चेख़फ़, तलस्तोय, दस्ताएवस्की : रूसी लेखकों के कुलनामों का मतलब क्या है?

रूस-भारत संवाद ने यह जानने की कोशिश की है कि तलस्तोय, दस्तोयवस्की, चेख़फ़, पस्तेरनाक, नबोकफ़ और सलझिनीत्सिन जैसे विश्व के क्लासिक माने जाने वाले रूसी लेखकों के कुलनामों और उनके कुछ पात्रों के कुलनामों का मतलब क्या है?
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स्रोत :Natalya Mikhaylenko

पूश्किन

अलिक्सान्दर पूश्किन शायद रूसी साहित्य और रूसी संस्कृति के वैसे ही प्रमुख प्रतीक हैं, जैसे दाँते इतालवी साहित्य के और ग्योथे जर्मन साहित्य के। जो लोग रूसी भाषा से अच्छी तरह परिचित नहीं हैं उनके लिए शायद यह बात समझना बेहद मुश्किल होगा क्योंकि पूश्किन की कविताओं का जब अनुवाद किया जाता है तो बहुत कुछ ऐसा भी है जो अनुवाद होने से छूट जाता है। पूश्किन — एक प्राचीन कुलीन रूसी वंश है, जिसकी नींव चौदहवीं सदी में ग्रिगोरी मरख़ीनिन ने रखी थी, जिन्हें लोग ’पूश्का’ के नाम से  भी बुलाते थे।

रूसी भाषा में पूश्का का मतलब होता है — तोप। लेकिन तब रूस में तोपख़ाने नहीं थे और तोप भी शायद एकाध ही होगी। शायद ऐसा हो सकता है कि ज़मींदार मरख़ीनिन को यह उपनाम इसलिए मिला हो क्योंकि वे  ’पूशा’ नामक जानवर के फ़र के शानदार कपड़े पहना करते थे। इस जानवर के फ़र से बने कपड़े तब बहुत महंगे होते थे और सिर्फ़ बेहद अमीर लोग ही उस तरह के कपड़े पहन सकते थे। लेकिन आज यह पूश्किन नाम रूसी जन-गण-मन में ख़ूब अच्छी तरह से रच-बस गया है और एक रूसी मिथक में बदल गया है। रूस में पूश्किन नाम का इस्तेमाल एक मुहावरे की तरह किया जाता है। माँ-बाप अपने आलसी बच्चे को डाँटते हुए कह सकते हैं —  तुम्हारा होमवर्क कौन करेगा? होमवर्क करने के लिए पूश्किन आएँगे क्या?

लेरमन्तफ़

पूश्किन के ही समकालीन, लेकिन पूश्किन से कनिष्ठ एक दूसरे रूसी कवि हैं  — मिख़ाइल लेरमेन्तफ़। इन्हें हम रूस का दूसरा बड़ा कवि कह सकते हैं। इनका कुलनाम स्कॉटलैण्ड से रूस पहुँचा था। कवि लेरमन्तफ़ के एक पूर्वज गिओर्ग लेरमोन्त सन् 1613 में रूसी सेना में नौकरी करने के लिए रूस आए थे। आश्चर्य की बात तो यह है कि पूश्किन की सबसे प्रसिद्ध रचना, उनकी काव्य-उपन्यासिका ’येव्गेनी अनेगिन’ के प्रमुख नायक अनेगिन का कुलनाम पूश्किन ने रूस के उत्तरी इलाके में बहने वाली नदी ’अनेगा’ के नाम पर बनाया था। लेरमन्तफ़ ने भी अपने विश्व-प्रसिद्ध उपन्यास ’हमारे समय का नायक’ के प्रमुख पात्र ’पिचोरिन’ का कुलनाम एक दूसरी उत्तरी नदी ’पिचोरा’ नदी के नाम पर बनाया था।

तलस्तोय

’युद्ध और शान्ति’ जैसे दुनिया का प्रसिद्ध उपन्यास लिखने वाले रूस के प्रमुख लेखक हैं जागीरदार लेफ़ तलस्तोय। उनका कुलनाम तलस्तोय भी एक प्राचीन रूसी कुलीन कुलनाम है। शायद इस कुलनाम को धारण करने वाला पहला व्यक्ति काफ़ी मोटा रहा होगा क्योंकि रूसी भाषा में ’तोलस्ती’ का मतलब होता है — मोटा। लेफ़ तलस्तोय ने अपने उपन्यास ’आन्ना करेनिना’ के एक पात्र को अपने ही नाम ’लेफ़’ के आधार पर ’लेविन’ कुलनाम दिया है। रूसी में ’लेफ़’ का मतलब होता है — शेर। 

