दो दिन पहले रूस में हुई विमान-दुर्घटना से जुड़ी जानकारियाँ

विमान दुर्घटना के बाद काले सागर में विमान के ’ब्लैक बॉक्स’ ढूँढ़ने का काम कर रहे खोजीदल ने विमान के ब्लैक-बॉक्स ढूँढ़ निकाले और काले सागर में दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर इस दुर्घटना का मुख्य कारण तय कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों में एक व्यक्ति रूसी खुफ़िया एजेन्सी एफ़एसबी का कर्मी है।
Tu-154 crash in Sochi
विमान में कुल 92 यात्री सवार थे, जिनमें से 68 यात्री अलिक्सान्द्रफ़ सैन्य बैण्ड के सदस्य थे, 9 पत्रकार थे और 8 विमान के चालक-दल के सदस्य थे। स्रोत :Max Vetrov / RIA Novosti

27 दिसम्बर की सुबह काले सागर में गिरे रूसी सैन्य-यात्री विमान टीयू-154 के ब्लैक बॉक्स आख़िर ढूँढ़ निकाले गए। इस विमान ने सीरिया के लिए उड़ान भरी थी और हवाई-अड्डे से उड़ान भरने के तुरन्त बाद यह विमान काले सागर में जा गिरा था। अब ब्लैक बॉक्स वैज्ञानिक जाँच के लिए मस्क्वा (मास्को) भेज दिए गए हैं। रूस के रक्षा मन्त्रालय ने रूस-भारत संवाद को यह जानकारी दी है। इन ब्लैक बॉक्सों से सूचनाएँ निकालने में विशेषज्ञों को कुछ दिन का समय लग सकता है।

रूस के रक्षा मन्त्रालय का यह सैन्य-यात्री विमान टीयू-154 रविवार 25 दिसम्बर की सुबह समुद्र तट से डेढ़ किलोमीटर दूर काले सागर में गिर पड़ा था। विमान ने तभी हवाई अड्डे से सीरिया के लिए उड़ान भरी थी। विमान जिस समय ऊपर आकाश में उठने की कोशिश कर रहा था, उसी समय नीचे गिर पड़ा। लेकिन विमान के गिरने से पहले विमान के पायलट दल ने कोई आपात सूचना नहीं दी। विमान में कुल 92 यात्री सवार थे, जिनमें से 68 यात्री अलिक्सान्द्रफ़ सैन्य बैण्ड के सदस्य थे, 9 पत्रकार थे और 8 विमान के चालक-दल के सदस्य थे।अभी तक समुद्र की तली से 12 यात्रियों के शव निकाले जा चुके हैं।

दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी ने क्या देखा

रूसी ख़ुफ़िया एजेन्सी एफ़एसबी का एक सहकर्मी उस समय काले सागर में अपनी नाव में घूम रहा था, जब टीयू-154 विमान समुद्र में गिरा। एफ़एसबी का यह सहकर्मी ही इस दुर्घटना का प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी है। रूसी सुरक्षा बलों के हवाले से रूसी समाचारपत्र ’कमिरसान्त’ ने यह जानकारी दी है।  

प्रत्यक्षदर्शी द्वारा दिए गए बयानों के अनुसार, विमान उड़ान भरने के तुरन्त बाद ही ऊपर की तरफ़ उठने की जगह नीचे की तरफ़ आने लगा था। ऐसा लग रहा था कि मानो पायलट समुद्र में विमान को उतारना चाहता है।

ऐसा करते हुए विमान की दशा और दिशा बड़ी अजीब सी थी। दुर्घटनाग्रस्त टीयू -154 की नाक ऊपर को उठी हुई थी और वह धीरे-धीरे नीचे की तरफ़ उतर रहा था। 

समाचारपत्र ’कमिरसान्त’ के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शी ने विमान की तुलना एक ऐसी मोटर साइकिल से की, जो पिछले पहिए पर तेज़ी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हो। एक पल बाद ही टीयू-154 विमान के पिछले हिस्से ने समुद्र की सतह को छुआ और पानी से टकराकर विमान का पिछला हिस्सा टूट गया। विमान समुद्र की लहरों पर गिरा था। समुद्र की लहरें जल्दी ही विमान को लील गईं और विमान समुद्र में डूब गया। 

टीयू-154 की उड़ान कैसे शुरू हुई 

रूसी ख़ुफ़िया एजेन्सी एफ़एसबी के विशेषज्ञों ने बताया कि विमान 345 किलोमीटर प्रति घण्टे की सामान्य रफ़्तार पकड़ने के बाद ही आसमान में उठना शुरू हो गया था।

लेकिन जल्दी ही ऊपर उठने की जगह विमान की गति घटने लगी और विमान नीचे आने लगा। 

कानून रक्षा संस्थाओं के विशेषज्ञों का मानना है कि पायलटों द्वारा की गई कार्रवाइयों की वजह से ऐसा हुआ, जिन्होंने विमान को एक ही झटके में ऊपर उठाने की कोशिश की थी। इस तरह विमान की गति ऊपर उठने की अधिकतम गति से भी बहुत ज़्यादा हो गई।

उड़ान शुरू करने से पहले पायलटों ने उड़ान-नियन्त्रकों को बताया था कि विमान बहुत ’भारी’ है। विमान में ज़रूरत से ज़्यादा वज़न भरा हुआ है, जिस वजह से विमान के फ्लैप और स्टेबलाइजरों में ख़राबी पैदा हो सकती थी और उसके इंजन उल्टे तरीके से काम करना शुरू कर सकते थे।

आतंकवादी कार्रवाई का सन्देह घटता जा रहा है

एफ़एसबी के हवाले से समाचार समिति ’रिया नोवस्ती’ ने लिखा है कि दुर्घटनाग्रस्त हुए टीयू -154 सैन्य-यात्री विमान के ढाँचे पर आतंकवादी हमले या तोड़-फोड़ का अभी तक कोई निशान नहीं मिला है। 

खुफ़िया एजेन्सियों के अनुसार इस दुर्घटना का मुख्य कारण शायद यह है कि विमान के इंजन में कोई बाहरी चीज़ आकर फँस गई या विमान के ईंधन की क्वालिटी अच्छी नहीं थी। इसी वजह से विमान के इंजनों ने काम करना बन्द कर दिया। या फिर पायलटों ने कोई ग़लती की। और या विमान में कोई तकनीकी ख़राबी पैदा हो गई।

रूस की अन्वेषण समिति ने रूसी अपराध दण्ड संहिता की धारा 351 के आधार पर एक मुक़दमा दायर कर लिया है। इस धारा का इस्तेमाल उड़ान के नियमों को भंग करने वालों के विरुद्ध किया जाता है। 

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