गैजेटों का उत्पादन अब चीन की बजाय रूस में सस्ता पड़ेगा

रूसी मुद्रा रूबल की क़ीमत गिरने के बाद टैबलेट, टेलिफ़ोनों और अन्य अभिनव उपकरणों और डिवाइसों का उत्पादन चीन की बजाय अब रूस में करना अधिक सस्ता पड़ने लगा है। रूसी कारख़ानों के प्रशिक्षित कर्मचारी और रूस में उपलब्ध कस्टम व परिवहन सुविधाएँ भी उत्पादक कम्पनियों को आकर्षित कर रही हैं।
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अब रूस में उत्पादन लागत अचानक बहुत कम हो गई है। स्रोत :Vitaly Nevar/TASS

अब विभिन्न डिवाइसों और गैजेटों का उत्पादन करने वाली रूसी कम्पनियाँ अपने उत्पादों का उत्पादन रूस में ही करने जा रही हैं। अर्थ विशेषज्ञ निकीता क्रिचेव्स्की ने बताया कि कुछ रूसी कम्पनियों ने तो चीन की जगह रूस में ही अपने उपकरणों का उत्पादन करना शुरू कर दिया है। 

— अब रूस में उत्पादन लागत अचानक बहुत कम हो गई है —  क्रिचेव्स्की ने बताया — इसके अलावा हमारे यहाँ परिवहन और कस्टम सुविधाएँ भी सहज ही उपलब्ध हैं और उत्पादों को केन्द्रीय रूस से बड़ी आसानी से चीन व अन्य देशों तक पहुँचाया जा सकता है। 

क्रिचेव्स्की के अनुसार, इन गैजेटों का उत्पादन करने के लिए रूस में कारख़ाने खोलने का काम भी चीनी व्यवसायी ही कर रहे हैं। वे चीन में अपने कारख़ाने बन्द करके रूस में फ़ैक्ट्रियाँ और कारख़ाने खोल रहे हैं। क्रिचेव्स्की ने बताया — चीनी प्रबन्धक रूस में भी बड़ी कुशलता से अपने उद्यम चला रहे हैं।  

बच्चों के लिए प्लेपैड टैबलेटों का उत्पादन करने वाली हैमस्टर कम्पनी ने सबसे पहले चीन से रूस में आकर मस्क्वा (मास्को) के पास झिलेज़्नादरोझ्नी नामक शहर में अपनी फ़ैक्टरी लगाई थी। आजकल हैमस्टर के उत्पाद रूस के बड़े-बड़े चेन-स्टोरों में बिक रहे हैं। अब हेमस्टर के मालिक अपने उत्पादों को पश्चिमी यूरोप में बेचने की योजनाएँ बना रहे हैं।   

एक स्टार्टअप कम्पनी के मालिक रमान बुरमीस्त्रफ़ ने बताया — बच्चों के लिए विशेष रूप से बनाए जाने वाले हमारे टैबलेट की ख़ासियत यह है कि बच्चों के माता-पिता अपने कम्प्यूटर या स्मार्टफ़ोन से यह निगरानी कर सकते हैं कि बच्चा टैबलेट में क्या कर रहा है। इस टैबलेट को माता-पिता पूरी तरह से नियन्त्रित कर सकते हैं। जल्दी ही हम एकदम नन्हे बच्चों के लिए मोनोब्लोक, स्मार्ट फ़ोन और प्रशिक्षण एंड्रॉयड रोबोट बनाना शुरू कर देंगे। 

प्लेपैड टैबलेटों की पहली खेप का उत्पादन चीन में कराया गया था और वह खेप बाज़ार में आते ही तुरन्त बिक गई थी। तब रमान बुरमीस्त्रफ़ और उनके साझेदार दिनीस बुलाविन ने चीन में होने वाले लागत-खर्च की रूस में होने वाले लागत-खर्च से तुलना की। वे तुरन्त ही यह समझ गए कि मस्क्वा के पास किसी नगर में हालाँकि फ़ैक्टरी का किराया बाक़ी रूस से दुगुना पड़ेगा, लेकिन फिर भी उनके टैबलेट की लागत क़ीमत चीन के मुक़ाबले बहुत कम होगी और उन्होंने रूस में ही अपने टैबलेट का उत्पादन करने का फ़ैसला कर लिया।   

रमान बुरमीस्त्रफ़ ने बताया — हमने एक फ़ैक्टरी किराए पर लेकर उसकी मरम्मत करवा ली। उसके बाद हमने कुछ कर्मचारियों को रख लिया और उन्हें प्लेपैड टेबलेट बनाना सिखा दिया। एक हफ़्ते बाद ही हमारी फ़ैक्टरी से हमारे उत्पाद बनकर बाहर आने लगे।  

प्लेपैड के अलावा अब रूस में कुछ दूसरी कम्पनियों के टेबलेट व अन्य डिवाइस भी बनाए जाने लगे हैं, जैसे रोग निदान पल्स-स्कैनर अम्गिओस्कान-01पी अब रूस में ही बनाया जाता है। इस स्कैनर से कोई भी व्यक्ति ख़ुद अपनी हृदयवाहिकाओं या दिल की नसों की हालत की जाँच कर लेता है और दिल की कोई भी बीमारी शुरू होने से कई साल पहले ही उस बीमारी के लक्षण पकड़ सकता है। 

’स्कोलकवा’ कोष के निवेश निदेशक व्लदीमिर सकोविच ने कहा — बहुत सी रूसी परियोजनाओं में पूंजी निवेश करने में निवेशक गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं या फिर अलीबाबा जैसी कम्पनियाँ हमारे उत्पाद ख़रीद लेती हैं। मैं यह तो नहीं कहूँगा कि ऐसा आम तौर पर होने लगा है, लेकिन पूरी तरह से काम शुरू होने में और रूस में ही उत्पादन का विकास करने में अभी कुछ समय तो लगेगा ही। लेकिन रूसी कम्पनियों ने दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कम्पनियों और निगमों को अपने उत्पाद बेचने शुरू कर दिए हैं।

 

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