क्यों डरते हैं रूस और चीन दक्षिणी कोरिया में अमरीकी थाड मिसाइलों से

दक्षिणी कोरिया में तैनात की जाने वाली अमरीकी थाड मिसाइलों में कुछ कमियाँ भी हैं, जिनके वजह से रूस और चीन के लिए वे कम खतरनाक हैं। लेकिन रूस और चीन फिर भी इन मिसाइल प्रणालियों से घबराते हैं और इन्हें अपने लिए खतरनाक मानते हैं। इसका कारण इन मिसाइलों में नहीं, बल्कि इस मिसाइल प्रणाली के राडार में छुपा हुआ है, जो रूसी और चीनी अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइलों के प्रक्षेपण की गहरी निगरानी कर सकता है।
 THAAD
थाड मिसाइल उस स्थिति में बेकार हो जाएँगे यदि रूस व चीन तथा अमरीका के बीच भूराजनैतिक युद्ध छिड़ जाता है। स्रोत :Reuters

दक्षिणी कोरिया के दक्षिण-पूर्व में अमरीका जो अपनी मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली तैनात करने जा रहा है, वह प्रणाली सियोल को छोड़कर बाक़ी पूरे देश को अपनी छत्र - छाया में ले लेगी और वहाँ उपस्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों सहित कोरिया के सभी आर्थिक और सैन्य ठिकानों की भी सुरक्षा करेगी।

यह थाड प्रणाली मिसाइल - हमले से दक्षिणी कोरिया की सुरक्षा करने वाली ऐसी दूसरी प्रणाली होगी, जो 40 से 150 किलोमीटर की ऊँचाई पर ही और 200 किलोमीटर की दूरी पर ही हमलावर मिसाइलों को रोककर उन्हें नष्ट कर सकती है। कोरिया के आकाश के निचले हिस्से की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी एमआईएम-104 पैट्रिएट नामक हवाई सुरक्षा मिसाइल प्रणाली को सौंपी जाएगी, जो 25 किलोमीटर की ऊँचाई पर और 40 किलोमीटर की दूरी पर हमलावर मिसाइलों को रोककर उन्हें नष्ट कर सकते हैं।

लेकिन अमरीका और दक्षिणी कोरिया के सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि थाड मिसाइल उस स्थिति में बेकार हो जाएँगे यदि रूस व चीन तथा अमरीका के बीच भूराजनैतिक युद्ध छिड़ जाता है। तब ये थाड मिसाइल रूस और चीन के अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइलों के हमले को नहीं रोक पाएँगे। इन सैन्य विश्लेषकों की यह बात पूरी तरह से ठीक है।

थाड मिसाइल सिर्फ़ 150 किलोमीटर की ऊँचाई तक उड़ने वाले हमलावर मिसाइलों को ही रोक सकते हैं। जबकि अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइल 1000 किलोमीटर तक की ऊँचाई पर उड़ते हैं, जिन्हें रोकना थाड मिसाइलों के बस की बात नहीं होगी।

मिसाइलों पर नज़र रखने वाले राडार

लेकिन इसके बावजूद कोरियाई प्रायद्वीप के इलाके में उपस्थित अमरीकी मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणालियाँ रूस और चीन के लिए भयानक ख़तरा पैदा करती हैं।

यह खतरा थाड मिसाइलों से नहीं, बल्कि इस मिसाइल प्रणाली में शामिल राडार से पैदा होता है। थाड मिसाइल प्रणाली में शामिल और हमले के लिए तैयार एएन/टीपीवाई-2 नामक बहुउद्देशीय राडार इस तरह से तैनात किया जाएगा कि वह अपने चारों तरफ़ 600 से 900 किलोमीटर की दूरी पर नज़र रख सकता हैं। इस तरह वह वास्तव में चीन के एक छोटे से इलाके की निगरानी कर सकता है, जबकि रूस तो उससे बहुत दूर पड़ता है।

लेकिन यही राडार तकनीकी दृष्टि से इतना सक्षम है कि उसे इस तरह से सेट किया जा सकता है कि वह 2000 किलोमीटर की दूरी पर भी निगरानी करे। यदि इस राडार का सेटिंग मोड बदल दिया जाएगा तो यही राडार चीन के एक बड़े इलाके और रूस के भी सुदूर-पूर्व के कुछ इलाके पर नज़र रख पाएगा।

लेकिन इस राडार का सेटिंग मोड बदलने के बाद थाड मिसाइल हमलावर मिसाइलों को बीच में ही नहीं रोक पाएँगे। तब यह राडार दूरसम्वेदी राडार के रूप में काम करेगा और चीन से प्रक्षेपित होने वाले मिसाइलों पर नज़र रखेगा। इसका मतलब यह है कि इस राडार का इस्तेमाल चीन पर नज़र रखने और उससे मिलने वाली जानकारियाँ अमरीका तक भेजने के लिए किया जाएगा ताकि अमरीका उन अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइलों को बीच राह में ही पकड़कर नष्ट कर दे, जो अमरीका पर हमला करने वाले हैं।

