अन्तरिक्ष में जाने वाली पहली महिला वलिन्तीना तिरिशकोवा

आज 6 मार्च को सारी दुनिया अन्तरिक्ष में जाने वाली पहली महिला वलिन्तीना तिरिशकोवा की 80 वीं जयन्ती मना रही है।
Valentina Tereshkova
विश्व की पहली महिला अन्तरिक्ष यात्री वलिन्तीना तिरिशकोवा। स्रोत :RIA-Novosti

वह 16 जून 1963 का दिन था, जब पृथ्वी से पहली महिला अन्तरिक्ष-यात्री को लेकर अन्तरिक्ष-यान ’वस्तोक-6’ ने अन्तरिक्ष की ओर उड़ान भरी थी। तीन दिन की अपनी इस अन्तरिक्ष-यात्रा के दौरान ’चाइका’ (गंगाचिल्ली) ने ज़मीन के 48 चक्कर लगाए थे और 15 लाख किलोमीटर की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान तिरिशकोवा से सम्पर्क करने के लिए उन्हें ’चाइका’ नाम दिया गया था, और हर सम्पर्क-सत्र के दौरान उन्हें ’चाइका’ कहकर बुलाया जा रहा था। वलिन्तीना  तिरिशकोवा की उम्र तब 26 साल की थी। उनका जन्म बेलारूस से रूस के यरास्लाव्ल नगर में आकर बसे एक किसान परिवार में हुआ था।

वलिन्तीना ने प्राइवेट तौर पर पढ़ाई करते हुए और नौकरी करते हुए आकाश में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था। वे एक एयरक्लब की सदस्य बन गई थीं और तब तक पैराशूट से 163 छलांगें लगा चुकी थीं। सोवियत अन्तरिक्ष यात्रियों की प्रारम्भिक सफल उड़ानों के बाद सोवियत अन्तरिक्ष विज्ञान के पितामह सिर्गेय कराल्योफ़ के मन में विचार आया कि अन्तरिक्ष में किसी स्त्री को भी भेजा जाए। इसके लिए सोवियत संघ के तत्कालीन राष्ट्रपति निकिता ख़्रुषोफ़ की सहमति मिलने के बाद अन्तरिक्ष यात्रा का प्रशिक्षण देने के लिए किसी महिला की तलाश शुरू हो गई। देश भर के हवाई क्लबों से सम्पर्क किया जाने लगा। कुल 5 लड़कियों को प्रशिक्षण के लिए चुना गया, जिनमें वलिन्तीना तिरिशकोवा भी एक थीं।

उन दिनों अन्तरिक्ष यात्रियों को बड़ा कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था। तिरिशकोवा ने याद करते हुए बताया — पाँच लड़कियों के हमारे ग्रुप के ऊपर भारी बोझ आ पड़ा था। उड़ान का पूरा कार्यक्रम पूरी तरह से गुप्त रखा जा रहा था। वलिन्तीना तिरिशकोवा की माँ को भी यह जानकारी अख़बारों से ही हुई कि उनकी बेटी अन्तरिक्ष में घूम रही है।

यान के डिजाइनर आपस में बात करते हुए ’वस्तोक’ अन्तरिक्ष-यान के यात्री-केबिन को ’हवाबन्द डिब्बा’ कहा करते थे। उसका यात्री केबिन इतना छोटा था कि अन्तरिक्ष पोशाक पहनने के बाद जब अन्तरिक्ष यात्री इस केबिन में बैठ जाता था तो उसे हाथ-पैर हिलाने-डुलाने में भी तकलीफ़ होती थी। तब तक चिकित्सकों को यह भी नहीं मालूम था कि अन्तरिक्ष में बिना हिले-डुले तीन दिन बिताने का किसी भी औरत के शरीर पर क्या असर पड़ेगा। 

रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने वलिन्तीना तिरिशकोवा को जन्मदिन के अवसर पर बधाई दी। / Kremlin.ruरूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने वलिन्तीना तिरिशकोवा को जन्मदिन के अवसर पर बधाई दी। / Kremlin.ru

