Baikonur Shuysky accordion Before heading down into the park, spend a moment on the palace balcony to take in the view of the greenery and the Grand Cascade from above. If it's open, explore the grotto beneath the fountain to see the 18th-century engineering feats that helped pipe in water from springs in the surrounding Ropsha Hills and make the cascade's 64 water jets work in synchronicity. Ironstone A lightning over the Ostankino Blind photographer The history of Russian shipbuilding begins with the Admiralty Shipyard in Saint Petersburg. It was founded by Peter I (November 15, 1704), and as early as April 29, 1706, the first ship was lowered into the water. It was the first industrial enterprise. One-way tickets cost about 10 euros for adults and 6 euros for children aged 6-11.  // View of one of the 7 Stalin skyscrapers (the Seven Sisters), Bolshoy Ustinsky Bridge near the Kotelnicheskaya Embankment. The Sinara electric locomotive is designed to move freight trains along rail tracks. It can pull a train weighing up to 9,000 tons in areas with inclines of 8%.
बायकानूर अन्तरिक्ष अड्डा 62 साल का हुआ सेण्ट पीटर्सबर्ग के पास पितेरगोफ़ का शानदार महल और फव्वारे

अकार्डियन रूसी वाद्ययन्त्र कैसे बन गया?

अकार्डियन को भी आज वैसे ही रूस की पहचान माना जाता है, जैसे भालू को या बललायका को। लेकिन वास्तव में यह वाद्य-यन्त्र यूरोप से रूस आया है।
  यूलिया रीबिना, अनस्तसीया करगोदिना
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Julia Pepelyaeva

अकार्डियन सबसे पहले रूस के साँक्त पितेरबुर्ग (सेण्ट पीटर्सबर्ग) प्रदेश में पहुँचा था। फिर वहाँ से वह वोलग्दा, तूला, नीझ्नी नोवगरद आदि रूस के दूसरे प्रदेशों में पहुँचा। उन्हीं के बीच इवनोवा प्रदेश का शूया क़स्बा भी है।
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और शूया में अकार्डियन का इतिहास बचा रह गया, जिसके अनुसार 1870 में शूया का एक निवासी इवान सकलोफ़ नीझ्नी नोवगरद के बाज़ार से तलयान्का नाम का एक बाजा लेकर आया। उसने ख़ुद भी वैसा ही बाजा बनाने की कोशिश की। लेकिन वह वैसा बाजा नहीं बना पाया।
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बाद में सकलोफ़ और उसके अकार्डियन सारे रूस में मशहूर हो गए। इस तरह शूया में अकार्डियन बनाए जाने लगे।
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रूस के दूसरे शहरों में बनाए जाने वाले या दूसरे देशों में बनने वाले अकार्डियनों से शूया के अकार्डियन हमेशा कुछ अलग क़िस्म के होते हैं। इन अकार्डियनों को बनाते हुए ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है कि उसके स्वर बाक़ी अकार्डियनों से एकदम भिन्न और दिल में उतर जाने वाले होते हैं।
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शूया की अकार्डियन फ़ैक्ट्री में बने अकार्डियनों का प्रत्येक स्वर कुछ-कुछ ’ओवर टोन’ (ऊपरितान) लिए होता है यानी सामान्य स्वर से कुछ ज़्यादा ही तेज़ होता है। इसलिए ऐसा लगता है, जैसे एक स्वर की जगह दो-तीन स्वर बज रहे हों।
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इन अतिरिक्त स्वरों की वजह से अकार्डियन वादन बड़ा विशिष्ट-सा हो जाता है और उसकी आवाज़ बड़ी नर्म और गेय हो जाती है। प्रसिद्ध अकार्डियन-वादकों का कहना है कि शूया के अकार्डियनों के स्वर सुनकर ऐसा लगता है कि मानों कोई व्यक्ति गा रहा है। इतालवी और जर्मन अकार्डियन के मुक़ाबले रूसी अकार्डियन बेहद नर्म और तेज़ स्वरों में बजता है।
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रूसी गीत-संगीत भी ऐसा ही होता है। इन रूसी अकार्डियनों पर रूसी मज़ाकिया लोक चौपदियाँ ’चिस्तूश्की’ गाई जा सकती हैं और सुरीले रूसी लोकगीतों का भी यह अच्छा संगी है।
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शूरा की अकार्डियन फ़ैक्ट्री के अकार्डियन-विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वाद्य की आवाज़ तय करना ही उसके निर्माता के लिए सबसे ज़िम्मेदारी भरा काम होता है। हर वाद्य की आवाज़ के सरगम को कई-कई बार जाँचा जाता है।
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शुरू में शूया अकार्डियन फ़ैक्ट्री के विशेषज्ञों ने अकार्डियनों का सरगम सुनिश्चित करने के लिए ट्यूनर का इस्तेमाल करने की कोशिश की। लेकिन तुरन्त ही ट्यूनर का प्रयोग बन्द कर दिया क्योंकि ट्यूनर से अकार्डियन के स्वर वैसे ही बदल जाते थे, जैसे किसी चित्रकार के मूल चित्र की जगह उसकी नकल सामने रख दी जाए।
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शूया के अकार्डियन बाहर से देखने में भी दूसरे अकार्डियनों से एकदम भिन्न होते हैं। वे रंग-बिरंगे और बेहद ख़ूबसूरत होते हैं। उन पर तरह-तरह के डिजाइन बने होते हैं।
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आम तौर पर इन अकार्डियनों पर एक जैसे डिजाइन ही बनाए जाते हैं। लेकिन अगर कोई चाहे तो इन अकार्डियनों पर हीरे-मोती भी जड़े जा सकते हैं। सुविनियर के रूप में जो अकार्डियन बनाए जाते हैं, उनपर ऐसे चित्र उकेरे जाते हैं, जो रूसी लोककथाओं से जुड़े होते हैं।
13 जून 2017
Tags: संगीत

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