यह कुलनाम देकर तलस्तोय अपने उस पात्र की इस ख़ासियत को उभारना चाहते थे कि वह ख़ुद तलस्तोय का ही प्रतिरूप है। रूसी साहित्य में तलस्तोय वंश के दो और प्रतिनिधियों को भी याद किया जाता है। ये प्रतिनिधि हैं — लेफ़ तलस्तोय के ही समकालीन लेखक अलिक्सेय कंस्तान्तिनविच तलस्तोय और सोवियत लेखक अलिक्सेय निकलाएविच तलस्तोय, जिन्हें सोवियत सत्ता के प्रति निष्ठा रखने के कारण ’लाल जागीरदार’ भी कहा जाता था। रूस की एक प्रसिद्ध समकालीन लेखिका तत्याना तलस्ताया उन्ही की पौत्री हैं।

दस्ताएवस्की

इस महान् रूसी लेखक को यह कुलनाम बेलारूस की ’दस्तोएफ़’ नामक जगह की वजह से मिला है। फ़्योदर मिख़ाइलविच दस्ताएवस्की के पूर्वज ’दस्ताएफ़’ के रहने वाले थे। रूसी लेखक मिख़ाइल बुल्गाकफ़ के प्रसिद्ध उपन्यास ’मास्टर और मर्गरीता’ में एक इस तरह का दृश्य आता है। रूसी लेखक संघ के बाहर बैठी चौकीदारिन दो लेखकों को लेखक संघ के रेस्त्रां में घुसने से रोक रही है और उनसे उनके सदस्यता-कार्ड मांग रही है।

तब एक लेखक उसे यह तर्क देता है कि दस्ताएवस्की के पास लेखक होने का कोई प्रमाणपत्र नहीं था और न ही हो सकता था। इस तर्क के जवाब में चौकीदारिन कहती है — दस्ताएवस्की मर चुके हैं। चौकीदारिन की इस बात का विरोध करते हुए एक लेखक जवाब देता है — दस्ताएवस्की अमर हैं। बाद में यह वाक्य एक स्मृति-लेख की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा। रूसी लेखक बुल्गाकफ़ का कुलनाम रूस में  बेहद लोकप्रिय नाम ’बुल्गाक’ से बना है, जिसका हिन्दी में मतलब होता है — चंचल, चुलबुला या अधीर। 

चेख़फ़

चेखफ़ कुलनाम का चेक गणराज्य से कोई रिश्ता नहीं है। यह कुलनाम तो प्राचीन रूसी कुलनाम चेख़ (या चोख़) से बना है। चेख़फ़ कुलनाम का सीधा रिश्ता रूसी भाषा के एक क्रिया-शब्द ’चिख़ात्’ से है, जिसका हिन्दी में मतलब होता है — छींकना। रूसी समाज में इस तरह के नाम उन लोगों को दिए जाते थे जो लगातार छींकते रहते थे। अपनी जवानी में चेख़फ़ ने अपनी हास्य और व्यंग्य कहानियाँ कई अलग-अलग छद्मनामों से प्रकाशित कराई थीं। उनमें उनका सबसे प्रसिद्ध छद्मनाम था — अन्तोशा चिख़ोन्ते।

इसके अलावा अन्य छद्मनाम थे — मेरे भाई का भाई, लएर्त वीलिस, अश्रुविहीन मनुष्य, श्म्पांस्की और शिलेर शेक्सपियरोविच ग्योथे। चेखफ़ की एक कहानी ’घोड़े का कुलनाम’ का प्रमुख पात्र अपना कुलनाम याद करने की कोशिश कर रहा है। उसे बस, इतना ही याद है कि उसका कुलनाम ’घोड़े’ से सम्बन्धित था। वह दर्जनों कुलनामों पर विचार करता है। बाद में पता लगता है कि उसका कुलनाम ’अव्सोफ़’ है, जो रूसी भाषा के शब्द ’अव्सा’ (यानी जई) से बना है। जई घोड़े का प्रमुख भोजन होता है।

नोबल पुरस्कार प्राप्त रूसी लेखक

बीसवीं सदी में पाँच रूसी लेखकों को नोबल पुरस्कार मिले। उन लेखकों के नाम हैं — इवान बूनिन (1933), बरीस पस्तिरनाक (1958), मिख़ाइल शोलख़फ़ (1965), अलिक्सान्दर सलझिनीत्सिन (1970) और इओसिफ़ ब्रोदस्की (1987)।