16 जून 1963 को हमारी पृथ्वी के करोड़ों लोगों ने यह सुना कि कैसे तिरिशकोवा से ’चाइका-चाइका’ कहकर बात की जा रही है। लेकिन जिस अन्तरिक्ष उड़ान से वलिन्तीना तिरिशकोवा सारी दुनिया में मशहूर हो गईं, वह उड़ान एक दुर्घटना, एक त्रासदी के रूप में भी बदल सकती थी। अपनी उड़ान पूरी होने के बरसों बाद तिरिशकोवा ने बताया — अन्तरिक्ष यान के प्रोग्राम में ग़लत जानकारी भर दी गई थी। यान में नीचे उतरने की जगह अन्तरिक्ष में और ज़्यादा ऊपर उड़ने की स्वचालित प्रणाली सुनिश्चित कर दी गई थी। इसका कुपरिणाम यह होता कि मैं पृथ्वी पर उतरने की जगह अन्तरिक्ष में और ऊपर उड़ जाती और फिर कभी पृथ्वी पर न लौट पाती। लेकिन मैंने समय पर ही यह बात नोट कर ली और पृथ्वी पर उपस्थित विशेषज्ञों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने समय रहते अन्तरिक्ष यान की प्रणाली ठीक कर दी और मेरा अन्तरिक्ष यान पृथ्वी पर उतर आया।

अपनी अन्तरिक्ष उड़ान पूरी करने के बाद भी वलिन्तीना ने अपना प्रशिक्षण आगे जारी रखा। लेकिन उनका बहुत-सा समय सामाजिक कार्यों में निकल जाता था। इस तरह उनकी वह पहली अन्तरिक्ष उड़ान ही उनकी अन्तिम अन्तरिक्ष उड़ान भी साबित हुई। फिर 1968 में महिला अन्तरिक्ष यात्रियों के पहले दल को समाप्त कर दिया गया। 22 जून 1963 को सोवियत संसद के अध्यक्षमण्डल के आदेश पर अन्तरिक्ष उड़ान के दौरान साहस और वीरता प्रदर्शित करने के लिए अन्तरिक्ष यात्री वलिन्तीना व्लदीमिरव्ना तिरिशकोवा को सोवियत संघ के वीर की उपाधि, लेनिन पदक और ’स्वर्ण सितारा’ मेडल देकर सम्मानित किया गया।

अपनी उस प्रसिद्ध अन्तरिक्ष उड़ान के पाँच महीने बाद तिरिशकोवा ने अन्तरिक्ष यात्री अन्द्रिआन निकलायेफ़ से विवाह कर लिया। उस समय तक वे अन्तरिक्ष में चार दिन की लम्बी अवधि बिताने वाले अकेले अन्तरिक्ष यात्री थे और जो खुले अन्तरिक्ष में भी चहलक़दमी कर चुके थे।

तिरिशकोवा को न केवल रूस और सोवियत संघ में सम्मानित किया गया, बल्कि अन्य देशों ने भी उन्हें कई तरह से सम्मानित किया। अपने गृहनगर यरस्लाव्ल में उन्हें ’शहर की मानद नागरिक’ चुना गया। दुनिया के बहुत से शहरों ने उन्हें अपना-अपना ’सम्मानित’ निवासी घोषित किया। पिछले वर्ष सितम्बर में हुए चुनावों में वलिन्तीना तिरिशकोवा रूस की सत्तारूढ़ पार्टी ’एकजुट रूस’ की तरफ़ से सांसद बनी हैं और आज वे संसद सदस्य के रूप में अपना 80 वाँ जन्मदिन मना रही हैं। रूस-भारत संवाद की तरफ़ से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ। वे स्वस्थ रहें, सकुशल रहें और लम्बे समय तक सक्रिय रहें, यही कामना है।

अन्तरिक्ष में जाने वाली रूसी महिलाएँ

अन्तरिक्ष विज्ञान से जुड़े रूस के पूरे इतिहास में अभी तक सिर्फ़ 18 महिलाओं को अन्तरिक्ष उड़ान का प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से सिर्फ़ चार महिलाओं ने अन्तरिक्ष में उड़ान भरी है। वलिन्तीना तिरिशकोवा के अलावा अन्तरिक्ष में जाने वाली अन्य रूसी महिलाएँ हैं — स्वितलाना स्वीत्स्कया, येलेना कन्दकोवा और येलेना सिरोवा। इन सभी ने अपनी-अपनी उड़ान के दौरान रिकार्ड स्थापित किए हैं। स्वितलाना स्वीत्स्कया वे पहली महिला अन्तरिक्ष यात्री थीं, जो खुले अन्तरिक्ष में चहलक़दमी करने के लिए निकली थीं। येलेना कन्दकोवा ने अलिक्सान्दर विक्तरेन्का और वलेरी पलिकोफ़ के साथ अन्तरिक्ष स्टेशन ’मीर’ में 170 दिन बिताए थे। इससे पहले कभी किसी महिला ने इतनी लम्बी अन्तरिक्ष उड़ान नहीं भरी थी। चौथी रूसी महिला अन्तरिक्ष यात्री येलेना सिरोवा 26 सितम्बर 2014 को अन्तरिक्ष में गई थीं। 

इस लेख का सर्वाधिकार ’रस्सीस्कया गज़्येता’ के पास सुरक्षित है।

 

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