रूस अपनी मोटर-कारों का निर्यात बढ़ाकर तीन गुणा करेगा

रूस अपनी कारों का निर्यात बढ़ाकर सन् 2025 तक तीन गुणा करना चाहता है। रूस जिन देशों में अपनी कारें बेचना चाहता है, उनमें ईरान, लेबनान, जार्डन प्रमुख हैं। इनके अलावा जर्मनी, भारत, चीन तथा अफ़्रीका और लातिनी अमरीका के कुछ देशों को भी रूस अपनी मोटर-कारों का निर्यात करेगा।
cars at a parking
स्रोत :Mikhail Kireev/RIA Novosti

रूस के व्यापार और उद्योग मन्त्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि घरेलू बाज़ार में मोटर-कारों की घटती हुई बिक्री को पूरा करने के लिए कम दामों पर कारों का विदेशों को निर्यात किया जाए। 15 जून को मन्त्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित ’2025 तक मोटरकार उद्योग के निर्यात के विकास की रणनीति’ के मसौदे में यह बात कही गई है।

निर्यात वृद्धि की महत्वाकांक्षा और यथार्थ

इस रणनीति में दो उद्देश्य सोचे गए हैं। 2016 में रूस के मोटर-कार उद्योग ने 2 अरब 40 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था, जबकि अब 2025 तक मोटर-कारों का निर्यात बढ़ाकर दोगुना यानी 5 अरब 90 करोड़ डॉलर तक पहुँचाने का उद्देश्य तय किया गया है। इस तरह संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो साल भर में मोटर उद्योग के कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत यानी 2 लाख 40 हज़ार कारों का निर्यात किया जाएगा और कुल 1 अरब 60 करोड़ डॉलर के स्पेयर पार्ट्स भी बेचे जाएँगे।

इस रणनीति में जो दूसरा महत्वाकांक्षी उद्देश्य रखा गया है, उसके आधार पर देखा जाए तो मोटर-कारों का निर्यात बढ़कर तीन गुना यानी 7 अरब 80 करोड़ डॉलर का हो जाएगा। इस तरह कुल 4 लाख मोटर-कारें (कुल उत्पादन का 16 प्रतिशत हिस्सा) और ढाई अरब डॉलर के अतिरिक्त कल-पुर्जे बेचे जाएँगे। पहले उद्देश्य को पूरा करने के लिए रूस की सरकार को 2 अरब 40 करोड़ डॉलर की सब्सिडी देनी होगी और दूसरे उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह सब्सिडी बढ़ाकर 3 अरब 70 करोड़ डॉलर करनी होगी। 

इस रणनीति के अनुसार, रूस में मोटर-कारों का उत्पादन करके उन्हें निर्यात करने वाले सभी उत्पादकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, चाहे वे स्वदेशी कम्पनियाँ हों या रूस में अपने कारख़ाने चलाने वाली विदेशी कम्पनियाँ।

रूसी कम्पनियों की कारों के निर्यात में जिन देशों को प्राथमिकता दी जाएगी, उनमें पूर्व सोवियत संघ के पतन के बाद सामने आए देशों के अलावा मध्य एशिया के ईरान, लेबनान और जोर्डन जैसे देश तथा जर्मनी, भारत, चीन व अफ़्रीका और लातिनी अमरीका के कुछ देश शामिल हैं। रूस में उत्पादन करने वाली विदेशी कम्पनियों की कारें पूर्व सोवियत संघ के पतन के बाद सामने आए देशों के अलावा ईरान, लेबनान, तुर्की, दक्षिणी अफ़्रीका, मिस्र और ट्यूनिशिया में बेची जाएँगी।

मोटर-कार उद्योग में 2013 से 2016 के बीच जो मन्दी आई है, उसकी भरपाई करने के लिए यह नई रणनीति बनाई गई है। इस रणनीति की परियोजना में बताया गया है कि 2016 में रूस के घरेलू बाज़ार में कुल 15 लाख कारें बेची गई हैं। यह संख्या 2012 के मुक़ाबले आधी से भी कम है। 2013 में रूस में उत्पादित कारों का निर्यात 32 प्रतिशत घट गया था और 2 अरब 20 करोड़ डॉलर से घटकर 1 अरब 50 करोड़ डॉलर रह गया था।

