रूसी सीमा पर चीन ने तैनात किए परमाणु मिसाइल

चीनी मीडिया के अनुसार, चीन ने अपने उत्तर-पूर्वी इलाके में रूस की सीमा से कुछ दूर अपने आधुनिकतम अन्तरमहाद्वीपीय परमाणविक बैलिस्टिक मिसाइल तैनात कर दिए हैं। रूस-भारत संवाद ने यह मालूम करने की कोशिश की कि इस सूचना पर रूसी सैन्याधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया होगी? कहीं ऐसा तो नहीं कि रूस को इस सिलसिले में चिन्ता करने की कोई ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि रूस और चीन आपसी सामरिक सहयोगी देश हैं।
A soldier  from the Chinese People's Liberation Army
चीन के विदेश मन्त्रालय ने इस बात से इंकार कर दिया कि चीन ने किसी तरह के मिसाइल रूस की सीमाओं के निकट तैनात किए हैं। स्रोत :Reuters

पिछले दिनों चीनी अख़बार ’ग्लोबल टाइम्स’ ने जानकारी दी कि हांगकांग और ताईवान के अख़बारों में उन अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइलों डीएफ़-41 की तस्वीरें छपी हैं, जिन्हें चीन के उत्तर-पूर्वी प्रान्त हैलुन्ज़्यान में तैनात किया गया है। इसके बाद रूसी मीडिया में रूस की सीमा पर तैनात किए गए इन मिसाइलों को लेकर हंगामा मच गया और यह शोर होने लगा कि चीन भी अब रूस के लिए ’ख़तरनाक देश’ हो गया है।

लेकिन ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि ख़ुद पेइचिंग ने ही जानबूझकर इस गुप्त जानकारी का रिसाव किया था और इस तरह अमरीका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बार-बार दोहराई जाने वाली चीन-विरोधी बातों का जवाब दिया था। रूस के एक सैन्य राजनीतिक विश्लेषक मिख़ाइल अलिक्सान्द्रफ़ का कहना है कि वास्तव में चीन द्वारा मिसाइलों की तैनाती की यह सूचना अमरीका से किए जाने वाले चीनविरोधी ऐलानों का चीन द्वारा दिया गया जवाब ही लगती है।

लेकिन रूसी पत्रिका ’जन्मभूमि के शस्त्रागार’ के प्रमुख सम्पादक वीक्तर मुरख़ोव्स्की ने रूस-भारत संवाद से बात करते हुए ध्यान दिलाया कि चीन से मिली इस तरह की यह कोई पहली सूचना नहीं है। उन्होंने बताया कि साल भर पहले भी डीएफ़-41 मिसाइलों की कुछ तस्वीरें सामने आई थीं, जब उन्हें चीन के उत्तर-पश्चिम में सिनज़्यान-उइगूर प्रदेश में ले जाया जा रहा था।

उल्लेखनीय बात तो यह है कि सिनज़्यान उइगूर प्रदेश भी रूस की सीमा के निकट ही है। साल भर पहले तक तो ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव अभियान की कोई ख़बर भी नहीं थी।      

हमारा सामरिक सहयोगी

पिछले साल अप्रैल में सैन्य मुद्दों को उठाने वाली अमरीकी इण्टरनेट पत्रिका ’फ़्री बिकेन’ (स्वतन्त्र लाइटहाउस) ने सूचना दी थी कि कुछ सफल परीक्षणों के बाद अब चीन अपने डीएफ़-41 मिसाइलों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन उस सूचना में यह जानकारी नहीं दी गई थी कि इन मिसाइलों को किन इलाकों में तैनात किया जाएगा। विगत अप्रैल में चीन ने दक्षिणी चीन सागर में इन मिसाइलों का परीक्षण किया था। तब ऐसा लग रहा था कि इस इलाके के कुछ द्वीपों को लेकर चीन और अमरीका के बीच चला आ रहा तनाव खुलकर सामने आ गया है।  

रूस-भारत संवाद ने इस सिलसिले में जिन विशेषज्ञों से बातचीत की, उन सभी का यह कहना है कि चीन ने ये मिसाइल रूस के ख़िलाफ़ तैनात नहीं किए हैं। मुरख़ोवस्की ने कहा कि हमारे दोनों देशों के परमाणु हथियार एक-दूसरे को निशाना बनाकर तैनात नहीं किए गए हैं और ये हथियार रूस के लिए कोई ख़तरा नहीं हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे दो देशों के बीच गहरे राजनीतिक रिश्ते हैं। ये रिश्ते तब और प्रगाढ़ हो गए, जब पश्चिम के साथ रूस के रिश्ते ख़राब हुए और रूस ने पश्चिम की तरफ़ से अपना मुँह मोड़कर पूरब की तरफ़ यानी एशिया की तरफ़ कर लिया।

