गृहयुद्ध ख़त्म होने के बाद रूस, ईरान और तुर्की की नज़र में सीरिया का भविष्य

रूसी विशेषज्ञों के अनुसार, ये तीनों देश सीरिया में जारी गृहयुद्ध से बुरी तरह थक चुके हैं। अब ये तीनों देश मिलकर सीरिया की दिक़्क़तों को सुलझाएँगे। ये देश अब इस बात का इन्तज़ार नहीं करेंगे कि पश्चिमी देश और पश्चिम एशिया के दूसरे देश पहले आपस में अपने सवालों को सुलझा लें।
Sergey Shoygu
मास्को में रूस, ईरान और तुर्की के रक्षा मन्त्रियों की मुलाकात हुई। स्रोत :Vadim Savitsky/RIA Novosti
विगत 20 दिसम्बर को मस्क्वा में  रूस, ईरान और तुर्की के रक्षा मन्त्रियों ने मिलकर सीरिया में उठाए जाने वाले वे क़दम तय किए जो सीरिया के दूसरे सबसे बड़े महानगर हैलाब (अलेप्पो) को आतंकवादी गिरोहों के कब्ज़े से आज़ाद कराए जाने के बाद उठाए जाने चाहिए। रूस के रक्षा मन्त्री सिर्गेय शायगू ने बताया — अब तीन देशों के विशेषज्ञ इस मुलाक़ात के परिणामों से जुड़ा घोषणापत्र तैयार कर रहे हैं, जिसे ’सीरियाई संकट के समाधान के लिए तुरन्त उठाए जाने वाले क़दमों का मस्क्वा घोषणापत्र’ कहा जाएगा।
 
सीरिया में गृहयुद्ध को जल्दी से जल्दी ख़त्म करवाने की इच्छा रखते हुए भी सीरियाई संकट के समाधान और सीरिया के भविष्य के बारे में इन तीनों देशों का अपना-अपना नज़रिया है। ऐसा लगता है कि जल्दी ही सीरिया का एक देश के रूप में नए ढंग से निर्माण करना पड़ेगा। 
 
सोवियत संघ से अलग हुए देशों का अध्ययन करने वाले संस्थान के उपनिदेशक और सैन्य विशेषज्ञ व्लदीमिर येव्सियेफ़ ने कहा — वहाँ अभी कम से कम एक साल तक और लड़ाई जारी रहेगी। इसके बाद ही नए सीरिया देश की तस्वीर कुछ साफ़ होगी।
 
उन्होंने कहा — सीरिया में राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के अधिकारों का बँटवारा हो जाएगा और प्रधानमन्त्री के अधिकार काफ़ी बढ़ा दिए जाएँगे। सीरिया के कुछ हिस्सों को स्वायत्तता दे दी जाएगी और पहले से ज़्यादा अधिकार दे दिए जाएँगे। लेकिन सीरिया की संवैधानिक व्यवस्था पहले जैसी ही बनी रहेगी। वह गणराज्य होगा, लेकिन संघीय गणराज्य नहीं।

रूस का नज़रिया

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस इस इलाके में स्थिरता पैदा करना चाहता है। रूस चाहता है कि सीरिया संकट में उसकी सहभागिता बहुत सीमित हो।
 
सैन्य विशेषज्ञ व्लदीमिर येव्सियेफ़ ने कहा — सीरिया में संकट ख़त्म होने के बाद रूस वहाँ चुनाव करवाने के पक्ष में है और वह सीरिया का पुनर्निर्माण करने के लिए एक ’रोडमैप’ बनाना चाहता है। हम आगे भी शहरों, क़स्बों, बस्तियों और गाँवों को वहाँ शुरू की गई शान्ति-प्रक्रिया में शामिल करते रहेंगे और आतंकवादियों को भगाने के लिए गलियारे बनाकर उन्हें बाहर निकालते रहेंगे।
 
विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि रूस का मुख्य उद्देश्य सीरिया में सिर्फ़ सुरक्षा स्थापित करना ही नहीं, बल्कि देश का आर्थिक रूप से पुनर्निर्माण करना भी है। लेकिन रूस अकेले यह काम नहीं करना चाहता। वह इस बोझ को दूसरे देशों के साथ बाँटने की कोशिश कर रहा है।
 
व्लदीमिर येव्सियेफ़ ने कहा — हम भूमध्य सागर के पूर्वी हिस्से में अपनी स्थिति को भी मज़बूत करना चाहते हैं। अभी सीरिया में ह्मेयमिम में रूस का एक वायुसैनिक अड्डा बना हुआ है और हम चाहते हैं कि तारतुस में युद्धपोतों की तकनीकी देखरेख करने वाला हमारा जो केन्द्र बना हुआ है, वह भविष्य में एक पूरे रूसी नौसैनिक अड्डे का रूप ले ले।

