रूस के प्रधानमन्त्री दिमित्री मिदवेदफ़ ने पत्रकारों से मुलाक़ात की, क्या बात की?

रूस के प्रधानमन्त्री दिमित्री मिदवेदफ़ ने हर साल की तरह इस साल भी हाल ही में रूस के टीवी पत्रकारों से मुलाक़ात की और रक्षा, व्यापार, राजनीति से लेकर भ्रष्टाचार और अपने मन्त्रिमण्डल के गिरफ़्तार किए गए मन्त्री तक हर सवाल पर बातचीत की।
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रूस के प्रधानमन्त्री दिमित्री मिदवेदफ़। स्रोत :Reuters

रक्षा के लिए बढ़े अनुदान

— रूस आज भी अमरीका के बाद दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। इस साल रूस को हथियारों का निर्यात करके 17 अरब डॉलर की आय हुई है। हम शान्ति की कितनी भी कामना क्यों न करें, दुनिया भर में हथियारों की ख़रीद बढ़ती जा रही है और रूस भी नए से नए हथियार बनाकर पेश कर रहा है।

— हम इसे इस तरह से लेते हैं कि रूसी हथियारों के डिजाइनर सिर्फ़ रूसी सेना के लिए ही हथियार नहीं बनाते, बल्कि वे हमारे पूरे देश की ही सेवा करते हैं। हम जानते हैं कि हम किस दुनिया में रह रहे हैं। मेरा ख़याल है कि रूस के नागरिक इस बात का ऊँचा मूल्यांकन करते हैं कि देश में स्थिति स्थिर हैं, हमारी सीमाएँ सुरक्षित हैं और हमारे यहाँ वे सब घटनाएँ नहीं घट रही हैं, जैसी घटनाएँ पश्चिमी एशिया और यूरोप में घट रही हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी टीम

— हमारा मानना है कि अमरीका के साथ हमारे रिश्ते इतनी बुरी तरह से ख़राब होने के लिए अमरीका ख़ुद ही दोषी है। हमने तो रिश्तों को ख़राब करने की कोशिश की नहीं थी। हमारे बीच रिश्तों के विकास की बहुत अच्छी सम्भावनाएँ थीं। हमारा ख़याल था कि भविष्य में रिश्ते अच्छे हो जाएँगे। लेकिन अमरीका ने तो हमारे रिश्तों की नींव को ही तोड़-फोड़ डाला है।

— परन्तु अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर हमारे बीच सम्पर्क फिर भी बना रहेगा। जहाँ तक अर्थव्यवस्था की बात है तो यह ज़रूरी नहीं कि अमरीका और रूस के बीच आपस में सहयोग हो ही। अमरीका के साथ आज जो 25-30 अरब डॉलर का वार्षिक व्यापार होता है, वह ऊँट के मुँह में ज़ीरे के बराबर है।

— देखिए, क्या हुआ। उनके यहाँ आज एक ऐसा व्यक्ति राष्ट्र प्रमुख चुन लिया गया है, जिसने एक दिन भी राजनीति नहीं की। ये नए लोगों की टीम है और सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये लोग लकीर के फकीर नहीं हैं और सिर्फ़ विरोध करने के लिए ही रूस का विरोध नहीं करेंगे। ये सभी लोग एकदम नए सिरे से काम शुरू कर रहे हैं और यह हमारे लिए बुरा नहीं है।

निजीकरण के बारे में

— यह महत्वपूर्ण नहीं है कि रूस की सरकारी कम्पनियाँ कौन ख़रीद रहा है। सबसे ज़रूरी बात तो यह है कि ख़रीददार उनकी पूरी-पूरी क़ीमत दे रहा है।

— पिछली सदी के आख़िरी दशक में निजीकरण के बहुत से सौदे उचित ढंग से नहीं किए गए थे। उनमें बहुत गड़बड़ियाँ थीं। पर इसका यह मतलब नहीं है कि वे सौदे ही ग़ैरकानूनी थे। लेकिन आज वह ज़माना गुज़र चुका है, अब उसकी ओर वापिस लौटना सम्भव नहीं है।

— ’रोसनेफ़्त’ के निजीकरण के लिए किया गया सौदा इस साल दुनिया के तेल उद्योग का सबसे बड़ा सौदा है... । जापानी लोग भी ’रोसनेफ़्त’ में हिस्सेदार बनना चाहते थे। दक्षिणी कोरिया भी ’रोसनेफ़्त’ के शेयर ख़रीदना चाहता था, लेकिन समय पर जो हुआ, वो ठीक ही हुआ। अगर कोई पैसा बाद में देना चाहता था तो उसकी यह शर्त हमें मंज़ूर नहीं थी।

भ्रष्टाचार और केन्द्रीय मन्त्री की गिरफ़्तारी

— रिश्वत लेते हुए केन्द्रीय आर्थिक मन्त्री की गिरफ़्तारी बेहद खेदजनक घटना रही। यह बात मेरी तो समझ में ही नहीं आ रही कि कोई मन्त्री स्तर का उच्चाधिकारी कैसे इतना नीचे गिर सकता है?