इनमें बूनिन का कुलनाम ’बून्या’ शब्द से बना है। कभी रूसी भाषा में अभिमानी और गर्वीले आदमी को ’बून्या’ कहकर पुकारा जाता था। 

पस्तिरनाक — कुलनाम इसी नाम की एक सब्ज़ी के आधार पर बना है। जबकि बरीस पस्तिरनाक के उपन्यास ’डॉक्टर झिवागा’ में उपन्यास के प्रमुख नायक का झिवागा कुलनाम यह दर्शाता है कि वह कुलीन वर्ग का है। इसमें अन्तिम दो अक्षर ’वागा’ समकालीन रूसी भाषा के ’सम्बन्ध कारक’ को प्रदर्शित करते हैं यानी ’झिवोय’ (जीवित) शब्द से ’झिवागा’ शब्द बना, जिसका मतलब है — जीवन्त। 

कुलनाम शोलख़फ़ रूसी विशेषण-शब्द ’शोलख़ी’ से बना है, जिसका मतलब होता है — चेचकरू चेहरे वाला यानी वह व्यक्ति जिसके चेहरे पर फुँसियों या चेचक के दाग हों।

सलझिनीत्सिन कुलनाम ’सलझिनीत्सी’ शब्द से बना है। ’सलझिनीत्सी’ उन लोगों को कहा जाता था, जो जौं उगाते थे और फिर उसे सुखाकर उसे शराब बनाने के लिए तैयार करते थे।

और  अलिक्सान्दर  सलझिनीत्सिन की सबसे मशहूर लम्बी कहानी ’इवान दिनीसविच का एक दिन’ के नायक शूख़फ़ का कुलनाम ’शूख़ी’ शब्द से आया है, जो अलिक्सान्दर का ही प्यार से पुकारा जाने वाला संक्षिप्त नाम है। अलिक्सान्दर को रूसी में प्यार से साशा पुकारा जाता है। साशा को और भी ज़्यादा दुलार में सशूख़ा या शूख़ा कहकर पुकारते हैं। तलस्तोय ने जैसे अपने प्रतिरूपी पात्र का कुलनाम ’लेविन’ रखा था, वैसे ही सलझिनीत्सिन ने इस कहानी में अपने प्रतिरूपी पात्र का नाम शूख़फ़ रखा है यानी इस कहानी में उन्होंने अपने ही जीवन का चित्रण किया है।  

ब्रोदस्की कुलनाम भी दस्ताएवस्की कुलनाम की तरह  उक्रईना के एक नगर ’ब्रोदी’ से बना है। ब्रोदस्की के पूर्वज  ’गलीत्स्की’ नामक जगह के निवासी थे, जिसे आजकल ’ब्रोदी’ के नाम से जाना जाता है।

नबोकफ़ और येरफ़ेइफ़

ये दोनों भी प्रसिद्ध रूसी लेखक रहे हैं।

व्लदीमिर नबोकफ़ का कुलनाम रूसी शब्द ’नबोकी’  से बना है, जिसका मतलब होता है ’एक तरफ़ा झुका हुआ। अपने जीवन का उत्तरार्ध विदेशों में बिताने वाले नबोकफ़ जब अँग्रेज़ी में लिखने लगे और अपने उपन्यास ’लोलिता’ के प्रकाशन के बाद अमरीका में बेहद लोकप्रिय हो गए तो उन्होंने लिखा था कि अमरीकी लोगों को उनका कुलनाम बोलने में दिक़्क़त होती है और वे अक्सर उन्हें नबाकोफ़ या नबूकफ़ कहकर बुलाते हैं।  

’मस्क्वा-पितूश्की’ नामक प्रसिद्ध गद्य-कविता लिखने वाले लेखक विनिदीक्त येरफ़ेइफ़ का कुलनाम येरफ़ेय नाम से बना है। लेकिन इस नाम से जुड़ी एक बात यह भी है कि आजकल पश्चिमी देशों में वीक्तर येरफ़ेइफ़ नाम के एक मशहूर लेखक हैं, जो विनिदीक्त येरफ़ेइफ़ की तरह ही वी० येरफ़ेइफ़ के नाम से लिखते हैं। दोनों लेखकों के एक जैसे नाम होने के कारण पाठक भ्रम में पड़ जाते हैं कि कौनसी रचना किस लेखक की है। 

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