मास्को में अन्तर-अफ़ग़ान सुलह के सवाल पर छह देशों की बैठक हुई

16 फ़रवरी 2017 आनुष्का सेठी
भारत के विदेश मन्त्रालय में पाक-अफ़ग़ान-ईरान से जुड़े मामले देखने वाले संयुक्त सचिव गोपाल बागले ने इस बैठक में भारत की तरफ़ से भाग लिया। रूस की मेजबानी में हुई अफ़ग़ानिस्तान सम्बन्धी इस बैठक में भाग लेने वाले चीन, ईरान और पाकिस्तान सहित सभी छह देश काबुल में सरकार की भूमिका को ही प्रमुखता देने पर सहमत हो गए हैं।
Gani and Putin
सन् 2015 में रूसी नगर उफ़ा में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन के बीच मुलाक़ात हुई। स्रोत :Kremlin.ru

15 फ़रवरी को रूस के विदेश मन्त्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी करके यह सूचना दी है कि अफ़ग़ानिस्तान के सवाल पर मास्को में हुई छह देशों की बैठक में इस बात पर सहमति हो गई है कि अफ़ग़ानिस्तान के भीतर सभी पक्षों के बीच आपसी सुलह कराने की कोशिश की जानी चाहिए।

रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन के अफ़ग़ानिस्तान सम्बन्धी विशेष दूत ज़मीर काबुलफ़ के नेतृत्व में हुई इस बैठक में रूस, अफ़ग़ानिस्तान, भारत, चीन, ईरान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

भारत के विदेश मन्त्रालय में पाक-अफ़ग़ान-ईरान से जुड़े मामले देखने वाले संयुक्त सचिव गोपाल बागले ने इस बैठक में भारत की तरफ़ से भाग लिया। 

पूरे दिन चली इस बैठक में भाग लेने वाले देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय नज़रियों से जुड़े सवालों पर चर्चा की।

रूस के विदेश मन्त्रालय द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है — अफ़ग़ान विद्रोहियों को भी शान्तिपूर्ण जीवन बिताने की सम्भावना देने के सिद्धान्त को स्वीकार करते हुए बैठक में भाग लेने वाले सभी देश अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्षों के बीच सुलह कराने के लिए काबुल सरकार को अग्रणी भूमिका सौंपने पर सहमत हो गए हैं।   

रूस के विदेश मन्त्रालय ने कहा है — अफगानिस्तान में स्थिति को स्थिर करने के लिए क्षेत्रीय प्रयासों को विकसित करने की ज़रूरत है। अगले दौर में मध्य एशिया के देशों को भी इसमें सहयोग करना होगा। तब इस तरह की बैठकों में भाग लेने वाले देशों की संख्या भी बढ़ जाएगी और मध्य एशिया के देशों के प्रतिनिधि भी आगे होने वाली बैठकों में हिस्सेदारी करेंगे।  

अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मन्त्रालय ने इस बैठक को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक क़दम बताया है।

बैठक से पहले अफ़ग़ानिस्तान और भारत के मीडिया में इस तरह की झूठी ख़बरें छपी थीं कि मानो रूस तालिबान से गुप्त बातचीत कर रहा है। इन ख़बरों को पढ़कर दोनों देशों में चिन्ता जाहिर की गई थी।
विगत 7 फ़रवरी को रूस के विदेशमन्त्री सिर्गेय लवरोफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान के विदेशमन्त्री सलाहुद्दीन रब्बानी से कहा था कि रूस अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद की निन्दा करता है और काबुल की वर्तमान सरकार का पूरी तरह से समर्थन करता है।

लवरोफ़ ने रब्बानी से कहा था कि रूस और अफ़ग़ानिस्तान बहुत पुराने सहयोगी हैं और सुरक्षा, मानवीय और आर्थिक क्षेत्रों में आगे भी सहयोग करने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने कहा था— अफ़ग़ानिस्तान की परिस्थिति को स्थिर करने के लिए तथा आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में हम अफ़ग़ान सरकार द्वारा की जा रही कोशिशों का पूरा-पूरा समर्थन करते हैं।

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