इस सिलसिले में क्रेमलिन ने जो टीका-टिप्पणी की, वह भी विशेषज्ञों की बात की ही पुष्टि करती है। रूस के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पिस्कोफ़ ने कहा — चीन हमारा सहयोगी है, सामरिक सहयोगी है... निश्चय ही चीनी सेना के भीतर होने वाले बदलाव हमारे ख़िलाफ़ नहीं हैं और हम उन्हें अपने देश (रूस) के लिए ख़तरा नहीं समझते हैं।

सैन्य राजनीतिक विश्लेषक मिख़ाइल अलिक्सान्द्रफ़ ने कहा —  रूस और चीन के बीच राजनीतिक रिश्ते कैसे भी हों, इसके बावजूद इस बात की कल्पना करना भी मुश्किल है कि चीन अपनी भूराजनैतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए दो महाशक्तियों के बीच परमाणविक युद्ध शुरू कर सकता है। सब जानते हैं कि रूस की परमाणविक क्षमता चीन से बहुत ज़्यादा है। रूस के पास बड़ी संख्या में सामरिक और रणनीतिक परमाणविक हथियार हैं और रूस के ये परमाणु बम चीन के बमों से कहीं ज़्यादा आधुनिक और सक्षम हैं।

रूसी सीमा के क़रीब

हमें इस बात को लेकर भी चिन्तित नहीं होना चाहिए कि चीन ने ये मिसाइल हमारी सीमाओं के क़रीब तैनात किए हैं (हालाँकि मुरख़ोव्स्की का कहना है कि वे रूस की सीमा से कुछ सौ किलोमीटर दूर तैनात किए गए हैं) क्योंकि ये अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइल हैं। मिख़ाइल अलिक्सान्द्रफ़ ने कहा — चीनी मिसाइल चीन के किसी भी इलाके से छोड़े जाएँ तो वे रूस को अपना निशाना बना सकते हैं, इसलिए हमें इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि उन्हें चीन के किस प्रान्त या प्रदेश में तैनात किया गया है।

मस्क्वा के कर्नेगी केन्द्र के विशेषज्ञ प्योतर तपिचकानफ़ ने रूस-भारत संवाद से कहा — चीनी-रूसी सीमा से कुछ ही दूर इन मिसाइलों की तैनाती यह दिखाती है कि इन्हें रूस के ख़िलाफ़ तैनात नहीं किया गया है, क्योंकि रूस की सीमा पर तैनात करने का मतलब यह भी है कि ये मिसाइल रूसी परमाणु और ग़ैरपरमाणु मिसाइलों की ज़द में हैं और रूसी मिसाइल इन्हें कभी भी अपना निशाना बना सकते हैं।

प्योतर तपिचकानफ़ ने कहा — रूस को इस सिलसिले में एक दूसरी ही चिन्ता सता रही है कि यदि अमरीका और चीन के बीच लड़ाई छिड़ जाती है तो अमरीका उन इलाकों को निशाना बनाएगा, जहाँ चीन के मिसाइल तैनात हैं। और अगर वे इलाके रूस के निकट हैं तो रूस के सीमावर्ती इलाकों में भी रेडियम प्रदूषण और पर्यावरण-दूषण फैल जाएगा। इसलिए रूस यह नहीं चाहेगा कि रूस की सीमा के निकट किसी तरह की युद्ध-कार्रवाइयाँ हों।

लेकिन रूस के मीडिया में जिस दिन चीनी मिसाइलों की तैनाती की यह ख़बर छपी, उसके अगले ही दिन चीन के विदेश मन्त्रालय ने इस बात से इंकार कर दिया कि चीन ने किसी तरह के मिसाइल रूस की सीमाओं के निकट तैनात किए हैं। चीन ने इस तरह की ख़बरों को इण्टरनेट में फैली अफ़वाहें और झूठी सूचनाएँ बताया। इसके साथ-साथ चीन के विदेश मन्त्रालय ने इस बात के लिए क्रेमलिन की तारीफ़ भी की कि दिमित्री पिस्कोफ़ ने इन ख़बरों पर बहुत सकारात्मक, सीधी और रचनात्मक टिप्पणी की है।

डीएफ़-41 (दोंगफेंग यानी पूर्वी हवा) —  तीन चरणों वाला ठोस ईंधन से चलने वाला तीसरी पीढ़ी का अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। यह माना जाता है कि इस मिसाइल पर लगे 10-12 बम निशाने के क़रीब पहुँचकर अलग-अलग हो जाते हैं और अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग तयशुदा निशानों पर हमला करते हैं। डीएफ़-41 की मारक दूरी क्षमता विभिन्न जानकारियों के अनुसार 10 से 14  हज़ार किलोमीटर तक है।

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