तकनीकी-कल्पनालोक या 30 साल बाद पृथ्वी पर होने वाली तबाही

2 मार्च 2017 अलेग येगोरफ़
रूसी कम्पनी ’कस्पेर्स्की लैब’ के कम्प्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञों ने ’अर्थ-2050’ ( यानी पृथ्वी-2050) नामक एक नई परियोजना शुरू की है, जिसमें भविष्यवक्ताओं की सहायता से यह पूर्वानुमान लगाने की कोशिश की गई है कि 10, 20 या 30 साल बाद हमारी यह दुनिया कैसी होगी? पृथ्वी के भविष्य की कई अलग-अलग छवियाँ उभर कर आई हैं, जिनमें भूखे लोगों के विद्रोह से लेकर सोफ़े पर आराम से लेटे होने की आदर्श स्थिति भी दिखाई दे रही है।
Utopian businessman walking to the job, destruction, apocalypse.
रूसी कम्पनी ’कस्पेर्स्की लैब’ ने हमारी दुनिया के भविष्य की कल्पना की है। स्रोत :Getty Images

सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कम्पनियों में से एक ’कस्पेर्स्की लैब’ के कर्मियों और ’पृथ्वी-2050’ नामक वेबसाइट के निर्माताओं ने अपने काम के बारे में चर्चा करते हुए लिखा है — भविष्य के बारे में सोचना ही हमारा काम है। हमें पहले से ही इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आने वाले समय में कौन-कौन से खतरे हमारा इन्तज़ार कर रहे हैं और हमें उन खतरों से कैसे निपटना है। अपनी 20वीं जयन्ती के अवसर पर कम्पनी ने एक ऐसी मल्टीमीडिया परियोजना तैयार की है, जिसमें संभावित भविष्य की कल्पना की गई है। 

इस परियोजना में कोई भी हिस्सेदारी कर सकता है और 2030, 2040 और 2050 में क्या-कुछ घट सकता है, उसके बारे में अपने विचार व्यक्त कर सकता है। बाद में जब परियोजना में बदलाव किया जाएगा तो उसमें भाग लेने वाले सभी लोगों के विचार इलैक्ट्रोनिक ग्लोब पर दिखाई देने लगेंगे। भविष्य की हमारी दुनिया के बारे में पहला पूर्वानुमान ’कस्पेर्स्की लैब’ के विशेषज्ञों ने और भविष्यवक्ता इआन पियर्सन ने लगाया है। लेकिन उनके बाद वैबसाइट पर और भी बहुत से लोगों ने अपने-अपने पूर्वानुमान व्यक्त किए हैं।

बेशक, कोई भी यह नहीं जानता है कि ये पूर्वानुमान कितने सही उतरेंगे। इसकी जाँच के लिए सन् 2050 तक पहुँचना दिलचस्प होगा। तो, आइए देखें, पृथ्वी-2050 परियोजना के अनुसार, हमारा भविष्य कैसा होगा?

गर्म साइबेरिया और पानी में डूबे शहर  

वेबसाइट पर बताया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग या दुनिया का तापमान बढ़ने से दुनिया के अस्तित्व के लिए भी खतरा बढ़ता जा रहा है। उत्तरी ध्रुव पर जमी बर्फ़ और हिमनद इतनी तेज़ी से पिघल रहे हैं कि इक्कीसवीं सदी के मध्य में उत्तरी ध्रुव पर बर्फ़ का नामो-निशान बाक़ी नहीं रह जाएगा। इस इलाके में बर्फ़ पिघलने के बाद उत्तरी हिम महासागर का इस्तेमाल सैन्य और व्यापारिक जहाज़रानी के लिए किया जाने लगेगा। यही नहीं, उत्तरी ध्रुव के इलाके में आर्कटिक रिसोर्ट बनाए जाने लगेंगे।

भारी शीत के कारण उत्तरी ध्रुव के इलाके की सदियों से जमी बर्फ़ीली भूमि भी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म हो जाएगी और उत्तरी ध्रुव के आसपास बसे देश इसका फ़ायदा उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। साइबेरिया और कनाडा के विशाल इलाकों का विकास करना बेहद आसान हो जाएगा। लेकिन इस ग्लोबल वार्मिंग का बुरा असर भी पड़ेगा। उत्तरी ध्रुव क्षेत्र की अनूठी प्रकृति नष्ट हो जाएगी और बांग्लादेश के ढाका जैसे शहर की तरह के दुनिया के बहुत से शहर समुद्र के पानी का स्तर बढ़ने के कारण समुद्र में डूब जाएँगे। टाइटैनिक जहाज़ में बदलने के बाद ये शहर कैसे लगेंगे, इसका दृश्य ’अर्थ-2050’ वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

अकाल या समृद्धि? 

