रूसी और भारतीय मीडिया के बीच आपसी सम्पर्क बनाने के सवाल पर चर्चा

रूस के दूरसंचार और जनसंचार उपमन्त्री अलिक्सेय वोलिन ने भारत को रूस का महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए यह सुझाव दिया कि दोनों देशों को मिलकर टेलीविजन कार्यक्रम और वृत्तचित्र बनाने चाहिए।
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दोनों देशों को मिलकर एक सँयुक्त मीडिया परिषद की स्थापना करनी चाहिए ताकि मीडिया के क्षेत्र में भी दो देशों के बीच आपसी रिश्तों को बढ़ावा दिया जा सके। स्रोत :Imago/Global Look Press

रूस और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक बैठक करके दो देशों के मीडिया के बीच अधिक से अधिक सम्पर्क और सहयोग स्थापित करने के लिए आवाज़ उठाई।

विगत 3 अप्रैल को नई दिल्ली में दो देशों के मीडिया के बीच आपसी सहयोग के बारे में एक गोलमेज़ बैठक हुई। इस बैठक में भाग लेने के लिए भारत के विदेश मन्त्रालय ने रूसी प्रतिनिधिमण्डल को विशेष रूप से आमन्त्रित किया था। रूस के दूरसंचार और जनसंचार उपमन्त्री अलिक्सेय वोलिन ने इस गोलमेज़ बैठक में भाग लेनेवाले रूसी प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व किया।

दो देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की इस बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि दो देशों के बीच सूचना और संचार के क्षेत्र में दिखाई देने वाली खाई को पाटने की ज़रूरत है। भारत में इक्का-दुक्का रूसी पत्रकार ही काम कर रहे हैं। रूस में रहकर काम करने वाले भारतीय पत्रकारों की संख्या तो और भी कम है।

दोनों पक्षों ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि भारत को रूस के बारे में सारी जानकारियाँ काफ़ी हद तक पश्चिमी मीडिया स्रोतों से ही मिलती हैं। 

अलिक्सेय वोलिन ने भारत को रूस का एक महत्वपूर्ण सहयोगी बताया और कहा कि दोनों देशों को मिलकर एक सँयुक्त मीडिया परिषद की स्थापना करनी चाहिए ताकि मीडिया के क्षेत्र में भी दो देशों के बीच आपसी रिश्तों को बढ़ावा दिया जा सके। 

उन्होंने कहा — वैश्विक डिजिटल संचार और तकनीकी बदलाव के युग में यह बात महत्वपूर्ण होगी कि भारत और रूस सीधे एक दूसरे के साथ संवाद करें। इस तरह की मीडिया गोलमेज़ बैठकें इस तरह के संवाद की स्थापना में सहायक हो सकती हैं। 

रूस के दूरसंचार और जनसंचार उपमन्त्री अलिक्सेय वोलिन ने कहा कि दोनों देशों को मिलकर टेलीविजन कार्यक्रम और वृत्तचित्र बनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस और भारत की मीडिया कम्पनियों को आपस में अधिक से अधिक सहयोग करना चाहिए। डिजिटल और नए मीडिया क्षेत्रों में दो देशों के बीच आपसी सहयोग की बहुत-सी संभावनाएँ हैं।

भारतीय अधिकारियों ने रशिया टुडे, रस्सीया सिवोदनिया और रस्सीस्कया गज़ेता द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। 

उन्होंने भारत में रूसी फिल्मों के प्रदर्शन की शुरूआत का स्वागत किया और बताया कि इन रूसी फ़िल्मों का भारत में हिन्दी, तमिल और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है।

द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य

दोनों पक्षों ने इस बात पर भी चर्चा की कि हमारे दो देशों ने आपसी व्यापार को बढ़ाकर सन् 2025 तक 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य उठाया है। 

भारत के विदेश सचिव एस० जयशंकर ने कहा — आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए हमने 2025 तक अपना आपसी व्यापार बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य उठाया है। उसी समय हम भारत और रूस में आपसी निवेश बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। 

हमारे दो देश एक-दूसरे के विशेष और प्राथमिकता प्राप्त सामरिक सहयोगी हैं। इन शब्दों को हलकेपन से नहीं लिया जा सकता है। ये शब्द हमारे रिश्ते की विशिष्टता के बारे में बताते हैं। हमने वास्तव में अपने रिश्तों को इस स्तर तक लाने के लिए कड़ी मेहनत की है। ख़ासकर पिछले दो सालों में हमने अपने रिश्तों को अधिक गहरा बनाया है। 

सिनेमा के क्षेत्र में सहयोग 

दिल्ली की अपनी इस यात्रा के दौरान रूस के दूरसंचार और जनसंचार उपमन्त्री अलिक्सेय वोलिन ने भारत के सूचना और प्रसारण मन्त्री राज्यवर्धन राठौर से भी मुलाकात की। राठौर ने रूसी फिल्म निर्माताओं को आमन्त्रित किया है कि वे भारत में अपनी फ़िल्मों की शूटिंग करें। 

राठौर ने वोलिन को भारत के मुम्बई शहर में जल्दी ही बनाए जाने वाले एनिमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग और हास्य केन्द्र के बारे में जानकारी दी। वोलिन और राठौर, दोनों ही इस बात पर सहमत थे कि एनीमेशन, ग्राफिक्स और विजुएल सामग्री के क्षेत्र में रूस और भारत के बीच आपसी सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया जाना चाहिए और इस दिशा में सहयोग का विकास करना चाहिए।

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