— किसी मन्त्री की भ्रष्टाचार के अभियोग में गिरफ़्तारी एक शो में नहीं बदलनी चाहिए। लेकिन ऐसे मन्त्रियों को हटाना ज़रूरी है। यह शो आगे नहीं चलना चाहिए। शो मस्ट नॉट गो ऑन। 

— भ्रष्टाचार विरोधी यह अभियान दिखावे के लिए नहीं चलाया गया है। यह चुनाव पूर्व की गई कोई दिखावे की कार्रवाई भी नहीं है। समय कोई भी हो, मौसम कैसा भी हो, अधिकारियोंं को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी ही चाहिए और ग़लत कामों के लिए उनकी जवाबदेही बनती ही है। हम आगे भी इसी लाइन पर काम करते रहेंगे।

डोपिंग स्कैण्डल के बारे में

— मैं तो तक यह नहीं समझ पाया कि ये श्रीमान मैकलारेन कौन हैं और किस स्तर के अधिकारी हैं। ज़रा, उनकी आख़िरी रिपोर्ट उठाकर देखिए, वे उसमें क्या कह रहे हैं। उन्होंने लिखा है — मुझे इस बात का पूरा-पूरा विश्वास है कि अक्तूबर 2016 तक रूस के खेलमन्त्री रहे विताली मुत्को पूरी तरह से डोपिंग के इस्तेमाल से जुड़े हुए थे। लेकिन कुछ ही पंक्तियों के बाद उन्होंने लिखा है

— मेरा पास इसका कोई सबूत नहीं है। यह भला, किस ढंग की रिपोर्ट हुई?

— इस तरह की बात करना कि रूस में खिलाड़ियों के लिए सरकारी स्तर पर डोपिंग का सेवन करने का कोई कार्यक्रम बना हुआ है, यह बात सुनकर ही हँसी आती है, क्योंकि यह बात सच नहीं है।

— डोपिंग रोधी अभियान रूस विरोधी अभियान में बदल गया है... क्या हमें दोषी ठहराने के कोई कारण हैं? हाँ, कारण हैं। क्या दूसरे देशों को दोषी बताने के कारण हैं? हाँ हैं। लेकिन सारा विरोधी अभियान तो सिर्फ़ हमारे देश के विरुद्ध ही चलाया जा रहा है।

— बॉबस्ले विश्व चैम्पियनशिप प्रतियोगिता के आयोजन की जगह अभी अचानक क्यों बदल दी गई? यह ठीक है कि उन्हें ऐसा करने का अधिकार है, लेकिन इसी समय उन्होंने अपने इस अधिकार का इस्तेमाल क्यों किया? क्या पहले वातावरण कुछ दूसरा था? क्या बच्चों जैसी बात करते हैं कि वातावरण दूसरा था? हमारे बीच एक अनुबन्ध है, जो हमारी बॉबस्ले फ़ेडरेशन को अन्तरराष्ट्रीय बॉबस्ले फ़ेडरेशन से जोड़ता है। मैंने इसकी जाँच की है, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी कोई गम्भीर ज़िम्मेदारी नहीं है। मेरा मानना है कि अनुबन्ध इस तरह की भाषा में लिखा जाना चाहिए कि सामने वाला इस तरह से अनुबन्ध भंग करने से पहले अपनी ज़िम्मेदारी के बारे में कम से कम दस बार सोचे।

रूस पर लगाए गए प्रतिबन्धों के बारे में

— यह बड़ी ख़राब कथा है, और इस कथा को अब बन्द करने की ज़रूरत है।

— प्रतिबन्धों से सभी को नुक़सान होता है, लेकिन हमने तो यह अभियान शुरू किया नहीं था। अचानक हमारे सहयोगी देशों को लगा कि प्रतिबन्ध लगाकर वे रूस को झुका लेंगे और अपनी शर्तें मनवा लेंगे। उन्होंने बार-बार यह तरीका आजमाने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।

— आने वाले सालों में हम खाद्य-पदार्थों के क्षेत्र में शत-प्रतिशत अपनी ज़रूरतें ख़ुद पूरी करने लगेंगे और यूरोपीय देश, ख़ासकर बाल्टिक सागर के तटवर्ती देशों को इसका भारी नुक़सान उठाना पड़ेगा।

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