जाए क्योंकि हमारी तेज़ी से विकसित होती हुई अर्थव्यवस्था के लिए और हमारे उद्योगों और कृषि के लिए बिजली की बढ़ती हुई माँग की पूर्ति में हमें इससे बड़ी सहायता मिलेगी।

जयललिता ने विश्वास व्यक्त किया कि तमिलनाडु और उसके पड़ोसी राज्य ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में कुडनकुलम बिजलीघर से उम्मीद लगा सकते हैं।

उन्होंने रूस के राष्ट्रपति और रूसी जनता को तमिलनाडु के विकास में बड़ा योग देने के लिए धन्यवाद दिया और उनके प्रति अपनी तरफ़ से और अपनी राज्य की जनता की तरफ़ से आभार प्रकट किया।

इस साल कुडनकुलम एटमी बिजलीघर के आगे विकास के सिलसिले में भी रूस और भारत के बीच एक समझौते पर हस्य्ताक्षर किए जाएँगे।

रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने कहा — हमें उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक कुडनकुलम बिजलीघर के निर्माण से जुड़े तीसरे चरण के महाअनुबन्ध पर और ऋण रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर दिए जाएँगे।

नरेन्द्र मोदी ने कहा — भविष्य में रूस के सहयोग से भारत में और अधिक शक्तिशाली एटमी रिएक्तर लगाए जाएँगे। शायद हम सब इस बात को नहीं जानते हैं कि कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में बनाया गया पहला रिएक्टर एक हज़ार मेगावाट क्षमता का है और भारत का सबसे शक्तिशाली एटमी रिएक्टर है। हम परमाणु ऊर्जा के विकास का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

भारत के प्रधानमन्त्री ने कहा — सिर्फ़ कुडनकुलम एटमी बिजलीघर में ही 1 हज़ार मेगावाट क्षमता वाले पाँच यूनिट बनाए जाएँगे और हम रूस के सहयोग से पूरे भारत में इस तरह के कई बड़े-बड़े एटमी बिजलीघर बनाने जा रहे हैं।

दिसम्बर 2014 में रूस और भारत के बीच रूसी तक्नोलौजी के आधार पर भारत में कई एटमी बिजलीघर बनाने का जो समझौता हुआ है, उसमें यह बात साफ़-साफ़ दर्ज है।

इस समझौते में बताया गया है कि रूस के सहयोग से भारत में क़रीब 25 परमाणु रिएक्टर बनाए जाएँगे।

यह बताया गया है कि भारत रूस को छह और रिएक्टरों वाला एक दूसरा बिजलीघर बनाने के लिए जगह देने जा रहा है, जिसमें रूस की परमाणु बिजलीघर परियोजना -2006 के आधार पर अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस वीवीइआर-1200 पन-जल ऊर्जा रिएक्टर लगाए जाएँगे।

पहली बार रूसी भाषा में रिया नोवोस्ती में प्रकाशित

+
फ़ेसबुक पर पसंद करें