आतंकवादी गिरोह ’इस्लामी राज्य’ के चंगुल से सीरिया कब छूटेगा?

3 मार्च 2017 अलेग येगोरफ़
आतंकवादी गिरोह ’आईएस’ के आतंकवादी हार रहे हैं और सीरियाई इलाकों को छोड़कर भाग रहे हैं। लेकिन अभी से यह कहना कि ’इस्लामी राज्य’ से पूरी तरह छुटकारा पा लिया जाएगा, जल्दबाज़ी करना होगा। ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के ख़िलाफ़ खड़ी ताक़तें ख़ुद भी एक-दूसरे के ख़िलाफ़ लड़ने के कगार पर हैं। अमरीका, तुर्की और कुर्दों के साथ रूस इस सहमति पर पहुँचने की कोशिश कर रहा है कि इस्लामी राज्य के आतंकवादियों के खिलाफ़ मिलकर लड़ा जाए।
Iraqi special forces
2 मार्च को सीरियाई सेना ने रूसी वायुसेना की सहायता से आतंकवादियों से ’पालमीरा’ शहर फिर से वापिस ले लिया। स्रोत :Reuters

इराकी टेलीविजन चैनल अल सुमारिया ने ख़बर दी है कि आतंकवादी गिरोह ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के सरगना अबू बक्र अल-बग़दादी ने हाल ही में एक ऐसा ख़त जारी किया है, जिसे ’विदाई-पत्र’ कहा जा सकता है। अपने इस सम्बोधन में ’इस्लामी राज्य’ के सरगना ने यह मान लिया है कि इराक के मोसूल शहर में हो रही लड़ाई में अमरीका के समर्थन से इराकी सेना ने ’इस्लामी राज्य’ को हरा दिया है। अबू बक्र अल-बग़दादी ने अपने सभी साथियों से कहा है कि वे मोसूल छोड़कर चले जाएँ या मोसूल में शहीद हो जाएँ।

अबू बक्र अल-बग़दादी की यह अपील बड़े संदिग्ध लग रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) कभी इस तरह की बयानबाज़ी नहीं करता कि वह हार रहा है। ऐसा लगता है कि इराक की सरकार ने जानबूझकर यह झूठी जानकारी प्रसारित की है ताकि आतंकवादियों का मनोबल कम किया जा सके।  लेकिन आतंकवादी गुट का ’खिलाफ़त’ स्थापित करने का काम वास्तव में गड़बड़ा गया है।

दो मोर्चों पर लड़ाई

इराक की सेना अपने पश्चिमी सहयोगियों के साथ मिलकर आतंकवादियों को उनके सबसे बड़े गढ़ मोसूल से पीछे की ओर ढकेल रही है। विगत जनवरी में इराक की सरकारी सेना ने मोसूल के पूर्वी हिस्से पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया था। अब पश्चिमी मोसूल के लिए लड़ाई हो रही है, जहाँ सरकारी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़ती जा रही है और एक के बाद एक मोसूल के मौहल्लों पर कब्ज़ा करती जा रही है।

इराक की सरकारी सेना ने मोसूल के पूर्वी हिस्से पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया था। स्रोत : Reutersइराक की सरकारी सेना ने मोसूल के पूर्वी हिस्से पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया था। स्रोत : Reuters

इसके साथ-साथ ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) सीरिया में भी हारता जा रहा है। पिछली 23 फ़रवरी को तुर्की के सैन्य-दस्तों ने आतंकवादियों से उत्तरी सीरिया का अल-बाब शहर छीन लिया। और जैसाकि रूस के रक्षामन्त्री सिर्गेय शायगू ने व्लदीमिर पूतिन को जानकारी दी, 2 मार्च को सीरियाई सेना ने रूसी वायुसेना की सहायता से आतंकवादियों से ’पालमीरा’ शहर फिर से वापिस ले लिया। पालमीरा पर ’इस्लामी राज्य’ ने विगत दिसम्बर 2016 से कब्ज़ा कर रखा था।

पीछे हटने का मतलब हार नहीं है

सीरिया और इराक में आतंकवादियों की हार के बावजूद भी यह नहीं कहा जा सकता है कि उनको पूरी तरह से नेस्तानाबूद कर दिया गया है। इराक और सीरिया में ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के ख़िलाफ़ अन्तरराष्ट्रीय सैन्य-कार्रवाई के कमाण्डर लैफ़्टिनेण्ट जनरल स्टीवन टाउनसेण्ड ने बताया कि अभी भी मोसूल में कम से कम 2000 आतंकवादी मौजूद हैं, जिनसे अन्तरराष्ट्रीय गठबन्धन के सैन्य-दस्तों को भयानक युद्ध करना होगा। 

रूसी राजकीय मानविकी विश्वविद्यालय के आधुनिक एशिया विभाग के प्रोफ़ेसर ग्रिगोरी कसाच ने रूस-भारत संवाद से कहा — इराकी मीडिया की इस ख़बर पर मुझे ज़रा भी विश्वास नहीं है कि आतंकवादी मोसूल छोड़कर भाग रहे हैं। शहर के भीतर युद्ध करने की कला आतंकवादी अच्छी तरह से जानते हैं। उन्होंने शहर में जगह-जगह सुरंगें बना रखी हैं, जिनका इस्तेमाल वे एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने में करते हैं। वे इराक की सरकारी सेना पर अचानक हमले करके छापामार युद्ध चला रहे हैं। जिन इलाकों पर इराक की सेना का कब्ज़ा हो गया है, उन इलाकों में भी आतंकवादी हमले होते रहते हैं। मोसूल में भयानक लड़ाई हो रही है। जब सीरिया में आतंकवादियों के सबसे बड़े गढ़ राक्का पर हमला किया जाएगा तो राक्का में भी ऐसी ही भीषण लड़ाई होगी। 