पर्यावरण से जुड़ी एक भविष्यवाणी तो बहुत ही ख़राब है। वह भविष्यवाणी यह है कि पृथ्वी की जनसंख्या लगातार बढ़ती रहेगी और पृथ्वी पर मीठे जल के लाले पड़ जाएँगे। पृथ्वी का तापमान बढ़ने के कारण जगह-जगह अकाल पड़ने शुरू हो जाएँगे और अकालग्रस्त भूखे लोग विद्रोह करने लगेंगे। उसके बाद दुनिया भर में संसाधनों पर अधिकार जमाने के लिए युद्ध शुरू हो जाएँगे। लेकिन  सब स्थितियों से बचने के सकारात्मक विकल्प भी सामने आएँगे।

जैसे वैज्ञानिक अधुनातन प्रौद्योगिकी की मदद से समुद्र के खारे जल को मीठे पानी में बदलने का तरीका खोज लेंगे। यह तरीका, यह नई प्रणाली अफ़्रीका और लातिनी अमरीका को अकाल के चंगुल में फँसने से बचाएगी और वहाँ खेती के नए-नए तरीके अपनाए जाने लगेंगे। समुद्र से घिरे देशों को इन नई तकनीकों का बड़ा फ़ायदा होगा। ज़मीन के लिए एक और चीज़ भी दवा का काम करेगी, वो यह कि फिर से वनक्षेत्रों का फैलाव बढ़ेगा और इन जंगलों की वजह से वायु-प्रदूषण कम हो जाएगा।

जनसुविधाएँ और समृद्ध जीवन 

’कस्पेर्स्की लैब’ के अनुसार, विकसित देशों में जीवन अधिक सहज और सुविधाजनक हो जाएगा। लोग अपने घरों में मेज़-कुर्सियाँ, सोफ़ा-पलंग आदि अपनी सुविधा के अनुसार ख़ुद ही बना सकेंगे। हर घर में एक थ्री डी प्रिण्टर (त्रिआयामी प्रिण्टर) लगा होगा, जिसपर लोग अपनी ज़रूरत की चीज़ें बना लिया करेंगे। आज के टेलीविजन चैनलों की जगह तीव्रगति वाले धाराप्रवाह चैनल ले लेंगे। जिनसे सूचनाओं को डाउनलोड करते समय लोग ख़ुद यह तय करेंगे कि उन्हें कौनसी सूचना या कौनसी जानकारी डाउनलोड करनी है या कौनसा कार्यक्रम देखना है और कौनसा नहीं। त्रिआयामी होलोग्राम की सहायता से लोग दूर बैठे मित्रों और नाते-रिश्तेदारों से बात कर सकेंगे।

भविष्यवक्ताओं ने यह चेतावनी भी दी है कि ये सभी सुविधाएँ सिर्फ़ उन्हीं लोगों को उपलब्ध होंगी, जिनके पास खर्च करने के लिए ख़ूब धन होगा। यह भी हो सकता है कि भविष्य में लोग चीज़ें ख़रीदना बन्द कर देंगे और उसकी जगह जीवन सुविधाएँ उपलब्ध कराने वाली कम्पनियों से कुछ सुनिश्चित जीवन सुविधाएँ पाने का अनुबन्ध कर लेंगे। ये वे जीवन सुविधाएँ होंगी, जिनका भुगतान करने की लोगों में क्षमता होगी। ’अर्थ-2050’ (पृथ्वी-2050) वेबसाइट के निर्माताओं के अनुसार, इस सब की वजह से समाज में असमानता और ज़्यादा बढ़ जाएगी तथा समाज का वर्गीकरण भी और गहरा हो जाएगा।

कृत्रिम बुद्धि का साम्राज्य 

’कस्पेर्स्की लैब’ का मानना है कि धीरे-धीरे हर चीज़ स्वचालित होती चली जाएगी यानी हमारे जीवन में मशीनों का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा। नई से नई आधुनिकतम मशीनें हमारे जीवन को नियन्त्रित करने लगेंगी। लोगों को गन्दे और मुश्किल काम से छुट्टी मिल जाएगी। जीवन का यह मशीनीकरण एक तरफ़ तो बहुत सुविधाजनक होगा, वहीं दूसरी तरफ़ खतरनाक भी होगा। उदाहरण के लिए किसी खदान में खुदाई का सारा काम यदि रोबोट करेंगे तो हैकर उन रोबोट की प्रोग्रामिंग बदलकर उनका अपने फ़ायदे के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं और वो रोबोट के सहारे बड़ी आसानी से खनिज पदार्थों की चोरी कर सकते हैं।

लेकिन कुछ भी हो, कृत्रिम बुद्धि का प्रयोग और कम्प्यूटरीकरण बढ़ता चला जाएगा। कहीं-कहीं वह सारा काम रोबोट ही करेंगे, जो काम आज मनुष्य को करने पड़ते हैं। इआन पियर्सन का तो यह भी कहना है कि मनुष्य रोबोटों के साथ ही सेक्स करना शुरू कर देगा और आपस में सेक्स बहुत कम किया करेगा। तकनीक इतने ऊँचे स्तर पर पहुँच जाएगी कि मनुष्य के साथ सेक्स करो या मशीन के साथ, उससे मिलने वाली आनन्दानुभूति और सुखानुभूति में कोई फ़र्क ही महसूस नहीं होगा। कुछ भविष्यवाणियाँ तो इससे भी आगे बढ़ गई हैं। उनके अनुसार — कृत्रिम बुद्धि इतनी ज़्यादा बुद्धिमान हो जाएगी कि शुरू में वह सरकार को देश का शासन चलाने में सहायता देगी और बाद में वह पूरी तरह से सरकार की जगह ले लेगी।

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