भारत-रूस-चीन त्रिपक्षीय रक्षा बैठक में भाग लेने से चीन ने इनकार किया

पाकिस्तान और दलाई लामा को लेकर चीन और भारत के बीच हुई गरमा-गरमी के बाद चीन ने उस त्रिपक्षीय मुलाक़ात में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है, जिसमें चीन, रूस और भारत के रक्षामन्त्रियों को शामिल होना था।
Indra
रूस चीन और भारत के साथ त्रिपक्षीय रक्षा सहयोग करने के लिए उत्सुक है।

12 अप्रैल को रूस और भारत सरकार के क़रीबी सूत्रों ने रूस-भारत संवाद को बताया कि चीन ने मस्क्वा (मास्को) में आयोजित रक्षामन्त्रियों की उस त्रिपक्षीय बैठक में भाग लेने के रूस के अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें भारत के रक्षामन्त्री को भी हिस्सा लेना था।

यह बैठक अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा पर मस्क्वा सम्मेलन से एक दिन पहले यानी आगामी 25 अप्रैल को रूस की राजधानी में आयोजित की जानी थी। इस बैठक में रूस के रक्षामन्त्री के अलावा चीन के रक्षा मंत्री चांग वंकन और भारत के रक्षामन्त्री अरुण जेटली को भी भाग लेना था।

रूस और भारत की सरकारों के सूत्रों ने ’इकोनॉमिक टाइम्स’ द्वारा प्रकाशित इस सूचना की पुष्टि कर दी है कि चीन ने रूस के अनुरोध को ठुकरा दिया है।

अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर भारत के रक्षा मन्त्रालय के एक अधिकारी ने कहा — पाकिस्तान और चीन के बीच गहरे रिश्ते होने के बावजूद हम इस बैठक में भाग लेने के लिए तैयार थे। हमारे सहमत होने के बाद रूस ने हमें सूचित किया कि चीन ने बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया है।

रूस, भारत और चीन विदेशमन्त्रियों के स्तर पर वार्षिक त्रिपक्षीय बैठकें करते रहे हैं, जिन्हें आरआईसी (रिक) या रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय मुलाक़ातें कहा जाता है। 

रूस के विदेश मन्त्रालय के एक अधिकारी ने कहा — हमारे नेतृत्व में रूस-भारत-चीन (यानी रिक) दल अभी तक ठीक-ठाक काम कर रहा था। रूस इन मुलाक़ातों का विस्तार करना चाहता था। लेकिन भारत और चीन के बीच दिखाई दे रहे तनाव के इस माहौल में आगे इसे चला पाना मुश्किल लग रहा है।

रूस के पूर्व प्रधानमन्त्री येव्गेनी प्रिमकोफ़ ने, जिनका 2015 में निधन हो गया, सबसे पहले रूस, भारत और चीन के बीच एक गठबन्धन बनाने का प्रस्ताव रखा था। फिर 2013 में भारत के नेताओं से अपनी वार्षिक मुलाक़ात के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था।

भारत-चीन तनाव

आपस में बड़े स्तर पर व्यापार कर रहे भारत और चीन के बीच आपसी दुपक्षीय समस्याओं को लेकर राजनयिक रिश्ते बिगड़ गए हैं।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर भारत ने अपनी नाराज़गी जाहिर की है और कहा है कि यह गलियारा उस इलाके से गुज़रता है, जिसे भारत अपना इलाका मानता है। चीन ने भी, रूस के अनुरोध के बावजूद, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल होने की भारत की कोशिशों में बाधा पहुँचाई है।

इससे पहले चीन ने सँयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी गिरोह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना अजहर मसूद,को वैश्विक आतंकवादियों की काली सूची में शामिल कराने के भारत के प्रयास में भी बाधा पहुँचाई थी और भारत ऐसा करने में नाकाम रहा था।

विगत 5 अप्रैल को चीन ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को अरूणाचल प्रदेश के तवांग मठ का दौरा करने की अनुमति देने के लिए भारत के सामने तीखा विरोध किया था। चीन का कहना है कि स्विट्जरलैंड से भी बड़ा अरुणाचल प्रदेश चीनी भूमि का हिस्सा है और चीन उसे दक्षिणी तिब्बत कहता है। 

रूस के विदेश मन्त्रालय के एक अधिकारी ने कहा — अपने चीनी और भारतीय मित्रों  को एक-दूसरे के करीब लाकर हम बहुत ख़ुश होंगे, लेकिन पाकिस्तान के साथ जुड़ी हुई जटिलताओं की वजह से हमारा  यह अभियान मुश्किल हो गया है।

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