23 फ़रवरी : रूस में पुरुष दिवस

23 फ़रवरी को रूस में पुरुष दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ पुरुषों को उपहार देती हैं और उनके प्रति अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त करती हैं। वैसे तो रूस में 23 फ़रवरी का दिन ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, लेकिन यदि पुरुष सेना में काम नहीं भी करते हैं तो भी महिलाएँ उन्हें देश का रक्षक मानती हैं और उन्हें शुभकामनाएँ और उपहार देती हैं।
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23 फ़रवरी को रूस में ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ मनाया जाता है। स्रोत :mil.ru

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस रूस में पश्चिमी देशों से आया है, जबकि ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ पूरी तरह से रूस का ही आविष्कार है। ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ मनाने के लिए 23 फ़रवरी की तारीख़ ही क्यों चुनी गई, इस बारे में आज भी रूस के लोग एकमत नहीं हैं। सरकारी नज़रिए के अनुसार, जो पिछली सदी के तीसरे दशक में सोवियत संघ में तय किया गया था, 1918 में 23 फ़रवरी के दिन ही लाल सेना ने प्स्कोफ़ और नारवा के पास जर्मन सेना को बुरी तरह से हराया था।

लेकिन बाद में जब इतिहासकारों ने इस तथ्य की जाँच करनी चाही, तो उन्हें ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं मिला, जो इस तथ्य की पुष्टि करता हो और उन्होंने पुरालेखों के आधार पर बताया कि 23 फ़रवरी 1918 की शाम को जर्मन सेनाएँ प्स्कोफ़ से 55 किलोमीटर दूर और नारवा से 170 किलोमीटर दूर थीं और उस दिन जर्मन सेना और लाल सेना के बीच कोई युद्ध नहीं हुआ था। लेकिन क़रीब 20 साल के भीतर-भीतर सोवियत संघ के लोग इस ’मिथक’ पर विश्वास करने लगे थे। महान् देशभक्तिपूर्ण युद्ध यानी द्वितीय विश्वयुद्ध के दिनों में तो 23 फ़रवरी का दिन पूरे सोवियत संघ में व्यापक रूप से इसीलिए मनाया जाता था कि इस दिन लाल सेना ने जर्मन सेना को पहली बार युद्ध में हराया था।

तब से लेकर आज तक यह दिवस’23 फ़रवरी को ही मनाया जाता है। लेकिन इस दिवस का नाम अब तक कई बार बदला जा चुका है। 1949 तक 23 फ़रवरी के दिन सोवियत संघ में लाल सेना दिवस मनाया जाता था। फिर 1949 से 1993 तक 23 फ़रवरी को सोवियत जनता ’सोवियत सेना दिवस’ और ’नौसैनिक दिवस’ के रूप में मनाती थी। बाद में 23 फ़रवरी को रूसी सेना दिवस मनाया जाने लगा। लेकिन दो साल बाद ही इस दिवस का नाम फिर से बदल दिया गया और इसे  ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ कहा जाने लगा। 

सोवियत संघ के पतन के बाद सोवियत संघ से अलग हुए ज़्यादातर देशों में 23 फ़रवरी का दिन मनाया जाना बन्द कर दिया गया। आजकल सिर्फ़ रूस, बेलारूस, उक्रईना और किर्गिज़िस्तान में ही 23 फ़रवरी का दिन धूमधाम से मनाया जाता है।

हालाँकि 23 फ़रवरी को मनाए जाने वाले इस दिवस का अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस से कोई सम्बन्ध नहीं है, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ रूसी जनता के अवचेतन में यह बात बैठ गई है कि 23 फ़रवरी के दिन ’पुरुष दिवस’ होता है। इस तरह 8 मार्च को पूरे रूस में ’महिला दिवस’ मनाया जाता है और 23 फ़रवरी को ’पुरुष दिवस’।

रूस के पुरुषों को यह मालूम ही नहीं है कि दुनिया 19 नवम्बर को अन्तरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाती है। आज के रूस में  ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ ही पुरुष दिवस बन गया है क्योंकि इस दिन महिलाएँ हर पुरुष को शुभकामनाएँ और उपहार देती हैं, चाहे वह पुरुष सेना में काम करता है या नहीं और वह वास्तव में अपनी मातृभूमि की रक्षा करता है या नहीं।

हालाँकि सरकारी स्तर पर परम्परागत रूप से यह दिन आज भी सैन्य शैली में ही मनाया जाता है। रूस के बहुत से शहरों में इस दिन परेड और जुलूस निकाले जाते हैं तथा संगीत कार्यक्रमों और नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मस्क्वा (मास्को) में तो  ’मातृभूमि रक्षक दिवस’ के अवसर पर समारोही आतिशबाज़ी भी की जाती है।

8 मार्च की तरह यानी अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की तरह 23 फ़रवरी को भी यानी पुरुष दिवस के दिन भी उपहार देने की परम्परा है। हालाँकि जन-सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि ज़्यादातर पुरुष इस दिन कोई कलात्मक उपहार पाना चाहते हैं या अपनी कार में टांगने के लिए कोई इत्र पाना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि पुरुषों को ज़्यादातर औरतें इस दिन मोजे भेंट करती हैं या शेविंग सेट और स्नान प्रसाधन उपहार में देती हैं।

इसलिए इस अनौपचारिक पुरुष दिवस को लोग मज़ाक में ’शेविंग क्रीम या शेविंग फ़ोम’ दिवस भी कहते हैं। पिछले कुछ समय से कुछ पुरुषों ने तो इस अवसर पर विरोध करना भी शुरू कर दिया है और 23 फ़रवरी से पहले वे ख़ुद ही अपने लिए ’शेविंग क्रीम और शेविंग प्रसाधन’ ख़रीदने लगे हैं ताकि  महिलाएँ यह देखकर भौंचक्की रह जाएँ और कोई दूसरा उपहार ख़रीदकर लाएँ।

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