नेताजी सुभाषचन्द्र बोस कभी रूस नहीं आए

रूस की सरकार ने 1992 और 1995 में दो बार मास्को स्थित भारतीय दूतावास को यह जानकारी दी है कि रूस के पास सुभाषचन्द्र बोस के 1945 में या इसके बाद कभी भी सोवियत संघ पहुँचने का कोई रिकार्ड नहीं है।
Subhash Chandra Netaji Bose top
सन् 1941 में बर्लिन में भाषण देते नेताजी सुभाषचन्द्र बोस। स्रोत :Getty Images

विगत 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को उनकी 119 वीं जयन्ती पर श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने नेताजी से जुड़ी कुछ गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया ताकि उनके रहस्यमय ढंग से लापता हो जाने पर कुछ रोशनी पड़ सके। 

इससे पहले विगत 14 अक्तूबर को नेताजी के परिजनों से मुलाक़ात करने के बाद ट्वीटर में अपने कुछ सन्देशों में मोदी ने लिखा था कि उनकी सरकार उन फ़ाइलों को सार्वजनिक कर देगी, जो सरकार के पास हैं। मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और अन्य सभी देशों की सरकारों से यह अनुरोध करेगी कि वे अपने पास उपस्थित नेता जी से जुड़ी सभी फ़ाइलों को सार्वजनिक रूप से मुहैया करवाएँ। 

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने तब यह भी कहा था कि वे आगामी दिसम्बर में अपनी रूस-यात्रा के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन से भी यह अनुरोध करेंगे कि रूस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से जुड़ी गोपनीय फ़ाइलों को सार्वजनिक कर दे।

हमें नहीं मालूम कि मोदी ने पूतिन से इस तरह का कोई अनुरोध किया या नहीं और अगर उन्होंने पूतिन से इस सिलसिले में बात की तो व्लदीमिर पूतिन ने उन्हें क्या जवाब दिया। लेकिन ब्रिटेन की एक वेबसाइट ’बोसफ़ाइल्स’ ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस 1945 में या इसके बाद कभी भी रूस में या पूर्व सोवियत संघ में नहीं रहे थे।

नेताजी की मौत के बारे में सच्चाई को सामने लाने के लिए लंदन में यह वेबसाइट बनाइ गई है। भारत में कुछ लोग आज भी इस तरह की अटकलें लगाते हैं कि 18 अगस्त 1945 को ताईपेह में हुई विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत नहीं हुई थी बल्कि वे उस दुर्घटना में बच गए थे और बाद में सोवियत संघ चले गए थे।

वेबसाइट बोसफाइल्स डॉट इनफो ने बताया है कि रूस की सरकार ने 1992 और 1995 में दो बार मास्को स्थित भारतीय दूतावास को यह जानकारी दी है कि रूस के पास सुभाषचन्द्र बोस के 1945 में या इसके बाद कभी भी सोवियत संघ पहुँचने का कोई रिकार्ड नहीं है। 

16 सितम्बर 1991 को पहली बार मास्को स्थित भारतीय दूतावास ने रूस के विदेश मन्त्रालय को पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी माँगी थी। रूस के विदेश मन्त्रालय ने 8 जनवरी 1992 को इस पत्र का जवाब देते हुए लिखा था कि रूस के किसी भी अभिलेखागार में सुभाषचन्द्र बोस से जुड़ी कोई फ़ाइल या कोई जानकारी नहीं है। 

फिर 27 जुलाई 1995 को भारतीय दूतावास ने रूस के विदेश मन्त्रालय से भारत में प्रकाशित एक क़िताब के हवाले से नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के सोवियत संघ पहुँचने के बारे में दी गई जानकारी की पुष्टि करने का अनुरोध किया था। इस पत्र का उत्तर देते हुए 27 अक्तूबर 1995 को रूस के विदेश मन्त्रालय ने एक बार फिर यह बात कही थी कि रूसी अधिकारियों ने रूस के सरकारी काग़ज़ों और फ़ाइलों का विस्तार से अध्ययन किया है और रूसी अभिलेखागारों में भी खोज कराई है, लेकिन सुभाषचन्द्र बोस के सोवियत संघ में घुसने या सोवियत संघ में रहने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है।

नेताजी के पोते और बोसफाइल्स डॉट इनफो  नामक वेबसाइट चलाने वाले आशीष रे ने अब भारत सरकार द्वारा जारी फ़ाइलों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार के फाइलों के सार्वजनिक किए जाने से इस बात की पुष्टि हो गई है कि 18 अगस्त 1945 को हुई विमान दुर्घटना में नेताजी की म्रुत्यु हो गई थी। 

आशीष रे ने कहा कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जारी की गई 100 फाइलों के 1600 पन्नों में में ऐसा कुछ भी नहीं है यह सिद्ध कर सके कि नेताजी 18 अगस्त 1945 के बाद भी जीवित थे। 

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