उत्तरी सीरिया में उलझन 

आतंकवादियों के हाथों से मोसूल निकलने के बाद पूर्वी सीरिया का राक्का शहर ही आतंकवादियों का सबसे बड़ा गढ़ होगा। ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) को पूरी तरह से नेस्तानाबूद करने के लिए राक्का पर हमला करना ज़रूरी होगा। आज राक्का पर हमला करने की ओर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

लेकिन यह ज़रूरी है कि राक्का को जीतने के लिए उस पर उत्तरी सीरिया की तरफ़ से आक्रमण किया जाए। उत्तरी सीरिया में तुर्की के सैन्य-दस्ते सीरियाई कुर्द सेना ’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’ के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं और ये दोनों ही ताक़तें एक-दूसरे के ख़िलाफ़ लड़ाई में उलझी हुई हैं।

मोसूल में इराक की सरकारी सेना और आईएस के बीच भयानक लड़ाई हो रही है। स्रोत : Reutersमोसूल में इराक की सरकारी सेना और आईएस के बीच भयानक लड़ाई हो रही है। स्रोत : Reuters

तुर्की के सैन्य-दस्ते अगस्त 2016 में सीरिया में घुसे थे। हालाँकि औपचारिक रूप से वे ’इस्लामी राज्य’ के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने बार-बार इस ओर ध्यान दिलाया है कि तुर्की का उद्देश्य यह है कि उत्तरी सीरिया में कुर्दों को स्वायत्ता नहीं मिल पाए। जैसे ही उत्तरी सीरिया से ’इस्लामी राज्य’ के आतंकवादियों को पीछे ढकेला गया, तुर्की के राष्ट्रपति रजेप तैयप एरदोगान ने यह वायदा किया कि उनकी सेना अब राक्का पर नहीं, बल्कि मनबिज पर हमला करेगी ताकि मनबिज को ’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’ के कब्ज़े से छुड़ाया जा सके। ’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’ में ज़्यादातर कुर्द लड़ाके शामिल हैं और उनका मानना है कि तुर्की के सैन्य-दस्ते आतंकवादियों की सहायता कर रहे हैं। इसलिए ’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’  तुर्की की सेना से लोहा लेने के लिए तैयार है। 

’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’ की मुख्य ताक़त सीरियाई कुर्दों का अमरीका भी समर्थन कर रहा है। मालूम हुआ है कि 28 फ़रवरी को अमरीकी कमाण्डो मनबिज के पास उतरे हैं। इसके बाद स्थिति जटिल हो गई है क्योंकि अब तुर्की के सैन्य-दस्तों को न सिर्फ़ कुर्दों से बल्कि अमरीकी कमाण्डो दस्तों से भी लड़ना होगा। 

रूस सुलह कराने की कोशिश में 

रूस के अभिनव विकास संस्थान के पश्चिमी एशियाई संकट शोध केन्द्र के प्रमुख अन्तोन मरदासफ़ का कहना है कि रूस के सामने इस वक़्त स्थिति बहुत जटिल हो गई है। रूस के सामने एक साथ तीन-तीन मुसीबतें खड़ी हुई हैं। रूस एक तरफ़ तो बशर असद का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ वह तुर्की के साथ रिश्तों को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। तीसरे, वह यह कोशिश भी कर रहा है कि उत्तरी सीरिया में तुर्कों और कुर्दों की आपसी भिड़न्त न हो। 

मरदासफ़ ने बताया कि अभी 2 मार्च को ही ’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’ ने यह ऐलान किया है कि उनके और रूस के बीच यह सहमति हुई है कि सीरिया की सरकारी सेना तुर्की के सैन्य-दस्तों से ’सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज’ के मनबिज में उपस्थित दस्तों को बचाने के लिए दोनों के बीच में डेरा डाल देंगी। रूस और अमरीका यह कोशिश कर रहे हैं कि तुर्कों और कुर्दों के बीच भिड़न्त न हो और यह तय कर लिया जाए कि मनबिज की स्थिति क्या है ताकि तुर्की के सैन्य-दस्ते राक्का पर किए जाने वाले हमले में शामिल हो सकें। 

मरदासफ़ ने रूस-भारत संवाद से कहा — इस सवाल पर अभी तक हालत साफ़ नहीं हुई है। मस्क्वा (मास्को) में आगामी 9 मार्च को होने वाली मुलाक़ात में पूतिन और एरदोगान भी सीरिया पर बातचीत करेंगे। तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है। मरदासफ़ ने कहा — अमरीका की नई सरकार का नज़रिया भी अभी तक साफ़-साफ़ सामने नहीं आया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने अभी तक अमरीकी रक्षा मन्त्रालय पेण्टागन की उस रिपोर्ट के बारे में कोई बात नहीं कही है, जिसमें पेण्टागन ने ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के ख़िलाफ़ लड़ाई की रणनीति तय की है। लेकिन एक बात तो साफ़ है कि आतंकवादियों की ’ख़िलाफ़त’ को तभी नेस्तानाबूद किया जा सकता है. जब उसके सारे दुश्मन आपसी झगड़े सुलझाकर आतंकवादियों के ख़िलाफ़ युद्ध में एकजुट हो जाएँगे। 

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