रूसी मोटर-कार उद्योग से जुड़ी वेबसाइट ’ऑटोबिजनेस रिव्यू’ के प्रमुख सम्पादक येव्गेनी येसिकोफ़ का मानना है कि इस नई रणनीति में सैद्धान्तिक रूप से कोई नया क़दम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा — इस रणनीति की वज़ह से कुल मिलाकर रूसी मोटर-कारों का निर्यात बढ़ जाएगा। लेकिन निर्यात में अब तक जो नुक़सान हुआ है, वह शायद ही पूरा हो पाएगा।

मध्यस्थ कम्पनी ’अलपारी’ की वरिष्ठ विश्लेषक आन्ना बरदोवा का कहना है कि इस क़दम की बदौलत रूस के मोटर-कार उद्योग को डूबने से बचाया जा सकेगा, लेकिन कुल मिलाकर हालत बेहतर नहीं होगी। उन्होंने कहा — रूसी ख़रीदारों की क्रय-क्षमता बुरी तरह से गिर गई है। इससे उनकी हालत नहीं बदलेगी। पिछली 29 महीनों से रूस में कारों की बिक्री घटती जा रही है। इसलिए मन्त्रालय यह चाहता है कि कारों का निर्यात बढ़ा दिया जाए।

विदेशी कम्पनियों का क्या होगा

रूस में अपने कारख़ाने लगाने वाली विदेशी मोटर-कार कम्पनियों के साथ रूसी व्यापार और उद्योग मन्त्रालय 7 से 10 सालों के लिए यह दीर्घकालीन समझौता करना चाहता है कि वे रूस के अपने कारख़ानों में हर साल कम से कम 80 हज़ार से 1 लाख तक कारों का उत्पादन करेंगी। इस समझौते में यह भी शामिल होगा कि उन्हें रूस में कितने स्पेयर पार्ट्स का उत्पादन करना होगा।

आजकल रूस में टोयोटा, निसान,फ़ोर्ड, रेनो, माज़दा, हुण्डई जैसी विदेशी कारों का उत्पादन किया जा रहा है। रूसी व्यापार व उद्योग मन्त्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रूस के मोटर-कार उद्योग के मुद्रा में कुल उत्पादन का 45 प्रतिशत उत्पादन रूस में काम करने वाली ये विदेशी कम्पनियाँ करती हैं।

आज मुख्य तौर पर रूस में उत्पादित मोटर-कारों का निर्यात पूर्व सोवियत संघ के पतन के बाद सामने आए देशों के अलावा पश्चिमी एशिया के देशों को किया जाता है। ’हुण्डई’ कम्पनी के रूस स्थित कारख़ानों में बनी कारें पूर्व सोवियत संघ के पतन के बाद सामने आए देशों के अलावा जार्जिया, ट्यूनिशिया, अल्जीरिया और लेबनान को निर्यात की जाती हैं और ’रेनो’ कम्पनी की कारें अल्जीरिया और वियतनाम को बेची जाती हैं।

विश्लेषक एजेंसी ’ऑटोस्टाट’ के अनुसार, 2016 में ’निसान’ कम्पनी ने कुल 3153 कारों का बेलारूस, कज़ाख़स्तान, अज़रबैजान और उक्रईना को निर्यात किया। इसके अलावा 945 ’डाटसन’ कारों का भी लेबनान, बेलारूस और कज़ाख़स्तान को निर्यात किया गया। 

विदेशी मोटर-कार कम्पनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने के लिए उनके कारख़ानों में रूसी मोटर-कार कम्पनियाँ अपनी कारों के कल-पुर्जे बनवा सकती हैं। रूसी व्यापार और उद्योग मन्त्रालय ने इसके अलावा निर्यात बढ़ाने पर टैक्सों में छूट देने की प्रणाली अपनाने का भी प्रस्ताव रखा है। टैक्सों में प्राप्त इस छूट का इस्तेमाल ये कम्पनियाँ आयात करते हुए कस्टम-ड्यूटी चुकाने के लिए कर सकती हैं। इन क़दमों की बदौलत रूस में उत्पादन करने वाली विदेशी मोटर-कार कम्पनियाँ अपना निर्यात 70 हज़ार से लेकर डेढ़ लाख मोटर-कार प्रतिवर्ष तक बढ़ा सकती हैं।

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