तुर्की का नज़रिया 

मस्क्वा में हुई बातचीत के दौरान तुर्की के रक्षा मन्त्री फ़िकरी इशिक ने पूर्वी हैलाब (अलेप्पो) को आतंकवादियों से मुक्त कराने के लिए की गई कार्रवाई को बेहद सफल कार्रवाई बताया।
 
लेकिन फिर भी हैलाब (अलेप्पो) में की गई कार्रवाई को तुर्की द्वारा किए जा रहे समर्थन को कुछ रूसी विशेषज्ञ सन्देह की निगाह से देखते हैं। ’वज़्ग्ल्याद’ (नज़रिया) नाम के एक रूसी अख़बार को इण्टरव्यू देते हुए पश्चिमी एशिया और मध्य एशिया अध्ययन केन्द्र के निदेशक सिम्योन बग्दसारफ़ ने कहा — हमारी कार्रवाइयों से पूर्वी हैलाब की सुरक्षा का काम तुर्की समर्थक दस्ते ही कर रहे थे और तुर्कियों ने ही इद्लिब और होम्स की तरफ़ से हम पर हमले किए थे और हैलाब के हमारे घेराव को तोड़ने की कोशिश की थी।  
 
बग्दसारफ़ का मानना है कि सीरियाई संकट में तुर्की का मुख्य उद्देश्य बशर असद को राष्ट्रपति पद से हटाना, सीरिया का बँटवारा करके पूर्वी हैलाब को आधे सीरिया की राजधानी बनाकर उसे अपने नियन्त्रण में रखना तथा सीरियाई कुर्दों द्वारा की गई मोर्चाबन्दी को नष्ट करना है। उन्होंने कहा कि रूस सैद्धान्तिक रूप से सीरिया का बँटवारा करने के लिए तैयार है, लेकिन ख़तरा यह है कि दोनों सीरियाई देशों के बीच हमेशा दुश्मनी भरी खींचतान जारी रहेगी और नई से नई समस्याएँ सामने आती रहेंगी। 
 
लेकिन कई दूसरे रूसी विशेषज्ञ सिम्योन बग्दसारफ़ की इस बात से सहमत नहीं हैं। मस्क्वा राजकीय अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध संस्थान के एशिया अध्ययन विभाग के प्रोफ़ेसर सिर्गेय द्रुझीलवस्की का कहना है कि तुर्की का नज़रिया पिछले छह महीने में बहुत ज़्यादा बदल चुका है। तुर्की में सत्ता-पलट की कोशिश के बाद अब तुर्की की सरकार अपने धुर विरोधी ईरान के साथ भी कई मुद्दों पर सहमत हो रही है।
 
प्रोफ़ेसर सिर्गेय द्रुझीलवस्की  ने कहा —  बशर असद सीरिया की दस प्रतिशत अलावीत आबादी के प्रतिनिधि हैं, जबकि सवा से डेढ़ करोड़ अलावीत जाति के लोग तुर्की में भी रहते हैं। तुर्की के घरेलू संकटों ने सीरिया के सिलसिले में और तुर्की की शिया जनता के सिलसिले में रेजेप एरदोगान को अपनी नीतियाँ बदलने पर मजबूर कर दिया।

ईरान का नज़रिया

मस्क्वा राजकीय अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध संस्थान के एशिया अध्ययन विभाग के प्रोफ़ेसर सिर्गेय द्रुझीलवस्की का कहना है कि ईरान के लिए यह ज़रूरी है कि सीरिया में बशर असद सत्ता में बने रहें। कोई भी दूसरा आदमी सीरिया में राष्ट्रपति बनेगा तो ईरान को लेकर उसकी नीतियाँ एकदम बदल जाएँगी।
 
अन्तरराष्ट्रीय मामलों सम्बन्धी रूसी परिषद के विशेषज्ञ और मस्क्वा राजकीय अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध संस्थान के प्राध्यापक निकलाय सुरकोफ़ ने कहा — ईरान के लिए यह भी ज़रूरी है कि इज़रायल के प्रति सीरिया की नीति क्या होगी।
 
उन्होंने कहा — ईरान को सीरिया से बड़ा फ़ायदा है जो इज़रायल से हमेशा उन हथियारों से लड़ता रहेगा, जो हिज़बुल्लाह लेकर आएगा। इसलिए ईरान का यह मानना है कि अगर बशर असद को बदलना है तो जो आदमी उनकी जगह लेगा, उसे भी ईरान के साथ वैसे ही सहयोग करना होगा, जैसे बशर असद कर रहे हैं।
 
लेकिन व्लदीमिर येव्सियेफ़ का कहना है कि सीरिया की भविष्य की राजनीति पर ईरान का सीधा प्रभाव अब शायद ही सम्भव होगा। ईरान फिलहाल सीरिया का आर्थिक प्रायोजक है और सैन्य दृष्टि से  वह सिर्फ़ उसके सहायक की भूमिका ही निभा रहा है। 
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