भारत-रूस शिखर वार्ता : आस्त्राख़न के साथ मोदी का पुनर्जुड़ाव

मास्को में पूतिन के साथ बातचीत ख़त्म होने के बाद नरेन्द्र मोदी शायद आस्त्राख़न की यात्रा पर भी जाएँ।
Prime Minister Modi’s visit to Central Asia is a landmark event to revitalize India's ancient links with the region. Source: AP
आस्त्राख़न नगर तथा गुजरात की राजधानी अहमदाबाद नगर एक-दूसरे के बन्धु-नगर माने जाते हैं। स्रोत :AP

24-25 दिसम्बर को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी दो-दिवसीय सरकारी यात्रा पर मास्को आएँगे, जिसके दौरान वे राष्ट्रपति पूतिन के साथ 16 वीं वार्षिक भारत-रूस शिखर वार्ता में भाग लेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मास्को में बातचीत ख़त्म होने के बाद वे शायद आस्त्राख़न की यात्रा पर भी जाएँ। आस्त्राख़न कास्पियन सागर की तरफ़ से रूस में प्रवेश करने का द्वार है और यहाँ अपार तेल सम्पदा तथा स्टर्जियन मछलियों का प्रचुर भण्डार है।

विगत जुलाई महीने में उफा में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समय पूतिन से हुई भेंट के दौरान मोदी ने आस्त्राख़न की यात्रा करने की अभिलाषा व्यक्त की थी। उन्होंने तो वहाँ आगामी भारत-रूस शिखर वार्ता आयोजित करने का सुझाव भी दिया था। आस्त्राख़न नगर तथा गुजरात की राजधानी अहमदाबाद नगर एक-दूसरे के बन्धु-नगर माने जाते हैं। इस सिलसिले में आस्त्राख़न की अपनी पिछली यात्राओं की मधुर स्मृतियों का वर्णन करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा - यदि मुझे आस्त्राख़न की यात्रा करने का अवसर मिलता है, तो मैं वहाँ अवश्य जाऊँगा, क्योंकि जब मैं गुजरात का मुख्यमन्त्री था, उस समय गुजरात तथा आस्त्राखन के बीच सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध थे और आज भी वैसे के वैसे हैं। 

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से आस्त्राख़न प्रदेश गुजरात के साथ बन्धु-राज्य के रूप में गहन सहयोग करता आ रहा है। नवम्बर 2001 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमन्त्री के रूप में अपनी पहली सरकारी यात्रा पर आस्त्राख़न गए थे, तभी से रूस के आस्त्राख़न प्रदेश और गुजरात के बीच मजबूत व्यावसायिक सम्बन्ध विकसित होने शुरू हुए थे। तब नरेन्द्र मोदी  तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मास्को की यात्रा पर गए थे और उन्होंने पूतिन की उपस्थिति में गुजरात राज्य तथा आस्त्राखन प्रदेश के बीच सहयोग हेतु एक पंचवर्षीय सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

गुजरात के मुख्यमन्त्री के रूप में अपने 13 वर्षों के कार्यकाल के दौरान नरेन्द्र मोदी  ने गुजरात और आस्त्राखन के बीच रिश्तों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारत के ऐसे पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अक्टूबर 2000 में पूतिन की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित “भारत के राज्यों की सरकारों और रूस के प्रदेशों की सरकारों के बीच सहयोग के सिद्धान्तों पर भारत तथा रूस के बीच हुए करार” की अपार संभावनाओं को पहचाना।

इसी करार के अन्तर्गत उन्होंने आस्त्राख़न प्रदेश को गुजरात के बन्धु-राज्य के रूप में चुना। फिर नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जुलाई 2014 में फोर्टलेजा (ब्राजील) में सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर रूस के राष्ट्रपति के साथ अपनी पहली बैठक में उन्होंने पूतिन से कहा - हम गुजरातियों में यह भावना है कि आस्त्राखन और हमारे बीच काफी घनिष्ठता है।

मोदी ने आगे कहा - आस्त्राखन में एक भवन है, जिसे भारतीय सराय कहते हैं। उन दिनों जब गुजरात के सौदागर आस्त्राख़न की यात्रा पर जाते थे, तो वे इसी जगह ठहरा करते थे। अब आस्त्राखन के निवासी बड़े गर्व से हमें वह भारतीय सराय दिखाते हैं और यह बताते हैं कि उन्होंने किस तरह से इस इमारत को सुरक्षित रखा है और इसकी देखभाल की है। लगभग दो सदी पहले गुजरात के उद्यमी सौदागरों व व्यापारियों ने आस्त्राखन में एक वाणिज्यिक केन्द्र बनाया था। वे सौदागर अस्त्राख़न में सिर्फ़ व्यवसाय ही नहीं करते थे, बल्कि वे वहीं पर बस गए थे और स्थानीय स्त्रियों से विवाह कर वहीं रहने लगे थे। 

इसके बाद दोनों बन्धु-राज्यों के बीच नए-नए व्यापारिक क्षेत्रों में सहयोग विकसित होता चला गया और मोदी जुलाई 2006 में दूसरी बार आस्त्राखन की यात्रा पर गए। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच एक उपसंधि पर हस्ताक्षर करना था, जिसके अनुसार सहमति ज्ञापन की अवधि नवम्बर 2011 तक बढ़ा दी गई। इस उपसंधि के अनुसार गुजरात और आस्त्राखन ने पाँच महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग करना शुरू किया। ये क्षेत्र थे: हाइड्रोकार्बन अनुसंधान व विकास, पोत-निर्माण व पोत-विभंजन, ईरानी रेल-समुद्री-सड़क नेटवर्क के माध्यम से गुजरात के ओखा पत्तन तथा आस्त्राखन के ओल्या पत्तन के बीच व्यापारिक मार्ग - उत्तर-दक्षिण अन्तरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे को पुनर्जीवित करना, विश्वविद्यालयी शिक्षा में दूरस्थ अध्ययन और गुजरात के नवरात्रि तथा “वाइब्रेंट गुजरात” उत्सवों में आस्त्राखन की सहभागिता वाला पर्यटन पैकेज।

दोनों बन्धु-राज्यों के बीच रिश्तों का विकास होने पर आस्त्राख़न प्रदेश के उप-राज्यपाल कंस्तांतिन मर्केलफ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल नवम्बर 2011 में गुजरात की यात्रा पर आया। दोनों पक्षों ने व्यापार, आर्थिक सहयोग बढ़ाने, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने हेतु सहयोग सम्बन्धी उपसंधि के विस्तार पत्रों पर हस्ताक्षर किए। सहयोग उपसंधि विस्तार पत्रों के आदान-प्रदान के पश्चात गुजरात की बहुत-सी कम्पनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अनेक सहमति ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। रूस की गाज़प्रोम और गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम के बीच हस्ताक्षरित सहमति समझौता इनमें एक प्रमुख समझौता था। फरवरी 2013 में अहमदाबाद-आधारित कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने आस्त्राख़न के साथ एक सहयोग करार पर हस्ताक्षर किए, जिसके अन्तर्गत आस्त्राखन प्रदेश में 15 करोड़ अमरीकी डालर की लागत से औषधि कारख़ाना बनाया जा रहा है।

 

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