हमने कभी किसी को दुश्मन नहीं बनाया और न बनाएँगे – पूतिन

संघीय सभा के नाम सम्बोधन में रूस की राष्ट्रपति की मुख्य स्थापनाएँ – भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष कोई दिखावा नहीं है, हमें दोस्तों की ज़रूरत है और हमें सेंसरशिप का उलहाना नहीं दिया जाना चाहिए।
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1 दिसम्बर को रूस की राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने संघीय सभा को सम्बोधित किया। स्रोत :Mikhail Metzel/TASS

1 दिसम्बर को रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने रूस की संघीय सभा को सम्बोधित किया। रूस के राष्ट्रपति हर साल संघीय-सभा को सम्बोधित करते हैं। अपने इस भाषण में वे हमेशा आने वाले निकट समय के लिए देश के विकास की दिशाएँ सुनिश्चित करते हैं। इस साल अपने सम्बोधन में व्लदीमिर पूतिन ने बीते वर्षों की तरह विदेश नीति की तरफ़ ध्यान केन्द्रित न करके देश की घरेलू सामाजिक नीतियों पर ज़ोर दिया। मुख्य रूप से उन्होंने अपने भाषण में रूस के आर्थिक विकास और पश्चिमी देशों के साथ सम्बन्ध सुधारने पर ज़ोर दिया।

विदेश नीति के बारे में

– हमने कभी किसी को अपना दुश्मन नहीं बनाया और न ही बनाएँगे, हमें तो दोस्तों की ज़रूरत है। हम ऐसा नहीं होने देंगे कि हमारे हितों को कोई चोट पहुँचाए। हम बाहर से  मिलने वाले किन्हीं संकेतों और सुझावों के बिना भी आत्मनिर्भर ढंग से अपना विकास कर सकते हैं। हम हर किसी के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं। 

– हम किसी से भी बातचीत करने के लिए तैयार हैं। हम सुरक्षा के  पक्ष में हैं। हम यह नहीं चाहते कि सिर्फ़ कुछ चुने हुए देशों का ही विकास हो, हम सभी देशों और उनकी जनताओं के लिए विकास की कामना करते हैं। हम अन्तरराष्ट्रीय कानूनों के पक्ष में हैं।

– हम पारस्परिक लाभ के आधार  पर अमरीका की नई सरकार के साथ सहयोग करने के  लिए तैयार हैं। दुनिया की सुरक्षा का भार हम सभी की ज़िम्मेदारी है।

– इस साल हमने गम्भीर रूप से विदेशी दबाव महसूस किया। हम पर दबाव डालने के लिए  हर तरह के तरीके अपनाए गए। रूसी हमलों की अफ़वाहें फैलाई गईं, हमारे खिलाड़ियों को भी निशाना बनाया गया। इस सिलसिले में यह बताना ज़रूरी है कि अगले साल रूस में नया डोपिंंगरोधी कार्यक्रम लागू कर दिया जाएगा। 

– हम पर सेंसर लागू करने का आरोप लगाया गया और अब ख़ुद उसी सेंसर को लेकर हाथ-पैर मार रहे हैं। 

रूस और एशियाई देशों के बीच आपसी सहयोग के विकास की बड़ी सम्भावनाएँ उपस्थित हैं। पूतिन ने बताया कि रूस की विदेश नीति की एक महत्वपूर्ण दिशा विशेष प्राथमिकता प्राप्त अपने सामरिक सहयोगी भारत के साथ विभिन्न दिशाओं में सहयोग का विकास करना होगी। पूतिन के मतानुसार, आज की कठिन परिस्थितियों में रूस और चीन के बीच सामरिक और व्यापक सहयोग वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता का एक प्रमुख तत्व है।  

अर्थव्यवस्था और प्रतिबन्धों के बारे में

– दो साल पहले अचानक हम पर प्रतिबन्ध लगाने की घोषणा कर दी गई। लेकिन हमारे यहाँ आर्थिक मन्दी का मुख्य कारण हम ख़ुद ही हैं।

– प्रतिबन्ध हमेशा के लिए नहीं लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा उपभोक्ताओं को भी बाज़ार में प्रतिस्पर्धा की ज़रूरत होती है, इसलिए इस स्थिति का हमें फ़ायदा उठाना चाहिए। .... रूस यह बर्दाश्त नहीं कर पाएगा कि हम विकास की कार्रवाइयों को बाद के लिए टाल दें।