थाड – कोरिया में बना अमरीकी सैन्य ठिकाना

दक्षिणी कोरिया और अमरीका के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे इस राडार की सेटिंग नहीं बदलेंगे। और थाड मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली कोरियाई प्रायद्वीप पर पूरी तरह से अमरीकी सैन्य ठिकाने के रूप में काम करेगी।

इस बारे में अमरीका और दक्षिणी कोरिया के बीच जो समझौता हुआ है, उसके अनुसार दक्षिणी कोरिया को थाड प्रणाली का संचालन नहीं करने दिया जाएगा। केवल अमरीकी सैनिक ही सिओनजो में तैनात होने वाली थाड वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली का संचालन व निर्देशन करेंगे।

कोरिया में अमरीकी गढ़

यह बात भी बेहद महत्व रखती है कि अमरीका दक्षिणी कोरिया को धीरे-धीरे अपनी वैश्विक मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के निर्माण के काम में शामिल करता जा रहा है। हालाँकि अमरीका द्वारा इस इलाके में जो मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था बनाई जा रही है, उसमें इस थाड मिसाइल सुरक्षा प्रणाली की कोई भूमिका नहीं होगी, लेकिन फिर भी इच्छा होने पर दोनों देश आपस में एक-दूसरे के साथ आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

इसके साथ-साथ दक्षिणी कोरिया और अमरीका वैश्विक मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के निर्माण के काम में आपसी सहयोग शुरू कर सकते हैं। अमरीका चाहता है कि दक्षिणी कोरिया इस दिशा में अधिक सक्रियता दिखाए और अधिक सहयोग करे।

उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले दक्षिणी कोरिया ने सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर रूस से यह वायदा किया था कि कोरिया की भूमि पर थाड जैसी मिसाइल प्रणाली कभी तैनात नहीं की जाएगी।

इस तरह कोरियाई प्रायद्वीप के इलाके में एक अकेली थाड वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली भी अमरीका की वैश्विक मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के निर्माण के काम में अमरीकी गढ़ का काम कर सकती है और दक्षिणी कोरिया भी जापान की तरह ही रूस और चीन को रोकने के लिए बनाई जा रही अमरीकी वैश्विक मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के निर्माण के काम में सक्रिय रूप से भाग ले सकता है।

थाड से उत्तरी कोरिया को रोकना असम्भव

कोरियाई प्रायद्वीप पर अमरीकी वैश्विक मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के निर्माण का एक नकारात्मक असर यह भी होगा कि इस इलाके में हथियारबन्दी की दौड़ शुरू हो जाएगी। दक्षिणी कोरिया में थाड की तैनाती का उत्तरी कोरिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वह पहले की तरह अपनी मिसाइल प्रौद्योगिकी को बेहतर बनाने और उसमें सुधार करने की कोशिश करता रहेगा।

शायद कोरियाई प्रायद्वीप में थाड वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली की तैनाती के बाद उत्तरी कोरिया दुगुनी गति से अपने मिसाइल कार्यक्रम के विकास में लग जाएगा और वह ऐसे मिसाइल बनाने की कोशिश करेगा, जो दक्षिणी कोरिया में तैनात मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था को धता बता सकें।

उत्तरी कोरिया यह कोशिश करेगा कि वह अपनी ज़मीनी उपयोग के हथियारों में सुधार करने के साथ-साथ पानी के भीतर पनडुब्बियों पर तैनात बैलिस्टिक मिसाइलों का भी आधुनिकीकरण कर सके ताकि इन मिसाइलों को उन इलाकों से छोड़ा जा सके, जो एएन/टीपीवाई-2 नामक बहुउद्देशीय राडार के निगरानी क्षेत्र से बाहर हों।

इस तरह एक भूलभुलैया सी बन जाती है, जब एक प्रकार की सुरक्षा प्रणाली या हथियार बनने के बाद उसकी प्रतिक्रिया में और ज़्यादा ताक़तवर दूसरी प्रणाली या दूसरा हथियार बनाया जाता है। कोरियाई प्रायद्वीप पर अमरीकी वैश्विक मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था के हथियार तैनात होने के बाद रूस और चीन भी प्रतिक्रियास्वरूप कोई न कोई कार्रवाई करेंगे। और इसका परिणाम यह होगा कि इस इलाके में हथियारबन्दी की दौड़ शुरू हो जाएगी।

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