– आज हम हथियारों के निर्यात के  मुक़ाबले कृषि मालों का निर्यात करके कहीं ज़्यादा कमाई कर रहे हैं। कभी कृषि क्षेत्र को हमारे यहाँ ’अन्धा कुआँ’ कहा जाता था, लेकिन हमें पता लग गया है कि ऐसा नहीं है। .... सन् 2015 में हमने 16 अरब 20 करोड़ डॉलर के कृषि-उत्पाद बेचे थे। इस साल कृषि से हमारी आय और भी ज़्यादा होगी।

– बढ़ता हुआ संरक्षणवाद आज एक मुख्य समस्या बन गया है। विदेशी बाज़ारों में घुसने के लिए हमें पूरी ताक़त से संघर्ष करना चाहिए।

पूतिन ने ऐसा कार्यक्रम तैयार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिस पर अमल करके 2019-2020 के साल तक सकल घरेलू उत्पाद का इतना विकास किया जा सके कि रूस सारी दुनिया को पीछे छोड़कर सबसे आगे पहुँच जाए।

व्यवसाय के विकास की परिस्थितियाँ

– 2014 में हमने व्यापारियों के लिए टैक्स के भुगतान की शर्तें अगले 4 साल के लिए तय कर दी थीं। और हमारे इस काम का व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ा है।

– व्यापारियों के काम-धन्धे की जाँच-पड़ताल का काम कम से कम किया जाएगा, इससे व्यापार को और ज़्यादा बेहतर हो जाना चाहिए... अब सबको यह ख़बर होगी कि कौन किसकी और कब जाँच-पड़ताल करेगा। ये सब सूचनाएँ पहले से ही घोषित कर दी जाएँगी।

– हर उस व्यापारी को, जो ईमानदारी से अपना धन्धा कर रहा है, यह महसूस होना चाहिए कि सरकार और समाज उसके हक़ में है। लोगों के अधिकारों को भंग करने वाली और उनकी सम्भावनाओं को सीमित करने वाली सभी गतिविधियाँ अनुचित हैं।

भ्रष्टाचार के बारे में

राष्ट्रपति ने ज़ोर दिया कि ज़्यादातर सरकारी अधिकारी ईमानदार और सच्चरित्र हैं, जो अपने देश की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।

– किसी अधिकारी का पद और उसके द्वारा अतीत में प्राप्त की गई उपलब्धियाँ उसके बचाव के लिए छतरी का काम नहीं कर सकती हैं। लेकिन जब तक अदालत अपना फ़ैसला नहीं दे देती है, कोई भी यह नहीं कह सकता है कि अधिकारी दोषी है या नहीं।

– मैं यह याद दिलाना चाहता हूँ कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाई जा रही लड़ाई कोई दिखावा नहीं है। आदमी को अपने काम में पूरी तरह से पेशेवर होना चाहिए। .... दुर्भाग्य से हमारे यहाँ भ्रष्टाचार के मामले पकड़े जाने पर मीडिया बहुत ज़्यादा शोर मचाता है, और इसके लिए जाँच अधिकारियों को और कानून रक्षा संस्थाओं को ही दोषी ठहराने लगता है। 

सेंसरशिप के बारे में

– अगर कोई आदमी ख़ुद को अधिक विकसित और अधिक बुद्धिमान समझता है - तो उसे दूसरे लोगों के प्रति भी इज़्ज़त से पेश आना चाहिए। समाज में उठने वाले सवालों पर ... किसी भी तरह की हमलावर प्रतिक्रिया सहन नहीं की जाएगी। संस्कृति के क्षेत्र में, राजनीति में, मीडिया में और अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई बहसों में कोई भी अपना नज़रिया खुलकर व्यक्त कर सकता है और किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह उस नज़रिए को अभिव्यक्त होने से रोके।

नागरिक समाज और उसके मूल्यों के बारे में

– देश में लोकतन्त्र की ओर बढ़ते क़दमों को आगे भी जारी रखा जाएगा।

– हमारी सारी नीतियाँ और नज़रिए लोगों का बचाव करने के लिए ही हैं। इसलिए हम अपने परम्परागत मूल्यों और परिवार की सुरक्षा को बनाए रखने की कोशिश करेंगे और इसके लिए जमकर काम करेंगे।

– हमारे ज़माने की ख़ासियत यह होगी कि हमारी जनता समाज की भलाई में लगी होगी। लोग सच्चे मन से, निस्वार्थ ढंग से अपने दिल की बात मानेंगे और एक-दूसरे की सहायता करेंगे।

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